रविवार, 3 दिसंबर 2017

कुरान की सम्पूर्णता संदिग्ध है !

आज  हमें इस बात को  स्वीकार  करना  होगा कि  इस्लाम   सम्पूर्ण   मानव  जाति के अस्तित्व  के लिए खतरा   बन  गया  है  ,क्योंकि   इस्लामी  आतंकवादी जो  क्रूर ,  नृशंश  और  अमानुषिक   कार्य   कर   रहे  हैं उन्हें  देख कर  लोगों  में इस्लाम   से नफ़रत    होने  लगी  है  , जैसे  लोगों   को  जिन्दा  जला  देना   ,  पानी में  डूबा  देना   , बम  से उड़ा  देना  इत्यादि , चूँकि  आतंकी यह काम इस्लाम  के नाम  पर और कुरान की  शिक्षा  से  प्रेरित  होकर  करते   है   ,इसलिये  बाक़ी  मुस्लिम  इसका  विरोध  नहीं  करते  , उलटे कहते  हैं  कि  , तालिबान मुसलमान नहीं है, आइसिस वाले मुसलमान नहीं हैं, बोको हरम मुसलमान नहीं हैं. ये सब भटके हुए हैं इनको देख कर इस्लाम धर्म को परिभाषित नहीं किया जा सकता है,   फिर बताओ पैगम्बर के बाद से जो लोग चले आ रहे हैं उनको क्या बोला जाएगा? जिन लोगों ने खलीफाओं को मारा मुसलमान थे.. जिन लोगों ने पैगम्बर के पूरे खानदान का खात्मा कर दिया  क्या   वह  हिन्दू  ,यहूदी   या  ईसाई  थे ?
जो  मुसलमान  कहते  हैं   कि ओसामा और आइसिस अब आये हैं दुनिया में तो  उनको चाहिए  इस्लाम   का  इतिहास  ठीक  से  पढ़ें क्योंकि  आतंकी  जिस  कुरान के आदेश पर  रोज  हजारों  निर्दोष  लोगों  को   मार  रहे  हैं ,सबसे पहले  उसी  कुरान  के  कारण ही  मुसलमानों  में  खूनी   युद्ध  हुआ   था जो   आज इस्लामी आतंक  के  रूप में  पूरे  विश्व  में  फ़ैल  गया  है  , क्योंकि   मुसलमान 
हमेशा  सत्ता प्राप्ति  के  लिए कुरान  का  अनर्थ (  Mis interpretation). करते   आये  हैं  .इसका  पहला  उदहारण  "सिफ़्फ़ीन  " का  युद्ध (Battle of Siffin )   है

1-कुरान का  भ्रष्टीकरण और सिफ़्फ़ीन  का युद्ध 

इस्लामी इतिहासकार  " सिफ़्फ़ीन  - صفين‎" के  युद्ध (Battle )   को इस्लाम   का  पहला " फ़ित्न - فتن  " कहते  हैं इसका  मतलब राजद्रोह, नागरिक संघर्ष होता है .यह  युद्ध  सन  657  ईस्वी   में मुहम्मद  साहब   के  दामाद   और  चचेरे  भाई  अली  इब्न  अबी   तालिब  और   मुआविया   बिन  अबी  सुफ़यान  की  सेना  के बीच   हुआ  था  , क्योंकि उन   दिनों  अरब  के  कबीलों   के  सरदार  सत्ता  में   हिस्सा  पाने के लिए  मुसलमान  बन  गए  थे   , उन  दिनों  पूरी  कुरआन   जमा नहीं   हो  सकी   थी   ,  लोग  अपने  लाभ के  लिए   कुरान का  मनमाना   अर्थ    कर  रहे थे   ,मुआविया   भी  यही  कर रहा  था   , और  अली  इसका  विरोध  कर  रहे  थे  ,इसी   कारण  से  ईराक    की " अल रिक्का  - الرقة‎  "  नामकी    जगह  पर  अली   और  मुआविया  की सेना में  युद्ध   हुआ   ज़िस्मे मुआविया   के 45,000  और  अली   के 25,000 सैनिक    मारे   गए।  यद्यपि    युद्ध   से   पहले  अली   ने  मुआविया  को   पत्र  द्वारा सचेत  कर दिया  था। पत्र  इस   प्रकार   है

2-अली   का   पत्र न - 55

"तुमने  पवित्र  कुरान   का  अनर्थ  करना  शुरू   कर  दिया    है  ,और कुरान के गलत  अर्थ  के  आधार  पर  तुम सत्ता  और   दौलत पर  कब्जा   लिया है ,तुम लोगों  को  सता  कर  आतंकित   कर रहे   हो  , तुम्हारा सबसे बड़ा   पाप   यह है कि तुमने  मुझे  खलीफा  उस्मान  की  हत्या   का जिम्मेदार  बता दिया  है    ,जबकि मेरी  जुबान   और   हाथ  दौनों   इस  काम  में   निर्दोष   हैं    ,  इसलिए  अल्लाह  से डरो , कहीं  ऐसा न हो कि  शैतान  तुम्हें  जहाँ  चाहे   वहां  खदेड़  दे "

ومن كتاب له عليه السلام

إلى معاوية

أَمَّا بَعْدُ، فَإِنَّ اللهَ سُبْحَانَهُ [قَدْ] جَعَلَ الدُّنْيَا لِمَا بَعْدَهَا، وَابْتَلَى فِيهَا أَهْلَهَا، لِيَعْلَمَ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلاً، وَلَسْنَا لِلدُّنْيَا خُلِقْنَا، وَلاَ بِالسَّعْيِ فِيهَا أُمِرْنَا، وَإِنَّمَا وُضِعْنَا فِيها لِنُبْتَلَى بِهَا، وَقَدِ ابْتَلاَنِي [اللهُ] بِكَ وَابْتَلاَكَ بِي: فَجَعَلَ أَحَدَنَا حُجَّةً عَلَى الاَْخَرِ، فَعَدَوْتَعَلَى طَلَبِ الدُّنْيَا بَتَأْوِيلِ الْقُرْآنِ، فَطَلَبْتَنِي بِمَا لَمْ تَجْنِ يَدِي وَلاَ لِسَانِي، وَعَصَيْتَهُ أَنْتَ وأَهْلُ الشَّامِ بِي، وَأَلَّبَعَالِمُكُمْ جَاهِلَكُمْ، وَقَائِمُكُمْقَاعِدَكُمْ.

فَاتَّقِ اللهَ فِي نَفْسِكَ، وَنَازِعِ الشَّيْطَانَ قِيَادَكَ وَاصْرِفْ إِلَى الاَْخِرَةِ وَجْهَكَ، فَهِيَ طَرِيقُنَا وَطَرِيقُكَ. وَاحْذَرْ أَنْ يُصِيبَكَ اللهُ مِنْهُ بِعَاجِلِ قَارِعَةٍتَمَسُّ الاََْصْلَ وَتَقْطَعُ الدَّابِرَذص، فَإِنِّي أُولِي لَكَ بِاللهِ أَلِيَّةًغَيْرَ فَاجِرَةٍ، لَئِنْ جَمَعَت الاََْقْدَارِ لاَ أَزَالُ بِبَاحَتِكَ.

You began by misinterpreting the Holy Qur'an and on the basis of these misinterpretations you started grasping power and wealth and began oppressing and tyrannizing the people. Your next unholy action was to call me responsible for an action (murder of Caliph Uthman) of which my tongue and hands were both innocent.Fear Allah and do let Satan drive you wherever it wants, "

अली की  हत्या  के बाद ही   मुस्लिम   शासकों   ने कुरान  में   काटछांट    , हेराफेरी   करके  अपने अनुकूल   बनाना  शुरू   कर दिया  था  ,किसी ने कुरान   की पूरी की सूरा (Chapters )   गायब  कर  दी   ,  तो  किसी   ने  कुरान  की  आयतें   कम   कर दीं , और किसी  ने  अपने मर्जी से  कुछ  आयतें  जोड़   डालीं


3-कुरान  की अप्रामाणिकता 
अल्लाह ने   कुरान  के बारे में  दावा किया  है  ,

"बेशक यह  कुरान   हम   ने ही  उतारी  है  ,और   हम ही  इसकी  हिफाजत करने  वाले   हैं  "
 सूरा  -अल हिज्र 15:9 


"إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "15:9

"Indeed, it is We who sent down the Qur'an and indeed, We will be its guardian."15:9

मुसलमान   दावा  करते   हैं कि  कुरान  अल्लाह  द्वारा  भेजी   हुई   आसमानी  किताब  है  जिसमे रत्ती  भर भी    बदलाव    होना  असंभव   है ,गुजरानवाला    निवासी  इस्लाम   के विद्वान  "मुंशी   महबूब  आलम  -  مُنشی محبوب آلم  " ( 1863-1933   )  ने " इस्लामी इनसाइक्लोपीडिया -اَسلامی انسایکلوپیڈیا " के पेज न 559 पर  जानकारी  दी  है  कि  इस  समय दुनिया में 6 प्रकार की कुरान है सभी कुरान एक दूसरे से अलग अलग है और उनकी आयतो की संख्या भी अलग अलग है और सभी कुरान को मानने वाले एक दूसरे की कुरान को ग़लत कहते है.
इनका  विवरण  इस  प्रकार   है ,

1. कूफी कुरान...आयत 6236 
2. बशरी कुरान...आयात 6216 
3. शयामि कुरान...आयत 6250 (Shami or Damascus Quran )
4. मक्की कुरान...आयत 6212 
5. ईराकी कुरान...आयत 6214 
6. साधारण कुरान (आम कुरान)...आयत 6666  (most common these days )

Video-Watch: Corrupt Quran (URDU) Challenge to Zakir Naik by Rev. Dr. Samie Samson - Apnieyesp
Published: 1 year ago By: TheEICM

http://apnieyesp.com/watch/q5gfLpb6vio

इन  सबूतों    हजरत   अली  की   बात सही   साबित होती है कि अली के बाद भी  मुस्लिम    शासकों   ने   अपनी  सत्ता फैलाने   या  बचाये  रखने के लिए इच्छानुसार   कुरान   की  आयतें   कम  या अधिक   कर  दी  थीं   . जो  आयतें  उनके  फायदे की  होती  थीं  उन्हें रहने  देते  या  जोड़   देते  और जो उनके  फायदे  की   नहीं  होती  उन्हें  निकाल  देते   थे  ,    कुरान  की  शिक्षा   से  मुसलमानों ने  दुनिया दो हिस्सों में बाँट रखी है. एक मुस्लिम समाज और दूसरा गैर मुस्लिम समाज.  अब सब लोग समझ चुके हैं. काफिर, मुशरिक, मुनकिर. अब लोगों को समझ आ गया है. अब बच्चा बच्चा जानता है कि काफिर किसको कहते हैं  ,   अल्लाह को एक मानने से नहीं. अल्लाह को एक मनवाने के लिए नहीं  यह  आतंकवाद  सत्ता    प्राप्ति के लिए  हो रहा   है .

जब  वर्त्तमान   कुरान  की  प्राचीन  प्रतियों   में  आयतों   की  संख्या  अलग   दी  गयी   है  तो ऐसी  संदिग्ध  कुरान  के  आधार पर  जिहाद  करना  या  आतंक  फैलाना मूर्खता   नहीं  तो  और  क्या   है ?

(271)

भारत विरोधी कैथोलिकों ने बाइबिल में बदलाव किया !

दिनांक  23  नवम्बर 2017  को   गुजरात गांधी नगर के बिशप  थॉमस मेकवान ने  कैथोलिक ईसाइयों  के नाम   यह  सन्देश जारी किया "'Save Country From Nationalist Forces"अर्थात राष्ट्रवादी   ताकतों  से देश  को बचाएं   , इसका   भावार्थ   है कि  गुजरात के कैथोलिक ईसाई    बी  जे  पी  को वोट नहीं  दें  ,  क्योंकि इन पादरियों ने कांग्रेस  के राज में सीधे साधे  हिन्दुओं  का धर्म  परिवर्तन करा कर   ईसाइयों  की बड़ी संख्या  तैयार कर ली  है  , और आज भी    पादरी यही कर रहे हैं  , बिशप बी  जे पि  का विरोध  क्यों  कर  रहा   है  ? इसका  कारण यह   है  ,  बी  जे पी  एकमात्र  ऐसी  पार्टी  है  जो  मानती  है  ,  कि हिन्दू  घटेगा  तो देश  बटेगा  ,  यही  राष्ट्रवाद  का  मूल  सिद्धांत  है  ,  जबकि मुस्लमान  और ईसाई   लोगों   का धर्म  बदल  कर अपनी संख्या  बढ़ाना  चाहते    है  इनको  डर है  कि अगर  गुजरात  में बी   जे पी  सत्ता  में आएगी  तो  धर्म  परवर्तन  पर  रोक  लग   जाएगी , चूँकि राष्ट्रवाद  का आधार   भारत प्रेम  है  , और बाइबिल मेंएक  जगह  भारत  को "होंदुव " कहा गया  है जो हिन्दू का अपभ्रंश  है  , 
सब  जानते  हैं  की सोनिया  का जन्म  इटली  में हुआ था  , और सोनिया कटटर    कैथोलिक ईसाई  है    जो पोप  का आदेश  मानती   है  ,   लोग  जिसे राहुल  मानते  हैं  उसका असली   ईसाई  नाम  राउल विन्ची (Raul Vinci ) है  , यह  भी अपनी मां की तरह भारत   से नफ़रत  करता  है  ,  सोनिया  के  चमचों  में ज्यादातर  ईसाई  हैं , इन लोगों  को डर हुआ कि अगर    ईसाई इन  आयतों  को पढ़ेंगे तो उनमे भारत के प्रति   लगाव होगा   ,
, इनके भारत  विरोधी  होने  का कारण कैथोलिकों   द्वारा   किया गया  बाइबिल  का   हिंदी अनुवाद  है  , जो  नेट पर उपलब्ध  है  . इसका  नमूना  दिया  जा  रहा  है  , इस  से  इन सोनिया  के सनर्थक  कैथोलिक ईसाइयों  की मक्कारी  का भंडा फूट  गया  है
 ईसाइयों  में मुख्यतः   दो फिरके  हैं  , कैथोलिक  (Cathilic   ) और प्रोस्टेटेण्ट  (Protastant  )  इनकी  बाइबिल  भी अलग   हैं  ,  लेकिन   इनमे कुछ  ऐसी  किताबें  हैं  , जिन्हें  दोनो  मानते  हैं  ,  चूँकि  बाइबिल  का पुराना नियम  हिब्रू  भाषा  में और  नया नियम  ग्रीक  भाषा  और लैटिन  में  है  , इसलिए  यह  लोग   बाइबिल के  अनुवाद में हेराफेरी   करते   हैं  ,  उदहारण  के लिए बाइबिल  के पुराने नियम  की पुस्तक एस्तेर  में  भारत  का उल्लेख   है  ,  और  हिब्रू भाषा में  भारत  को " होंदुव -      "   कहा  गया   है  ,  यह बात   प्रोटेस्टेंट  बाइबिल और  हिब्रू  बाइबिल  में मौजूद  है     देखिये -
1-ProtastantBible
एस्तेर1:1
क्षयर्ष नाम राजा के दिनों में ये बातें हुईं: यह वही क्षयर्ष है, जो एक सौ सताईस प्रान्तों पर, अर्थात हिन्दुस्तान से ले कर कूश देश तक राज्य करता था।
http://mygreatmaster.com/bible/hindi-bible/est.htm
अब आपके सामने इसी  आयत  का हिब्रू अंगरेजी अर्थ  और एक एक शब्द का उच्चारण  और व्याकरण सम्मत अर्थ  दिया  जा रहा  है
2-Hebrew word by word
way-hî וַיְהִ֖י-व् एहि -Now it came to pass
bî-mê בִּימֵ֣י -बि  योमि  - in the days
’ă-ḥaš-wê-rō-wōš; אֲחַשְׁוֵר֑וֹשׁ- अक्षरेश - of Ahasuerus
ה֣וּא- हुव - this
’ă-ḥaš-wê-rō-wōš, אֲחַשְׁוֵר֗וֹשׁ-अक्षरेश -[is] Ahasuerus
ham-mō-lêḵ הַמֹּלֵךְ֙ -ह  मलेक - that reigned
mê-h ond-dūv מֵהֹ֣דּוּ मि  होंदुव - from- India
w-‘ad- וְעַד־-व्  आद - and even to
kūš, כּ֔וּשׁ- कूश- to Ethiopia
še-ba‘ שֶׁ֛בַע- सेबा -seven
w-‘eś-rîm וְעֶשְׂרִ֥ים-व इस्रीम - and twenty
ū-mê-’āh וּמֵאָ֖ה - उमियः  [over] -a hundred
me-dî-nāh. מְדִינָֽה׃-मेदीनह provinces

http://biblehub.com/text/esther/1-1.htm

नॉट  - इस आयत  में  हिब्रू  में  " मे होंदुव- מֵהֹ֣דּוּ  "आया  है  , इसका अर्थ  हिंदुस्तान  से लेकर ( -from India  ) होता  है .


यही  बात  बाइबिल की किताब  एस्तेर  के  लैटिन अनुवाद में  है  . जिसे प्रामाणिक  माना  जाता  है
3-Latin Vulgate
1:1 in diebus Asueri qui regnavit ab India usque Aethiopiam super centum viginti septem provincias
इंगलैंड अमेरिका और  अन्य अंग्रेजी  भाषी देशों  में   बाइबिल का यह   अंगरेजी  अनुवाद प्रचलित  है

4-King James Version
1:1 Now it came to pass in the days of Ahasuerus, (this is Ahasuerus which reigned, from India even unto Ethiopia, over an hundred and seven and twenty provinces:)

लेकिन  जब  कैथोलिक  ईसाइयों   ने बाइबिल मित्र के नाम  से बाइबिल का हिंदी अनुवाद किया  तो  इसी  आयत  का हिंदी  में अनुवाद किया तो बड़ी मक्कारी  से इस आयत  से हिंदुस्तान  शब्द  निकाल  दिया   , यही  नहीं   बाइबिल  में जहाँ  भी  भारत शब्द    आया   है  , अनुवाद में उसे निकाल  दिया  , देखिये
5-Catholic Translation 

एस्तेर का ग्रन्थ : अध्याय 1:1
महाराजा अर्तजर्कसीस के शासनकाल के दूसरे वर्ष, नीसान मास के पहले दिन, मोरदकय ने एक स्वप्न देखा। मोरदकय याईर का पुत्र था, याईर शिमई का और शिमई कीश का। वह बेनयामीन कुल का था।"

दी गयी  लिंक को खोलिये

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=OLD&BookID=19&Chapter=1

इन कैथोलिक  ईसाइयों   ने   बाइबिल की पुस्तक एसतेर  की पहली आयत   में से सर्फ  भारत का नाम  ही  नहीं  निकाल  दिया बल्कि  पूरी  आयत भी  बदल दी  है  ,  और इसे  अपनी साइट  में भी डाल  दिया  है  ,  जबकि मूल हिब्रू  और  प्रोटेस्टेंट   लोगों की बाइबिल  में  सही आयत मौजूद है   ,जिसमे  हिंदुस्तान  के   लिए " होंदुव "  शब्द    है  ,

प्रबुद्ध  पाठकों  से  निवेदन   है  कि  इस  लेख  को गौर  से  पढ़ें  और  दी  गयी सभी  लिंक  को खोल  कर  इस   लेख  की प्रमाणिकता  की जाँच  करके   कारण  का  पता  करें  ,
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मंगलवार, 21 नवंबर 2017

मुल्लों का सफ़ेद झूठ - कुरान में कोई शक नहीं !!

 मुल्ले मौलवी  वैसे तो दावा  करते रहते हैं  कि हम संविधान और न्यायपालिका पर विश्वास रखते हैं  , और कानून का सम्मान करते हैं  ,लेकिन  अक्सर देखा  गया  है कि जब  भी  अदालत कोई ऐसा निर्णय देती है  , या सरकार कोई ऐसा कानून बनाती है  जो  कुरान के विपरीत होता है  ,तो यही मुल्ले मौलवी तुरंत उसका विरोध  करने  लगते  हैं ,और  कहते हैं  की हम  अदालत और संविधान  में से अल्लाह की किताब  को  ही मानेंगे ,यह बात शाहबानो  केस  और सुप्रीम कोर्ट  के तीन  तलाक  वाले फैसले  से सिद्ध  होता है  ,
 हम  यह लेख इसलिए  दे रहे  हैं  कि दिनांक  17 नवम्बर  2017 शुक्रवार  को  सुदर्शन  चैनल  पर बिंदास  बोल  कार्यक्रम  पर  एक बहस  हुई  थी  , जिसमे  प्रसिद्ध  विद्वान्  श्री धर्मपाल  जी आर्य  और  गरीब  नवाज  फाउंडेशन  के अध्यक्ष  मौलाना  अंसार  रजा  में  बहस  हुई  , मौलाना  ने बड़े  गर्व  से कहा  कि दुनियां   में सिर्फ  कुरान  एक  ऐसी  किताब  है  ,जिसमे  कोई  शंका  नहीं  है ,और  सबूत के  लिए कुरान  की सूरा बकरा  की पहली  आयात   सुना  दी .  क्योंकि महेंद्रपाल  जी पहले मौलवी थे और  अरबी  जानते  हैं  ,इसलिए उन्होंने  अंसार रज़ा  के दावे का खंडन   कर  दिया  , लेकिन  अधिकांश  श्रोता  ऐसे थे  इस  बात  को ठीक  से नहीं  समझ  सके  , इसलिए  इस लेख  के माध्यम  से हम  अंसार रजा से  पूछते हैं  कि वह  कुरान   के बारे  इन शंकाओं  का उत्तर   दें ?ताकि   सभी लोग  जान  सकें  ,  मौलाना ने  दावा किया  की कुरान में कोई शंका नहीं  , और  यह  आयत  पेश  की ,


ذَٰلِكَ الْكِتَابُ لَا رَيْبَ فِيهِ هُدًى لِلْمُتَّقِينَ-सूरा  बकरा  -2:1

अरबी में  है  " जालिकल किताब   ला रैब  फ़ीहि  हुदन लिल मुत्तक़ीन "2:1

कुरान  के अधिकांश अनुवादों   में  इस आयत  का   लगभग  यही  अर्थ  दिया  जाता   है
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है (2:1)

लेकिन  कुरान   की  यह  आयत  ही  शंकाएं  पैदा  करने वाली  है  ,
पहली शंका यह है  कि आयत में इस कुरान को "जालिक अल किताब  " कहा  गया है  , अरबी  शब्द   "जालिक - ذَٰلِكَ   " का अर्थ "वह ( that ) होता  है  व्याकरण  के अनुसार masculine singular demonstrative pronoun  है  और अरबी में اسم اشارة  कहते हैं .

इसलिए यदि  इस आयत में मौजूदा कुरान  अभिप्रेत  होती  तो अरबी में "हाजा هذه-" शब्द दिया गया होता ,इसका अर्थ   यह (this ) होता  है  , इस से सिद्ध  होता  है कि यह वर्त्तमान कुरान नकली है  , और वह  असली कुरान कहीं   और होगी .

दूसरी शंका  इस आयत में दिए गए अरबी  शब्द  "मुत्तकीन - مْتّقين  "   से  होती  है  , मुल्ले  इसका अर्थ  परहेजगार  यानि संयमी  करते  हैं  ,  वास्तव  में  यह  शब्द  अरबी शब्द "मुत्तक़ी -مُتّقي "  का बहुवचन   (Plural )   है  , जो अरबी शब्द की मूल धातु (Root Verb )"इ त्क -اتق "  से  बना है  , इसका अर्थ  "डर  ,भय (fear  ) होना  है , चाहे किसी का भी डर  हो  , उदाहरण के लिए कुरान  में नर्क की आग से डरने  को  कहा गया है


وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ-सूरा आले इमरान 3:131
 
अरबी  में " फत्तकू नारु ल्लती उइद्दत लिल  काफ़रीन "3:131


अर्थ  -उस आग से डरो  जो  को काफिरों  के लिए तैयार  है

(Quran-3: 131)-Fear the Fire, which is prepared for:.non believers

इसी  तरह  इस आयत में "ई त्क -اتَّقِ "  शब्द  का प्रयोग जहन्नम  के डर    के बारे में  किया गया  है  , देखिये

(2:206:4) ittaq Fear وَإِذَا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ

इस प्रकार से  जिन  मौलवी ने श्री महेंद्र पाल  आर्य के सामने  कुरान  की जिस  सूरा बकरा  2: 1 आयत  पेश करके यह साबित करने का प्रयास  किया की कुरान में किसी प्रकार की शक और शंका  नहीं  है  , उस आयात का व्याकरण  सम्मत यह  अर्थ  है 

"इसमें शक  नहीं , वह किताब  है  ,  डरपोक लोगों  को राह पर लाने  वाली  "

अतः  किसी  को भी शक नहीं होगा   क्योंक  सब  जानते हैं कि  मुसलमानों  ने हमेशा गैर मुस्लिमों  को डरा डरा कर  ही इस्लाम  कबूल कराया   था ,


इन  प्रमाणों  से स्पष्ट होता है  कि मुसम्मानों  के पास जो कुरान है वह  डुप्लीकेट  है  यानि मुहम्मद  ने   किसी मूल((original  कुरान  से कुछ  अंश  उतार  लिए  थे  ,
शायद  इसीलिए मुल्ले कहते हैं कि कुरान ऊपर से उतरी है

  इसी लिए शिया  कहते  हैं  कि मौजूदा कुरान  अधूरी  और  फर्जी  है 

1-असली  कुरान  कहाँ  है  ?
इस प्रश्न  को उत्तर  मौजूदा कुरान  की सूरा  राद 13:39  में दिया  गया  है  ,

وَعِنْدَهُ أُمُّ الْكِتَابِ  "13:39

अरबी में -इन्दहु  उम्मुल  किताब  
चूँकि मौजूदा कुरान की सूरा बकरा  -2:1  में कुरान  को" वह  किताब "  बताया गया है  ,इसलिए मुस्लिम विद्वानों   ने बड़ी चालाकी से इस आयत का यह  अर्थ कर दिया

 और उसके पास असल किताब (लौहे महफूज़) मौजूद है (13:39)

 लेकिन  ऐसा अर्थ करके मुल्ले खुद फंस गए और शंका होने लगी कि जब असली किताब उसके पास है ,तो "वह" कौन  है  , और असली किताब  किसके पास है ?

वास्तव  में सूरा राद 13: 39  का सही अर्थ यह  है ,

"और उसके पास किताब की माता  है "
Eng-with Him is the Mother of the Book 


and with Him-  3rd person masculine singular possessive pronoun


इन तथ्यों  से शंका  होती है  की सचमुच असली कुरान यानी किताब की माता किसके पास है  "
 1 - यदि खुद अल्लाह के पास होती तो इस आयत में लिखा होता " इंदी  उम्मुल  किताब  -عِندي  أُمُّ الْكِتَابِ  "

2 -अगर रसूल  के पास होती  तो लिखा होता "इन्दर्रसूल उम्मुल किताब

عِند الرّسول أُمُّ الْكِتَابِ 

3-और अगर   दौनों  के पास होती तो लिखा होता -इंदिना   उम्मुल  किताब -عِندنا   أُمُّ الْكِتَابِ  

लेकिन मौजूदा कुरान  की सूरा राद  में यह  तीनों  बातें नहीं  है  , इस से साफ पता चलता है की कुरान की माता  यानी असली कुरान यानी (Hard Disc  )   न तो अल्लाह के पास  है , और न रसूल के पास थी  , बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के पास रही होगी  , जो खो गयी होगी  ,
 इसलिए  हम  मौलाना अंसार रजा  से  गुजारिश  करते  हैं  कि वह  बराये मेहरबानी  हमारा शक  दूर करें  कि  कुरान  की अम्मा  कहाँ  गयी ?और आप मुसलमानों  को नकली कुरान  पढ़ा पढ़ा  कर गुमराह  क्यों  करते  रहते  हो  , ? या  आप  लोग  यह  दावा  करना छोड़  दो कि मौजूदा कुरान  में कोई  शक  नहीं  है

नोट -हमारी  सभी मुल्ले  मौलवियों को चुनौती हैं  इस  लेख  के सबूतों को गलत सबित कर के दिखाएँ 

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बुधवार, 9 अगस्त 2017

सम्भोग जिहाद !

इस्लाम  और  जिहाद  एक दूसरे के बिना नहीं   रह  सकते . यदि  इस्लाम शरीर  है ,तो जिहाद  इसकी आत्मा है . और जिस दिन इस्लाम  से जिहाद  निकल  जायेगा  उसी दिन  इस्लाम  मर  जायेगा . इसीलिए  इस्लाम को जीवित रखने के लिए मुसलमान  किसी न किसी बहाने और   किसी  न किसी  देश में  जिहाद करते  रहते हैं . इमका एकमात्र उद्देश्य  विश्व  के सभी  धर्मों  , संसकृतियों   को नष्ट करके  इस्लामी हुकूमत  कायम  करना  है . अभी तक  तो मुसलमान  आतंकवाद  का सहरा  लेकर  जिहाद  करते  आये थे ,लेकिन  इसी  साल  के अगस्त  महीने में जिहाद  का एक नया  और अविश्वसनीय  स्वरूप   प्रकट  हुआ है ,जो कुरान से  प्रेरित  होकर  बनाया गया है . लोगों  ने इसे "सेक्स  जिहाद ( Sex  Jihad )  का नाम  दिया  है .चूंकि  जिहादियों  की मदद करना भी  जिहाद  माना  जाता है ,इसलिए सीरिया में  चल रहे युद्ध ( जिहाद )  में  जिहादियों  की वासना शांत करने के लिए    औरतों  की  जरुरत  थी . जिसके लिए  अगस्त में  बाकायदा  एक फ़तवा   जारी  किया   गया था .  और उसे पढ़  कर  ट्यूनीसिया   की   औरतें  सीरिया  पहुँच  गयी  थी .और  जिहादियों   के साथ सम्भोग  करने के लिए  तैयार  हो गयीं ,और  मुल्लों ने  कुरान  का हवाला  देकर इस निंदनीय   कुकर्म  को जायज  कैसे  ठहरा  दिया  इस लेख में इसी   बात को स्पष्ट   किया  जा रहा है . ताकि लोग  इस्लाम् के इस घिनावने असली  रूप को देख सकें ,
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है 
अल्लाह चाहता है कि  मुसलमान   जिहाद के लिए अपने बाप ,भाई और पत्नियों को भी छोड़ दें ,तभी अल्लाह खुश होगा  , जैसा की कुरान में  कहा है
"अल्लाह   तो उन्हीं  लोगों  को अधिक पसंद  करता  है ,जो अल्लाह की ख़ुशी के लिए पंक्ति  बना कर जिहाद  करते हैं  " सूरा -अस सफ 61 :4
" हे नबी  कहदो ,तुम्हें  अपने बाप ,भाई  , पत्नियाँ  और  जो माल तुमने कमाया है ,जिन से तुम  जितना  प्रेम  करते हो  , और उनके छूट जाने का  डर  लगा  रहता है .लेकिन  उसकी तुलना में अल्लाह के रसूल को  जिहाद  अधिक प्रिय  है " सूरा -तौबा 9 :24 
2-जिहाद में औरतों से सम्भोग  
मुसलमान  जितने भी अपराध  और  कुकर्म  करते हैं , सब  कुरान से प्रेरित  होते  हैं , क्योंकि  कुरान  हरेक कुकर्म को जायज ठहरता है .जिस से  अपराधियों  की  हिम्मत  बढ़  जाती है , और "सेक्स जिहाद "  कुरान की इस आयत के आधार  पर किया जा रहा है ,

" اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ  "
" हे नबी  हमने तुम्हारे लिए वह  सभी ईमान  वाली ( मुस्लिम )  औरतें  हलाल  कर दी हैं  ,जो रसूल के  उपयोग  के लिए  खुद को  " हिबा- هِبة  " ( समर्पित ) कर दें " सूरा -अहजाब 33: 50
" and  believing woman who offers herself freely  use to the Prophet -Sura-ahzab33:50
नोट -अरबी  शब्द  हिबा  का अर्थ  अपनी किसी  चीज  दूसरों  को उपयोग के  लिए सौंप   देना  , हिबा कुछ  समय के लिए और  हमेशा के लिए भी हो सकता  है . हिबा में  मिली गयी चीज का   जैसे चाहें   उपयोग किया जा सकता है . चाहे  वह  औरत हो  या कोई वस्तू
3-जिहाद्के लिए औरतों का समर्पण 
सामान्यतः  एक  चरित्रवान  ,और शादीशुदा औरत   किसी भी दशा में  खुद को  दूसरे मर्द   के हवाले नहीं  करेगी  , जबकि उस  को यह भी पता हो  कि  उसके साथ  सहवास  किया  जायेगा .लेकिन  मुहम्मद  साहब ने   कुरान में ऐसे  नीच  काम को भी   धार्मिक   कार्य   बना दिया .  जिसका पालन  आज भी  पालन  कर रहे है , इसके पीछे  यह  कारण  है  ,  कि  इस्लाम  औरत को  भोगने की व चीज  है .मुहम्मद  साहब  जब भी जिहाद के लिए  जाते थे ,तो अपनी औरतों को घर में  बंद कर देते थे , और जिहादियों  के साथ नयी औरतें  पड़ते  रहते  थे . और  जिहादी  नयी  औरतों  के लालच में अपनी औरतें रसूल  के हवाले कर देते थे .खुद को रसूल  के हिबा करने के पीछे  यह ऐतिहासिक  घटना  है , हिजरी सन  5  के  शव्वाल महीने में  मुहम्मद साहब को जब यह पता चला कि  मदीना के सभी कबीले  के लोग उनके विरुद्ध   युद्ध   की  तयारी   कर रहे हैं .और उन्होंने  खुद के बचाव के लिये  खन्दक  भी  खोद  रखी  है . तब  मुहम्मद साहब ने  खुद आगे बढ़ कर  उन पर हमला    करने  के कूच   का हुक्म  दे दिया . इसके लिए 1500 तलवारें 300  कवच , 2000 भाले  1500 ढालें जमा कर लीं  थी .इस  जिहादी   लस्कर में  जिहादियों   की औरतें  भी  थी .  जिहादी  तो युद्ध में  नयी औरतों  के  लालच  में  गए थे .  और अपनी औरतें  रसूल  को  हिबा  कर  गए  थे .   और  रसूल ने   उन औरतों  के साथ  सम्भोग को  जायज बना दिया ,  तभी कुरान की यह आयत   नाजिल  हुई थी .जिस के अनुसार खुद को  जिहाद के लिए  अर्पित करने वाली  औरतों  से  सम्भोग करना जायज है .(Quran 33:50)
4-जिहाद अल निकाह 
अंगरेजी  अखबार   डेली  न्यूज (DailyNews )  दिनांक  20 सितम्बर  2013  में प्रकाशित   खबर  के अनुसार  सीरिया  में होने वाले  युद्ध  ( जिहाद )   में  जिहादियों   लिए  ऐसी  औरतों  की  जरुरत    थी  , जो जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करके उनकी वासना  शांत कर सकें  , ताकि वह बिना थके  जिहाद करते रहे,  इसके लिए  अगस्त   के अंत में  एक सुन्नी  मुफ़्ती  ने फतवा  भी जारी कर दिया  था . जो " फारस  न्यूज  ( FarsNews  )  छपा  था .इस  फतवे की खबर पढ़ते ही " ट्यूनीसिया  ( Tunisia )  की  हजारों  विवाहित और कुंवारी  औरतें   सीरिया  रवाना  हो गईं .और जिहाद के नाम  पर   जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करने के लिए राजी  हो गयीं .  ट्यूनिसिया  के " आतंरिक   मामले के  के मंत्री (  Interior Minister  )"लत्फी बिन  जद्दू - لطفي بن جدو " ने ट्यूनिसिया  की National Constituent Assembly में  बड़े  गर्व   से  बताया   कि   जो औरतें  सीरिया  गयी  है ,उनमे अक्सर ऐसी औरतें  हैं  ,जो  एक दिन  में   20 -30  और यहांतक  100  जिहादियों  के साथ  सम्भोग  कर सकती  हैं .और  जो औरतें  गर्भवती  हो जाती  हैं  , उन्हें    वापिस भेज  दिया  जाता  है ,  जिस मुफ़्ती  ने   इस  प्रकार   के जिहाद  कफतावा दिया  था ,उसने  इस का नाम  "  जिहाद  अल  निकाह  - الجهاد النِّكاح  " का नाम  दिया  है .सुन्नी  उल्रमा के अनुसार  यह  एक ऐसा   पवित्र और    वैध  काम  है  ,जिसमे  एक औरत  कई कई जिहादियों  के साथ  सम्भोग करके  उनकी  वासना  शांत  कराती है .लत्फी  बिन जददू  ने यह भी  बताया कि मार्च से  लेकर अब तक   छह  हजार ( 6000 )औरतें  सीरिया  जा चुकी हैं ,और कुछ  की आयु  तो केवल  14  साल  ही है .
 http://www.hurriyetdailynews.com/tunisian-women-waging-sex-jihad-in-syria-minister.aspx?pageID=238&nID=54822&NewsCatID=352

5-सेक्स का फ़तवा 
किसी भी विषय  या समस्या  के बारे में कुरान के आधार पर  जोभी धार्मिक निर्णय  किया जाता है ,उसे फतवा  कहा  जाता है  , और मुसलामनों के लिए   ऐसे फतवा  का पालन  करना  अनिवार्य   हो जाता  है . चूँकि  इन  दिनों  सीरिया में  जिहाद  हो रहा है , जिसमें  हजारों  जिहादी  लगे हुए  हैं  .और  उनकी वासना शांत  करने के लिए औरतों की जरुरत  थी , इस लिए एक सुन्नी मुफ़्ती " शेख  मुहम्मद   अल आरिफी -  شيخ محمّد العارفي  "  ने इसी साल अगस्त में एक फतवा  जारी  कर दिया  था ,इस फतवा में कहा है कि सीरिया  के जिहादियों  की कामेच्छा (  sexual desires  )  पूरी  करने  के लिए और    शत्रु को मारने उनके निश्चय  में  मजबूती (  sexual desires and boost their determiation in killing Syrians.
  प्रदान  करने के लिए " सम्भोग  विवाह"  यानी "अजवाज  अल जमाअ -الزواج الجماع  "  जरूरी  (intercourse marriages )है .फतवा में कहा है   ,जो भी औरत  इस  प्रकार  के  सेक्स  से जिहादियों  की मदद  करेगी उसे  जन्नत  का वादा   किया जाता है ( He also promised “paradise” for those who marry the militants  )

"    ووعد أيضا "الجنة" بالنسبة لأولئك الذين يتزوجون من المسلحين "
    यह फतवा  कुरान  की इस आयत के आधार पर  जारी  किया  गया  है ,
" जिन लोगों ने अपने मन  और  शरीर से जिहाद किया तो ऐसे   लोगों  का  दर्जा सबसे  ऊंचा   माना  जाएगा " सूरा -तौबा 9 :29
6-जिहाद के लिए योनि संकोचन 
मुसलमान   जानते हैं कि भारत में अभी प्रजातंत्र  है ,  और इसमे  जनसंख्या   का  महत्त्व  होता है .इसलिए वह लगातार  बच्चे  पैदा करने  में लगे रहते हैं .और  लगतार  बच्चे पैदा  करने से  उनकी औरतों  योनि इतनी ढीली  हो  जाती  है ,कि  उसमे उनका पति  अपना  सिर  घुसा  कर अन्दर  देख  सकता   है .और अपनी औरतों  की योनि  को संकोचित ( Vaginal Shrink   )  करवाने के लिए धनवान  मुसलमान " हिम्नोप्लास्टी -hymenoplasty   "   नामक ओपरेशन  करवा  लेते थे .चूंकि  सीरिया में सेक्स जिहाद में  एक एक  औरत दिन  में सौ सौ  जिहादियों  के साथ  सम्भोग करा  रही है , जिस से उनकी योनि ढीली    हो जाती  है . और युद्ध के समय ओपरेशन करवाना संभव    नहीं था .इसलिए पाकिस्तान की  एक दवा कंपनी(  Pakistan's pharmacies ) ने एक क्रीम  तैयार  की है .जो  कराची  से सीरिया  भेजी   जा रही  है .पाकिस्तान  के अखबार "एक्सप्रेस ट्रिब्यून ( Express Tribune  )    में  दिनांक20    अगस्त 2013 की खबर के अनुसार  कराची में  इन दिनों " योनि संकोचन  (   Vaginal Shrink Cream," )  ले लिए एक क्रीम   बिक रही  है . जिसे लोग वर्जिन  क्रीम ( Virgin Cream" )   भी  कह रहे हैं .इसमे उत्पादक ने  दावाकिया है कि   कितनी भी ढीली योनि हो , इस क्रीम  के प्रयोग से  18  साल  की कुंवारी  लड़की की योनि जैसी  सिकुड़ी  और सकरी  बन   जाएगी .इसी  अखबार की सह संपादक "हलीमाँ  मंसूर  "खुद इस क्रीम  को  देखा  , जिसके डिब्बे पर एक हंसती  हुई लड़की की तस्वीर  है .यह क्रीम  दो नामों  से बिक रही  है 1. B-Virgin’, (the package displaying a youthful girl smiling at white flowers).2 . और दूसरी का नाम 18 Again (Vaginal Shrink Cream,)   है  . जो  शीशी  में मिल रही है .इस पर लिखा है "  promise to restore a woman's virginity. "यह  क्रीम   बड़ी   मात्रा में  पाकिस्तान से  सीरिया भेजी  जा रही है  , ताकि संकुचित योनि   पाकर  जिहादी  दिल से जिहाद   करते रहें .
Re-virginising’ in a tube: ‘Purity’ for sale at Pakistani pharmacies

http://blogs.tribune.com.pk/story/18175/re-virginising-in-a-tube-purity-for-sale-at-pakistani-pharmacies/

7-सेक्स जिहाद विडिओ 
शेख  मुहम्मद अल आरिफी  ने टी वी   पर  जो सेक्स  जिहाद का फतवा  दिया  था , वह  यू ट्यूब   पर  मौजूद है ,इस विडिओ का नाम   है  , जिहाद  अल निकाह -jihad al nikah- جهاد النكاح ... فتوى حقيقة او بدعة "

http://www.youtube.com/watch?v=2ftO8Zkvl18

यह लेख पढनेके  बावजूद जो लोग इस्लाम  को धर्म मानते हैं  और मुसलमानों  से सदाचारी  होने की उम्मीद  रखते हैं  ,उन्हें अपने  दिमाग  का इलाज करवा . वास्तव में देश में  जितने भी  बलात्कार  हो रहे हैं  , सबके पीछे इसलाम की तालीम  है .जिसका भंडाफ़ोड़  करना  हरेक  व्यक्ति  का  कर्तव्य  है .समझ  लीजिये इस्लाम  का अर्थ शांति नहीं समर्पण ( surrendar )  है . जिहाद का अर्थ परिश्रम  करना नहीं  आतंक ( terror )  है , कुरबानी का   अर्थ त्याग नहीं जीव हत्या ( slaughter ) है .और  रहमान  का अर्थ दयालु नहीं हत्यारा ( killer )  है .यदि इतना भी  समझ लोगे तो  इस्लाम    को समझ लोगे .
(200/129)

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो !

हमें  यह  लेख  तब  लिखना  पड़ा   जब   12 अगस्त  2014  को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने लद्दाख   के लेह में  लोगों   के सामने यह   बात कहीं  कि " पाकिस्तान  में  सीधी  लड़ाई  लड़ने की  हिम्मत   नहीं  है  ,इसलिये  वह  आतंकवादियों   के  सहारे  परोक्ष युद्ध  छेड़े   हुए   है  "  मोदी   के भक्त  उनके इस  बयान   से भले खुद  को  निडर  और  पाकिस्तान   को डरपोक समझने का  सपना  देखने लगें  ,लेकिन वास्तव में वह  सभी लोग  डरपोक   हैं  .  जो भारत की सीमा में घुस कर  आतंक  फ़ैलाने  वालों  को  मुस्लिम  आतकवादी  या   मुस्लिम  जिहादी   न  कह  कर सिर्फ   आतंकवादी   कहते  हैं  . इसी  तरह वह सभी लोग  डरपोक   हैं  जो  इस  सत्य   को  नहीं  कहते कि  पाकिस्तानी   द्वारा  चलाया   जा  रहा क्षद्म   युद्ध  आतंकवाद  नहीं   मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  के विरुद्ध   जिहाद  है  , जिसका  कारण सीमा  विवाद  नहीं  काफिरों (  हिन्दू )   का  नाश   और और  पूरे  भारत  खंड  पर  इस्लामी  झंडा  फहराना है  .
और  जब  तक भारत  के  हिन्दू ऐसे  आतंकवादियों   को  मुस्लिम  जिहादी  नहीं    मानते   और  उनके   साथ  वैसा ही  व्यवहार  नहीं  करते  जैसा  इजराइल करता है  , तब  तक  देश की  सीमा पर  और अंदर   आतंकवाद  बंद नहीं   हो  सकता   , यह  हमारा दावा  है  ,
इस  बात   को  ठीक  से हमें  इजराइल फिलस्तीन  क्षद्म   युद्ध का कारण और भारत  इजराइल  सम्बन्ध के  बारे में  जानना  जरुरी   है  , क्योंकि  दोनो  ही  इस्लामी  आतंक   से त्रस्त  हैं  ,

1-बाइबिल  में  भारत   का  विवरण 
भारत और  इजराइल का सम्बन्ध   हजारों  साल  पुराना है   . भारत की तरह इस्राएल   का इतिहास भी गौरवशाली है  ज़िस समय अरब के लोग  काफिले  लूटा  करते थे  , इजराइल  में  सोलोमन(solomon)   जैसा प्रतापी  राजा राज करता  था  ,  उसके समय (970-931BC  )  में   भारतीय   सामान  समुद्री  मार्ग इस्राएल  भेजा जाता था  . भारत का  उल्लेख  बाइबिल  में  अनेकों  जगह   मिलता  है  , कुछ  उदाहरण देखिये,

,",फिर हाराम के जहाज जो  "ओफीर Ophir  " ( भारत  का एक  बंदरगाह  सोपारा  जो  मुंबई के पास है )  से  सोना लाते थे वह राजा के लिए चन्दन की लकड़ी  और रत्न    ले  आये  .  राजा   ने  सोना  यहोवा  ( ईश्वर )  के  मंदिर में  लगवाया  और चन्दन  की  लकड़ी से  भजन गाने  वालों  के लिए वीणा और  सारंगियां  बनवा दी "
1  राजा 10 :11 -12 

"समुद्री    मार्ग  से  तर्शीश  के लोग जहाज भर कर सोना ,चांदी  , हाथीदांत , बन्दर  , और  मोर   ले  आते थे  , इस  से राजा  सोलोमन  सभी  राजाओं  में बड़ा राजा  बन  गया  " 1 राजा 10 :22 -24
नोट - इस आयत में हिब्रू  में  बन्दर  के लिए " कॉप "   शब्द  आया है ,जो  संस्कृत  शब्द "कपि "  से लिया गया है   . उल्लेखनीय  बात यह है  कि  उस समय इस आयत में वर्णित  सभी  चीजें  सिर्फ  भारत में ही  मिलती  थी  .

इसके अतिरिक्त  बाइबिल में दो बार स्पष्ट  रूप  से भारत  का  नाम  दिया गया   है  , हिब्रू  भाषा में भारत को "होदुव -הֹדּוּ  "कहा  गया है  , जो  सिंधव( होंदुव )     शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे  "india" कहा  गया है  , जो  सिंधव  शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे "हिंदुस्तान   "लिखा  गया  है  . यह दो आयतें  इस प्रकार हैं ,

"दादानी लोग व्यापारी  थे वे कई  द्वीपों   हाट  लगाते थे  , और  इस्राएल के लिए हाथी  दांत  और  आबनूस की  लकड़ी   लाते थे " यहेजकेल 27:15 -17

 यह क्षयर्ष  नामके राजा के  समय की  बात है  ,जो 127  प्रांतों  और हिंदुस्तान से  कूश  देश तक राज  करत था " एस्तेर 1:1 

फिर राजा  ने  लेखक  बुलवाये  और उनसे यहूदी  और   हिंदुस्तान  से कुश  देश तक सभी  राजाओं  को    पत्र लिख कर भेजने को कहा " एस्तेर 8:9 -10 

2-अरब  जंगली  गधे की  तरह  हैं 
इस्लाम  से पहले अरब   में धार्मिक ग्रन्थ  के  नाम पर  तौरेत  ( Bible ) पढ़ी  जाती   थी  , उसने  अरबों  को इस्माइल  का वंशज    माना  गया है  , मुहम्मद के पूर्वज भी उसी के वंशज  थे  , लेकिन  तौरेत में  इस्माइल  के  बारे में  जो लिखा  है  उसे  जानकर  मुहम्मद साहब  यहूदियिं से जलते थे ,तौरेत में लिखा  है  ,
 ईश्वर ने  इब्राहिम  की रखैल सारा  से  कहा  ,  तू  एक  पुत्र  जनेगी  उसका नाम  इस्माइल  रखना  , उसका  स्वभाव  एक  जंगली  गधे की  तरह होगा    और  उसका हाथ   सभी  निर्दोष  लोगों  पर  उठेगा , वह  अपने ही  लोगों   से लड़ता  रहेगा   "

 बाइबिल उत्पत्ति-अध्याय  16 आयत 11 -12 

चूँकि अरब   के लोग  हमेशा  लड़ते रहते थे  , इसलिए   यहूदी  उनको इब्राहिम  के  नाजायज  बेटे की  संताने  कहते थे   .
और  इसीलिए   मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  यहूदियों   से जलते थे  और  नफ़रत  करते थे   .
( नोट- हराम   की  औलादों   के  बारे में  गीता   में  यही  लिखा है   "   गीता  1 :40 -41 )

3-अरब  इजराइल युद्ध  का कारण 

मुसलमान  यहूदियों  को  क्यों  मारते रहते हैं  , इसका  कारण कोई  राजनीतिक  या  किसी प्रकार का सीमा विवाद   नहीं  है ,बल्कि असली  कारण यहूदी विरोधी  हदीसें   हैं  , उदहारण  के लिए  यह  हदीसें  देखिये ,

1."अबू  हुरैरा  ने कहा कि रसूल  ने  बताया  है  कि अंतिम  न्याय  का  दिन तब  तक  नहीं  आएगा  जब तक  मुसलमान  युद्ध  में सभी यहूदियों  को क़त्ल नहीं  देते  . और  यदि  कोई यहूदी  किसी चट्टान  या  पेड़  के पीछे  भी  छुप   जाएगा  , तो वह  चट्टान  और पेड़  यहूदी   का  पता  बता देंगे  . लेकिन ग़रक़द  का पेड़ चुप  रहेगा   ,क्योंकि  वह  एक  यहूदी  पेड़  है .
 .
 सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 6985 

2 .रसूल  ने कहा कि अन्तिंम  दिन  अल्लाह  का  न्याय  तब तक  पूरा  नहीं  होगा  , जब तक मुसलमान  यहूदियों   से युद्ध  करके  उनको  कत्ल   नहीं  कर देते  . और  यदि  कोई यहूदी  जान  बचने  के लिए  किसी चट्टान  के पीछे भी छुप  जायेगा  ,तो  वह चट्टान  बोलेगी  मुसलमानों  देखो  मेरे पीछे  एक यहूदी छुपा है  , उसे  मार  डालो "

सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 52 हदीस 177

4-अरब   में  यहूदी  विरोधी   शिक्षा 

वैसे  तो  सभी  मुस्लिम  माता पिता  बचपन से ही  अपने  बच्चों  को   गैर मुस्लिमों   के प्रति   नफरॅत की  घुट्टी   पिला देते हैं   ,लेकिन  सऊदी  अरब   की सरकार ने तो  बारहवीं क्लास के  विद्यार्थियों  के  पाठ्यक्रम  बाकायदा     यहूदियों    से नफ़रत  की  तालीम  शामिल  कर रखी  है   "जिसके  एक  अध्याय का   नाम   है   "दरसाते मिनल आलम अल इस्लामी -   دراسات من العالم الاسلامي "इसका  अर्थ  है "इस्लामी दुनिया का अध्ययन"(studies from muslim world   ).इसके  एक  अध्याय में   इजराइल  ,  फिलस्तीन  युद्ध   के एक  जिहाद  बता कर   कहा गया है कियह युद्ध   मुहम्मद साहब के  समय से ही चल रहा है  .इस किताब  के तीसरे   पाठ   में लिखा  है कि  इजराइल  और  फिलस्तीन   के बीच   जो जिहाद   है  ,उसका उद्देश्य   इस  पूरे  भूभाग में फिर से वैसी ही  व्यवस्था   लागु   करना है   ,जो  रसूल   के  समय में थी  , इसलिए   यहूदियों  और  मुसलमानों के बीच  कभी  शांति   नहीं   हो सकती।   क्योंकि यहूदी  झूठे ,  धोखेबाज  और  अल्लाह का  हुक्म  तोड़ने   वाले  हैं   , उनके इन्हीं  दुर्गुणों   के बारे में   कुरान   में  लिखा   है  . इसके बाद किताब  में कुरान की कुछ  आयतें   भी  दी  गयी   हैं   .

http://www.memri.org/image/9455.jpg

5-इस्राएल और  उसके शत्रुओं  की  तुलना 

विश्व में इजराइल  एक  ऐसा देश  है जो  कई तरफ  से  मुस्लिम  देशों  से घिरा हुआ  है  , जो  सभी इजराइल को  बर्बाद  करने पर तुले हुए   हैं
इस्राएल  की  राष्ट्रभाषा   और   धर्मभाषा में   इजराइल  का  हिब्रू  में नाम  " मदीनथ  इस्रायेल - מְדִינַת יִשְׂרָאֵל  "   है   . इस्राएल  के अधिकांश   लोग  यहूदी   है  , आकर और जनसंख्या   के अनुसार  इजराइल  काफी  छोटा  देश   है  , इसकी लम्बाई 470  कि  मी (290  मील ) और  चौड़ाई 135कि  मी (85 मील  है  , और कुल  क्षेत्रफल  10840 वर्ग  कि  मी है  . और   जनसँख्या  सिर्फ 81  लाख (8,134,10 )   है  , जनसंख्या के हिसाब से  विश्व में इजराइल  का  नंबर  97  वां  है  .दूसरी  तरफ  पांच  बड़े मुस्लिम  देश   हैं  जिनकी आबादी  इस   प्रकार   है   ,
1.मिस्र (Egypt)-82,196,587
2.सीरिया -21,960,358
3.जॉर्डन -7,329,643
4.ईरान -77352373
 5.तुर्की -75,087,121

यदि   इजराइल के इन  सभी  मुस्लिम  शत्रु  देशों की  कुल  जनसंख्या जोड़ ली  जाये  तो 263926082 (छब्बीस  करोड़ ,उनचालीस  लाख ,छब्बीस  हजार  और ब्यासी  )   है   .  इनके सामने इजराइल  की  जनसंख्या  केवल 2. 4  प्रतिशत   है  .

6-जिहाद पर  इस्राएल  की  नीति 

यदि   हम  इजराइल  का  नक्शा देखें   तो  पता चलता है कि यह छोटा सा देश  चारों तरफ से शत्रु  मुस्लिम  देशों  से घिरा   हुआ  है  ,और यदि  मुसलिम देशों  का  बस  चलता तो  वे  इजराइल  को कच्चा   चबा  जाते  , लेकिन यदि  आज  इजराइल इन  मुस्लिम  देशों   से टक्कर  ले रहा है तो  उसके पीछे  दो कारण  हैं  , एक  तो  इजराइल  में  सेकुलर  जैसे गद्दार   नहीं  हैं जो जिहादियों   की  मदद  करते  ,  दूसरा  कारण यह है कि इजराइल की नीति हरेक आतंकी  घटना  के बदले  वैसी  ही  और  उसी  अनुपात    में कार्यवाही  करने की  है  , इस  नीति    के बारे में  दिनांक  7 अगस्त  2014  को  इस्राएल  के रक्षा  मंत्रालय   (  Israel Ministry of Foreign Affairs )   द्वारा जो  अधिसूचना  जारी  की  है  , उसका  शीर्षक  "  Fighting Hamas terrorism within the law  "   है  ." सभी  रक्षात्मक  उपाय  करने  के बाद इस्राएल   ने स्वीकार  कर लिया  है कि अब  सैनिक  कार्यवाही  करना  अनिवार्य हो  गया है  ,क्योंकि  पिछले महीने  हमास और  जिहादियों  द्वारा  छोड़े  गए रॉकेटों   की जद  में इजराइल  के  बड़ेशहर  जैसे तेलअबीब  ,हैफा  और  राजधानी  यरूशलेम   भी  आ गए हैं  . इसलिए हम कानूनी  तौर  पर  लोगों  जान  माल  की रक्षा   के लिए  सैन्य  अभियान  चलने पर बाध्य है  . हमारा उदेश्य  हमास के जिहादियों  को समाप्त  करना  है   , जिसके लिए  हमरी  नीति हमास और जिहादियों  के साथ  वैसा  और  उसी   अनुपात में  जवाब  देने  की  है  , जैसा वह   करते हैं  "जिहादियों  के प्रति  इजराइल  की इस  नीति   का  नाम "Operation Protective Edge " है  .

"Israel acknowledges that despite the precautions taken, military operations inevitably lead to a loss of civilian life and property.
During the past month, Hamas' and other Jihadi groups' rockets have reached Israel's largest cities including Tel-Aviv, Haifa and Israel's capital, Jerusalem,Israel is bound by these laws and, thus, committed to limiting itself to a lawful response. This means that, while Hamas uses .International humanitarian law also requires that any military attack be "proportionate" ,
its military attacks against Hamas and other Jihadi groups, Israel is doing everything in its power to adhere to these principles and thus minimize harm to the civilian population: Israeli troop"

8-इस्राएल अरब पर  भारी   क्यों ?

यदि  ईश्वर  की  कृपा  हो  , धर्म  पर  निष्ठां  हो  और  देश  पर  अटूट प्रेम हो तो  थोड़े से लॉग भी   बहुत से लोगों  का मुकाबला  करने  में  सक्षम  हो सकते हैं  , इजराइल के बारे में  बाइबिल   में  लिखा है

"यहोवा ने पृथ्वी  के  सभी देशों  के लोगों  में से तुझे चुन लिया  ,कि तू  उसकी प्रिय  और निज प्रजा ठहरे  , यहोवा ने तुझे   स्नेह कर  के चुन  लिया इसका कारन यह नही कि तुम  गिनती  में अधिक  हो  , परन्तु तुम  तो सभी देशों  के लोगों  से गिनती में  कम   हो "
व्यवस्था विवरण 7 :7 -8 

इन्हीं    विशेष  गुणों  के कारण  छोटा होने पर भी  इजराइल बड़े  मुस्लिम  देशों  का निडर होकर  मुकाबला  करता रहता है  , सबसे बडी बात   यह है कि इजराइल में सेकुल्लर  नामके  गद्दार  नहीं  हैं जो जिहादियों   का सफाया  करने में  रूकावट  पैदा कर सकें और कहें की  मुसलमान  आतंकी नहीं  होते।  चूँकि   मुसलिम  जिहादी  आतंकवादी  इजराइल  की तरह  भारत  को भी अपना  शत्रु  मानते हैं  , और भारत  के अंदर और  बाहर आतंकी वारदातें  करके  भारत  को बर्बाद   करने का  मंसूबा  रखते  हैं  ,इसलिए  आज हमें  इस्लामी  आतंक को निर्मूल  करने के लिए  इजराइल  की  नीति अपनाने की जरुरत है  . केवल  बड़ी जनसंख्या होने से   कुछ  नहीं  होगा  , जब  तक  देश में मौजूद  सेकुल्लर  गद्दारों का सफाया नहीं  होगा  भारत सुरक्षित  नहीं  रहेगा  .
पाठकों  से अनुरोध है  कि फेसबुक  के माध्यम   से इजराइल  के युवा  लोगों  से  मित्रता स्थापित  करें   ,और एक  ग्रुप बनायें

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मंगलवार, 30 मई 2017

भगवा वस्त्रधारी रसूल !

दिग्विजय सिंह   जैसे हिन्दू द्वेषी कांग्रेसी नेताओं   ने  मुसलमामानों की  आतंकी हरकतों   पर  पर्दा डालने के लिए ,और हिन्दुओं  को फ़साने के लिए  " भगवा आतंक " शब्द का अविष्कार किया   था ,  जबकि  सब   जानते हैं  कि

भारतीय   परंपरा में भगवा  रंग को  तयाग , शौर्य  , बलिदान और  साहस  का प्रतिक  माना जाता है  , भगवा रंग को केसरिया  रंग भी  कहा जाता है यह रंग  केसर के पराग से प्राप्त होता है    जिसका  वैज्ञानिक   नाम  Crocus sativus है ,भगवा रंग    हिन्दू धर्म का द्योतक है ,इसलिए  मंदिरों पर  भगवा झंडा लगाया  जाता है   जिसे " धर्मध्वज  . या  धर्मपताका   भी  कहते हैं  ,अधिकांश हिन्दू संत ,सन्यासी भगवा रंग के वस्त्र धारण करते है ,इसके अतिरिक्त  बौद्ध    सन्यासी  भी  गेरुआ   या  भगवा वस्त्र ही   पहिनते है ,  यही कारन है कि  हमारे  तिरंगे में  पहला  रंग भगवा  ही   है,भगवा या केसरिया रंग  ऐसा होता है
http://soithappens.files.wordpress.com/2009/04/saffron-light.jpg

 ,लेकिन  बहुत  कम लोग जानते होंगे कि  मुसलमानों  के  रसूल मुहम्मद साहब और उनके साथी भी केसरिया   यानि  भगवा  रंग के कपडे पहिना करते थे  ,  इसके  बारे में  तीन प्रामाणिक  हदीसें   दी   जा  रही   हैं


1-पहली हदीस 
"कायलाह बिन  मुकरामह ने  कहा कि मैंने देखा कि रसूल दो  लुंगियां ( कमर में बांधने  वाला ) कपडा लपेटे हुए थे  ,जो  केसरिया  रंग से  रंगा हुआ था"


Qaylah bin Makhramah (R.A) says:
"I saw Rasulullah (S.A.W) in such a state that he was wearing two old lungis (sarong, waist wrap) that had been dyed a saffron colour


، عَنْ قَيْلَةَ بِنْتِ مَخْرَمَةَ، قَالَتْ‏:‏ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَعَلَيْهِ أَسْمَالُ مُلَيَّتَيْنِ، كَانَتَا بِزَعْفَرَانٍ


 Shama'il Muhammadiyah-الشمائل المحمدية

English reference : Book 8, Hadith 64
Arabic reference : Book 8, Hadith 66

2-दूसरी  हदीस 
अब्दुलाह बिन  जैद  ने अपने पिता की  बात बयान  की है  कि इब्ने उमर अपने कपडे भगवा रंग में रंगवाया करते थे ,कारण पूछने से उन्होंने बताया की अल्लाह  के  रसूल भी केसरिया रंग  से कपडे रंगवाया करते  थे "


'Abdullah bin Zaid narrated from his father that:
Ibn 'Umar used to dye his garments with saffron. He was asked about that and he said: "The Messenger of Allah [SAW] used to dye his clothes (with it)."


"، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ يَصْبُغُ ثِيَابَهُ بِالزَّعْفَرَانِ فَقِيلَ لَهُ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصْبُغُ ‏.‏

Reference : Sunan an-Nasa'i 5115
In-book reference : Book 48, Hadith 76
English translation : Vol. 6, Book 48, Hadith 5118


3-तीसरी हदीस 
मलिक बिन नाफय कहते हैं  की इब्न  उमर  गेरुआ  ( गेरू  मिट्टी रंग जैसे  )  केसरिया कपडे  पहिना करते   थे "


from Malik from Nafi that Abdullah ibn Umar wore garments dyed with red earth and dyed with saffron.

"وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ يَلْبَسُ الثَّوْبَ الْمَصْبُوغَ بِالْمِشْقِ وَالْمَصْبُوغَ بِالزَّعْفَرَانِ ‏.‏  "

Muwatta Malik-USC-MSA web (English) reference : Book 48, Hadith 4

Arabic reference : Book 48, Hadith 1657


अब  हम  दिग्विजय    , चिदंबरम  जैसे उन  सभी  कांग्रेसियों    से पूछना चाहते जिन्होंने भगवा कपडे धारण करने वाले संतों  खासकर  साध्वी  प्रज्ञा ठाकुर  को भगवा  आतंकवादी  घोषित करके  निर्दोष होने पर इतना प्रताड़ित किया था  , अगर इन   कान्ग्रेसिओं में  हिम्मत हो  तो मुहम्मद   को भगवा  आतंकी बताने   की  हिम्मत   कर  के दिखाएँ  , क्योंकि वह  और उनके साथी भी भगवे केसरिया कपडे पहिनते थे , नहीं   तो लोग कान्ग्रेसिओं को दोगला  और नामर्द   कहेंगे !

और अगर मुल्लों में हिम्मत हो  तो इन हदीसों को गलत साबित कर के दिखाएँ  , नहीं  तो  भविष्य  में कभी  हिन्दुओं को भगवा  आतंकवादी  कहने की भूल   नहीं  करें   , नहीं  तो हम   भी मुहम्मद साहब  को भी  भगवा आतंकवादी  कहने  लगेंगे

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सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

क्रूरता और संहार के इस्लामी अविष्कार


इस्लाम के अनुसार   के  वह सभी लोग  काफ़िर   हैं  ,जो  अल्लाह  और उसके रसूल  पर ईमान नहीं  रखते  , और  जब तक  यह लोग ईमान  नहीं  लाएंगे  तब  तक  उनके विरुद्ध   जिहाद    होता  रहेगा  , इसके  लिए  सभी  गैर मुस्लिमों   को  यह   मानना होगा  की अल्लाह एक है  ,  और   वह  बड़ा मेहरबान  और  रहमदिल    है  , साथ में  यह बात भी  मानना  पड़ेगा  की  मुहम्मद  अल्लाह  के रसूल  हैं  , और उनको  दुनिया   पर  रहम  करने के लिए  भेजा   गया है  ,  लेकिन  लोगों   को  यह   ज़रा सी  बात मनवाने के लिए  मुहम्मद ने  जो  जो तरीके   खोज   निकाले  थे  वह  कुरान और  हदीसों में  मौजूद हैं  , इन  तरीकों  को  देख  कर  सामान्य  व्यक्ति  की  दृष्टि  में  मुहम्मद की तुलना  में नर  पिशाच  भी  देवता  दिखाई  देगा असल में मुहम्मद  साहब मुसलमानों को इतना क्रूर और निर्दयी   बनाना  चाहते थे  , की वे  गैर मुस्लिमों  की  ह्त्या   करने में करते  समय   मारने वालों पर  कोई  दया  नहीं  करे, लेकिन  वह   अपने द्वारा  ईजाद नए नए तरीके  पहले  जानवरों पर  आजमाते  थे  , ऐसे कुछ  तरीके  हदीसों में  दिए  गए हैं
1 - पशुओं  को  मारने के  हदीसी  तरीके
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3
ब-पत्थर मार कर
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7
ब -मादा के गर्भ का बच्चा
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ " मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9
स -दूध पीता बच्चा
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एक
ही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो "
 मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4
ऐसे   निर्दयता  के  काम  करके  जब मुहम्मद  को पूरा भरोसा हो  गया  कि उनके  साथी पूरी  तरह  से  नरराक्षस बन  गए  तो  उन्होंने  और  नए तरीके  ईजाद   कर   किये  जो  कुरान में  मौजूद  है  .
2 -मनुष्यों  को  मारने के कुरानी  तरीके
कुरान में  गैर मुस्लिमों  को  सता  सता  कर जो   यह  तरीके कुरान में  बताये हैं  , वह   जहन्नम  वालों के लिए हैं  ,लेकिन  बगदादी   के लोग   इसी  दुनियां में  ऐसे  ही गैर मुस्लिमों   पर   प्रयोग   करते  रहते हैं ,  निश्चय ही  उनको   इतनी  क्रूरता की  प्रेरणा  कुरान से  ही   मिली   है
"उनकी  खालें  जला  दी   जाएँगी ताकि यातना का मजा चखें "सूरा -निसा  4:56
"चारों  तरफ से घेर  कर खौलता  पानी   डालेंगे  "सूरा -कहफ़  18:29
"उनके सिरों पर लोहे के  हथौड़े मारे  जायेंगे  " सूरा -हज   22:21
" जो बच  कर भागना  चाहेगा तो उसे  वहीँ   धकेल दिया जायेगा  " सूरा -अस सजदा 32:20
" गले में जंजीर   डाल  कर भड़कती  आग में झौंक    देंगे  "सूरा -दहर  76:4
"
हमारे पहरेदार  उग्र  स्वभाव के और निर्दयी   हैं "सूरा -तहरीम   66:6

अगर   कुरान  में दीगयी जहन्नम के बारे में इन  बातों  पर   शंका हो  तो  ,ISIS के द्वारा  जारी किये गए वीडियो  देखिये ,कुरान की  ऐसी  आयतों   से प्रभावित   मुसलमानों   ने   जहन्नम  को    धरती  पर ही  उतार  दिया  ,यहाँ  तो मुसलमान कानून  के भय  से ऐसे काम नहीं  कर पाते , लेकिन  अगर वह  बहुसंख्यक  हो  गए  तो हदीसों  और   कुरआन के   यह तरीके  इस्तेमाल  जरूर   करेंगे   ,क्योंकि  इनके  अविष्कार  कर्ता  रसूल  के सिवा और कोई   नहीं  है

नोट -यह  हमारा  लेख संख्या  206  का अंश है  जो दिनांक 28  फरवरी 2012  को  बनाया गया था


मंगलवार, 10 जनवरी 2017

जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो !

हमें  यह  लेख  तब  लिखना  पड़ा   जब   12 अगस्त  2014  को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने लद्दाख   के लेह में  लोगों   के सामने यह   बात कहीं  कि " पाकिस्तान  में  सीधी  लड़ाई  लड़ने की  हिम्मत   नहीं  है  ,इसलिये  वह  आतंकवादियों   के  सहारे  परोक्ष युद्ध  छेड़े   हुए   है  "  मोदी   के भक्त  उनके इस  बयान   से भले खुद  को  निडर  और  पाकिस्तान   को डरपोक समझने का  सपना  देखने लगें  ,लेकिन वास्तव में वह  सभी लोग  डरपोक   हैं  .  जो भारत की सीमा में घुस कर  आतंक  फ़ैलाने  वालों  को  मुस्लिम  आतकवादी  या   मुस्लिम  जिहादी   न  कह  कर सिर्फ   आतंकवादी   कहते  हैं  . इसी  तरह वह सभी लोग  डरपोक   हैं  जो  इस  सत्य   को  नहीं  कहते कि  पाकिस्तानी   द्वारा  चलाया   जा  रहा क्षद्म   युद्ध  आतंकवाद  नहीं   मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  के विरुद्ध   जिहाद  है  , जिसका  कारण सीमा  विवाद  नहीं  काफिरों (  हिन्दू )   का  नाश   और और  पूरे  भारत  खंड  पर  इस्लामी  झंडा  फहराना है  .
और  जब  तक भारत  के  हिन्दू ऐसे  आतंकवादियों   को  मुस्लिम  जिहादी  नहीं    मानते   और  उनके   साथ  वैसा ही  व्यवहार  नहीं  करते  जैसा  इजराइल करता है  , तब  तक  देश की  सीमा पर  और अंदर   आतंकवाद  बंद नहीं   हो  सकता   , यह  हमारा दावा  है  ,
इस  बात   को  ठीक  से हमें  इजराइल फिलस्तीन  क्षद्म   युद्ध का कारण और भारत  इजराइल  सम्बन्ध के  बारे में  जानना  जरुरी   है  , क्योंकि  दोनो  ही  इस्लामी  आतंक   से त्रस्त  हैं  ,

1-बाइबिल  में  भारत   का  विवरण
भारत और  इजराइल का सम्बन्ध   हजारों  साल  पुराना है   . भारत की तरह इस्राएल   का इतिहास भी गौरवशाली है  ज़िस समय अरब के लोग  काफिले  लूटा  करते थे  , इजराइल  में  सोलोमन(solomon)   जैसा प्रतापी  राजा राज करता  था  ,  उसके समय (970-931BC  )  में   भारतीय   सामान  समुद्री  मार्ग इस्राएल  भेजा जाता था  . भारत का  उल्लेख  बाइबिल  में  अनेकों  जगह   मिलता  है  , कुछ  उदाहरण देखिये ,"फिर हाराम के जहाज जो  "ओफीर Ophir  " ( भारत  का एक  बंदरगाह  सोपारा  जो  मुंबई के पास है )  से  सोना लाते थे वह राजा के लिए चन्दन की लकड़ी  और रत्न    ले  आये  .  राजा   ने  सोना  यहोवा  ( ईश्वर )  के  मंदिर में  लगवाया  और चन्दन  की  लकड़ी से  भजन गाने  वालों  के लिए वीणा और  सारंगियां  बनवा दी "
1  राजा 10 :11 -12

"समुद्री    मार्ग  से  तर्शीश  के लोग जहाज भर कर सोना ,चांदी  , हाथीदांत , बन्दर  , और  मोर   ले  आते थे  , इस  से राजा  सोलोमन  सभी  राजाओं  में बड़ा राजा  बन  गया  " 1 राजा 10 :22 -24
नोट - इस आयत में हिब्रू  में  बन्दर  के लिए " कॉप "   शब्द  आया है ,जो  संस्कृत  शब्द "कपि "  से लिया गया है   . उल्लेखनीय  बात यह है  कि  उस समय इस आयत में वर्णित  सभी  चीजें  सिर्फ  भारत में ही  मिलती  थी  .

इसके अतिरिक्त  बाइबिल में दो बार स्पष्ट  रूप  से भारत  का  नाम  दिया गया   है  , हिब्रू  भाषा में भारत को "होदुव -הֹדּוּ  "कहा  गया है  , जो  सिंधव( होंदुव )     शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे  "india" कहा  गया है  , जो  सिंधव  शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे "हिंदुस्तान   "लिखा  गया  है  . यह दो आयतें  इस प्रकार हैं ,

"दादानी लोग व्यापारी  थे वे कई  द्वीपों   हाट  लगाते थे  , और  इस्राएल के लिए हाथी  दांत  और  आबनूस की  लकड़ी   लाते थे " यहेजकेल 27:15 -17

 यह क्षयर्ष  नामके राजा के  समय की  बात है  ,जो 127  प्रांतों  और हिंदुस्तान से  कूश  देश तक राज  करत था " एस्तेर 1:1

फिर राजा  ने  लेखक  बुलवाये  और उनसे यहूदी  और   हिंदुस्तान  से कुश  देश तक सभी  राजाओं  को    पत्र लिख कर भेजने को कहा " एस्तेर 8:9 -10

2-अरब  जंगली  गधे की  तरह  हैं
इस्लाम  से पहले अरब   में धार्मिक ग्रन्थ  के  नाम पर  तौरेत  ( Bible ) पढ़ी  जाती   थी  , उसने  अरबों  को इस्माइल  का वंशज    माना  गया है  , मुहम्मद के पूर्वज भी उसी के वंशज  थे  , लेकिन  तौरेत में  इस्माइल  के  बारे में  जो लिखा  है  उसे  जानकर  मुहम्मद साहब  यहूदियिं से जलते थे ,तौरेत में लिखा  है  ,
 ईश्वर ने  इब्राहिम  की रखैल सारा  से  कहा  ,  तू  एक  पुत्र  जनेगी  उसका नाम  इस्माइल  रखना  , उसका  स्वभाव  एक  जंगली  गधे की  तरह होगा    और  उसका हाथ   सभी  निर्दोष  लोगों  पर  उठेगा , वह  अपने ही  लोगों   से लड़ता  रहेगा   "

 बाइबिल उत्पत्ति-अध्याय  16 आयत 11 -12

चूँकि अरब   के लोग  हमेशा  लड़ते रहते थे  , इसलिए   यहूदी  उनको इब्राहिम  के  नाजायज  बेटे की  संताने  कहते थे   .
और  इसीलिए   मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  यहूदियों   से जलते थे  और  नफ़रत  करते थे   .
( नोट- हराम   की  औलादों   के  बारे में  गीता   में  यही  लिखा है   "   गीता  1 :40 -41 )

3-अरब  इजराइल युद्ध  का कारण

मुसलमान  यहूदियों  को  क्यों  मारते रहते हैं  , इसका  कारण कोई  राजनीतिक  या  किसी प्रकार का सीमा विवाद   नहीं  है ,बल्कि असली  कारण यहूदी विरोधी  हदीसें   हैं  , उदहारण  के लिए  यह  हदीसें  देखिये ,

1."अबू  हुरैरा  ने कहा कि रसूल  ने  बताया  है  कि अंतिम  न्याय  का  दिन तब  तक  नहीं  आएगा  जब तक  मुसलमान  युद्ध  में सभी यहूदियों  को क़त्ल नहीं  देते  . और  यदि  कोई यहूदी  किसी चट्टान  या  पेड़  के पीछे  भी  छुप   जाएगा  , तो वह  चट्टान  और पेड़  यहूदी   का  पता  बता देंगे  . लेकिन ग़रक़द  का पेड़ चुप  रहेगा   ,क्योंकि  वह  एक  यहूदी  पेड़  है .
 .
 सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 6985

2 .रसूल  ने कहा कि अन्तिंम  दिन  अल्लाह  का  न्याय  तब तक  पूरा  नहीं  होगा  , जब तक मुसलमान  यहूदियों   से युद्ध  करके  उनको  कत्ल   नहीं  कर देते  . और  यदि  कोई यहूदी  जान  बचने  के लिए  किसी चट्टान  के पीछे भी छुप  जायेगा  ,तो  वह चट्टान  बोलेगी  मुसलमानों  देखो  मेरे पीछे  एक यहूदी छुपा है  , उसे  मार  डालो "

सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 52 हदीस 177

4-अरब   में  यहूदी  विरोधी   शिक्षा

वैसे  तो  सभी  मुस्लिम  माता पिता  बचपन से ही  अपने  बच्चों  को   गैर मुस्लिमों   के प्रति   नफरॅत की  घुट्टी   पिला देते हैं   ,लेकिन  सऊदी  अरब   की सरकार ने तो  बारहवीं क्लास के  विद्यार्थियों  के  पाठ्यक्रम  बाकायदा     यहूदियों    से नफ़रत  की  तालीम  शामिल  कर रखी  है   "जिसके  एक  अध्याय का   नाम   है   "दरसाते मिनल आलम अल इस्लामी -   دراسات من العالم الاسلامي "इसका  अर्थ  है "इस्लामी दुनिया का अध्ययन"(studies from muslim world   ).इसके  एक  अध्याय में   इजराइल  ,  फिलस्तीन  युद्ध   के एक  जिहाद  बता कर   कहा गया है कियह युद्ध   मुहम्मद साहब के  समय से ही चल रहा है  .इस किताब  के तीसरे   पाठ   में लिखा  है कि  इजराइल  और  फिलस्तीन   के बीच   जो जिहाद   है  ,उसका उद्देश्य   इस  पूरे  भूभाग में फिर से वैसी ही  व्यवस्था   लागु   करना है   ,जो  रसूल   के  समय में थी  , इसलिए   यहूदियों  और  मुसलमानों के बीच  कभी  शांति   नहीं   हो सकती।   क्योंकि यहूदी  झूठे ,  धोखेबाज  और  अल्लाह का  हुक्म  तोड़ने   वाले  हैं   , उनके इन्हीं  दुर्गुणों   के बारे में   कुरान   में  लिखा   है  . इसके बाद किताब  में कुरान की कुछ  आयतें   भी  दी  गयी   हैं   .

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5-इस्राएल और  उसके शत्रुओं  की  तुलना

विश्व में इजराइल  एक  ऐसा देश  है जो  कई तरफ  से  मुस्लिम  देशों  से घिरा हुआ  है  , जो  सभी इजराइल को  बर्बाद  करने पर तुले हुए   हैं
इस्राएल  की  राष्ट्रभाषा   और   धर्मभाषा में   इजराइल  का  हिब्रू  में नाम  " मदीनथ  इस्रायेल - מְדִינַת יִשְׂרָאֵל  "   है   . इस्राएल  के अधिकांश   लोग  यहूदी   है  , आकर और जनसंख्या   के अनुसार  इजराइल  काफी  छोटा  देश   है  , इसकी लम्बाई 470  कि  मी (290  मील ) और  चौड़ाई 135कि  मी (85 मील  है  , और कुल  क्षेत्रफल  10840 वर्ग  कि  मी है  . और   जनसँख्या  सिर्फ 81  लाख (8,134,10 )   है  , जनसंख्या के हिसाब से  विश्व में इजराइल  का  नंबर  97  वां  है  .दूसरी  तरफ  पांच  बड़े मुस्लिम  देश   हैं  जिनकी आबादी  इस   प्रकार   है   ,
1.मिस्र (Egypt)-82,196,587
2.सीरिया -21,960,358
3.जॉर्डन -7,329,643
4.ईरान -77352373
 5.तुर्की -75,087,121

यदि   इजराइल के इन  सभी  मुस्लिम  शत्रु  देशों की  कुल  जनसंख्या जोड़ ली  जाये  तो 263926082 (छब्बीस  करोड़ ,उनचालीस  लाख ,छब्बीस  हजार  और ब्यासी  )   है   .  इनके सामने इजराइल  की  जनसंख्या  केवल 2. 4  प्रतिशत   है  .

6-जिहाद पर  इस्राएल  की  नीति

यदि   हम  इजराइल  का  नक्शा देखें   तो  पता चललता है कि यह छोटा सा देश  चारों तरफ से शत्रु  मुस्लिम  देशों  से घिरा   हुआ  है  ,और यदि  मुसलिम देशों  का  बस  चलता तो  वे  इजराइल  को कच्चा   चबा  जाते  , लेकिन यदि  आज  इजराइल इन  मुस्लिम  देशों   से टक्कर  ले रहा है तो  उसके पीछे  दो कारण  हैं  , एक  तो  इजराइल  में  सेकुलर  जैसे गद्दार   नहीं  हैं जो जिहादियों   की  मदद  करते  ,  दूसरा  कारण यह है कि इजराइल की नीति हरेक आतंकी  घटना  के बदले  वैसी  ही  और  उसी  अनुपात    में कार्यवाही  करने की  है  , इस  नीति    के बारे में  दिनांक  7 अगस्त  2014  को  इस्राएल  के रक्षा  मंत्रालय   (  Israel Ministry of Foreign Affairs )   द्वारा जो  अधिसूचना  जारी  की  है  , उसका  शीर्षक  "  Fighting Hamas terrorism within the law  "   है  ." सभी  रक्षात्मक  उपाय  करने  के बाद इस्राएल   ने स्वीकार  कर लिया  है कि अब  सैनिक  कार्यवाही  करना  अनिवार्य हो  गया है  ,क्योंकि  पिछले महीने  हमास और  जिहादियों  द्वारा  छोड़े  गए रॉकेटों   की जद  में इजराइल  के  बड़ेशहर  जैसे तेलअबीब  ,हैफा  और  राजधानी  यरूशलेम   भी  आ गए हैं  . इसलिए हम कानूनी  तौर  पर  लोगों  जान  माल  की रक्षा   के लिए  सैन्य  अभियान  चलने पर बाध्य है  . हमारा उदेश्य  हमास के जिहादियों  को समाप्त  करना  है   , जिसके लिए  हमरी  नीति हमास और जिहादियों  के साथ  वैसा  और  उसी   अनुपात में  जवाब  देने  की  है  , जैसा वह   करते हैं  "जिहादियों  के प्रति  इजराइल  की इस  नीति   का  नाम "Operation Protective Edge " है  .

"Israel acknowledges that despite the precautions taken, military operations inevitably lead to a loss of civilian life and property.
During the past month, Hamas' and other Jihadi groups' rockets have reached Israel's largest cities including Tel-Aviv, Haifa and Israel's capital, Jerusalem,Israel is bound by these laws and, thus, committed to limiting itself to a lawful response. This means that, while Hamas uses .International humanitarian law also requires that any military attack be "proportionate" ,
its military attacks against Hamas and other Jihadi groups, Israel is doing everything in its power to adhere to these principles and thus minimize harm to the civilian population: Israeli troop"

8-इस्राएल अरब पर  भारी   क्यों

यदि  ईश्वर  की  कृपा  हो  , धर्म  पर  निष्ठां  हो  और  देश  पर  अटूट प्रेम हो तो  थोड़े से लॉग भी   बहुत से लोगों  का मुकाबला  करने  में  सक्षम  हो सकते हैं  , इजराइल के बारे में  बाइबिल   में  लिखा है

"यहोवा ने पृथ्वी  के  सभी देशों  के लोगों  में से तुझे चुन लिया  ,कि तू  उसकी प्रिय  और निज प्रजा ठहरे  , यहोवा ने तुझे   स्नेह कर  के चुन  लिया इसका कारन यह नही कि तुम  गिनती  में अधिक  हो  , परन्तु तुम  तो सभी देशों  के लोगों  से गिनती में  कम   हो "
व्यवस्था विवरण 7 :7 -8

इन्हीं    विशेष  गुणों  के कारण  छोटा होने पर भी  इजराइल बड़े  मुस्लिम  देशों  का निडर होकर  मुकाबला  करता रहता है  , सबसे बडी बात   यह है कि इजराइल में सेकुल्लर  नामके  गद्दार  नहीं  हैं जो जिहादियों   का सफाया  करने में  रूकावट  पैदा कर सकें और कहें की  मुसलमान  आतंकी नहीं  होते।  चूँकि   मुसलिम  जिहादी  आतंकवादी  इजराइल  की तरह  भारत  को भी अपना  शत्रु  मानते हैं  , और भारत  के अंदर और  बाहर आतंकी वारदातें  करके  भारत  को बर्बाद   करने का  मंसूबा  रखते  हैं  ,इसलिए  आज हमें  इस्लामी  आतंक को निर्मूल  करने के लिए  इजराइल  की  नीति अपनाने की जरुरत है  . केवल  बड़ी जनसंख्या होने से   कुछ  नहीं  होगा  , जब  तक  देश में मौजूद  सेकुल्लर  गद्दारों का सफाया नहीं  होगा  भारत सुरक्षित  नहीं  रहेगा  .
पाठकों  से अनुरोध है  कि फेसबुक  के माध्यम   से इजराइल  के युवा  लोगों  से  मित्रता स्थापित  करें   ,और एक  ग्रुप बनायें

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