बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

कश्मीर स्वर्ग से नर्क कैसे बना ?

कश्मीर को   भारत  का स्वर्ग   कहा जाता है . लेकिन इसको  नर्क  बनाने  में  नेहरू  की  मुस्लिम परस्ती   जिम्मेदार है . जो आज  तक चली  आ रही है . चूँकि देश  का विभाजन धर्म  के आधार  पर हुआ था .और जिन्नाजैसे  कट्टर नेताओं का तर्क था कि  मुस्लिम  बहुल  कश्मीर  के बिना  पाकिस्तान  अपूर्ण  है . इसलिए पाकिस्तान  प्रेरित उग्रवादी  और पाक सेना मिल   कर कश्मीर  में ऐसी  हालत  पैदा  करना चाहते हैं ,जिस से  कश्मीर के हिन्दू  भाग   कर किसी  अन्य  प्रान्त में  चले  जाएँ .कांगरेस  की अलगाववादी  नीति  के  कारण  हालत इतनी गंभीर हो गयी कि   हिन्दू श्रीनगर के  लाल चौक   में खुले आम  तिरंगा  भी नहीं  फहरा  सकते हैं .जबकि हिन्दू  हजारों  साल से कश्मीर में  रहते  आये हैं ,और  महाभारत  के समय  से ही कश्मीर पर हिन्दू  राजा राज्य  करते  आये हैं .  इसके लिए हमें  इतिहास के पन्नों  में   झांकना होगा  ,कि  कश्मीर  को विशेष  दर्जा  देने का  क्या औचित्य  है ,?
1-कश्मीर का प्राचीन  इतिहास 
कश्मीर  के प्राचीन इतिहास    का   प्रमाणिक  इतिहास   महाकवि  " कल्हण "  ने  सन  1148 -49  में  अपनी  प्रसिद्ध  पुस्तक " राजतरंगिणी "  में  लिखा  था . इस पुस्तक में   8 तरंग   यानि  अध्याय   और संस्कृत  में कुल    7826  श्लोक  हैं . इस   पुस्तक के  अनुसार  कश्मीर  का  नाम  " कश्यपमेरु  "   था  .  जो  ब्रह्मा  के  पुत्र  ऋषि  मरीचि  के पुत्र  थे .चूँकि  उस समय में  कश्मीर  में  दुर्गम  और ऊंचे पर्वत थे ,  इसलिए ऋषि कश्यप ने लोगों   को आने जाने के लिए   रास्ते  बनाये थे .  इसीलिए  भारत के इस   भाग  का नाम " कश्यपमेरू " रख  दिया गया  , जो बिगड़  कर  कश्मीर    हो गया  .राजतरंगिणी  के  प्रथम  तरंग में  बताया गया है  कि सबसे पहले  कश्मीर  विधिवत     पांडवों   के  सबसे  छोटे  भाई  सहदेव   ने राज्य    की  स्थापना  की थी , और  उस समय   कश्मीर में   केवल  वैदिक   धर्म   ही  प्रचलित  था .फिर  सन  273  ईसा  पूर्व   कश्मीर में  बौद्ध  धर्म   का  आगमन  हुआ  . फिर भी कश्मीर में  सहदेव  के वंशज  पीढ़ी  दर पीढ़ी   कश्मीर  पर 23  पीढ़ी  तक  राज्य  करते  रहे ,यद्यपि  पांचवीं सदी में " मिहिरकुल "   नामके  " हूण " ने  कश्मीर  पर  कब्ज़ा  कर लिया  था . लेकिन  उसने शैव  धर्म  अपना  लिया  था .
2-कश्मीर  में इस्लाम 
इस्लाम  के  नापाक  कदम  कश्मीर में सन 1015  में   उस समय  पड़े  जब  महमूद  गजनवी ने  कश्मीर  पर हमला  किया था  .लेकिन  उसका उद्देश्य  कश्मीर में इस्लाम   का प्रचार करना नहीं   लूटना था , और लूट मार कर वह वापिस गजनी  चला गया . उसके बाद ही कश्मीर पर दुलोचा  मंगोल  ने  भी हमला  किया . लेकिन  उसे तत्कालीन  कश्मीर के राजा  सहदेव   के मंत्री ने  पराजित करके  भगा  दिया . और सन  1320  में  कश्मीर में  "रनचिन " नामका  तिब्बती  शरणार्थी सेनिक  राज के पास   नौकरी के लिए  आया  . उसकी वीरता  को देख कर राजा ने  उसे सेनापति  बना  दिया . रनचिन  ने  राज से  अनुरोध  किया कि  मैं  हिन्दू  धर्म  अपनाना  चाहता  हूँ .लेकिन  पंडितों  ने  उसके अनुरोध का  विरोध  किया  और कहा कि दूसरी जाती का होने के कारण  तुम्हें  हिन्दू  नहीं  बनाया   जा सकता  .कुछ  समय के  बाद  राजा  सहदेव   का  देहांत  हो  गया  और उसकी पत्नी " कोटा  रानी  "  राज्य  चलाने लगी   और  उसने  " रामचन्द्र " को अपना  मंत्री  बना   दिया .   उस समय  कश्मीर में कुछ  मुसलमान   मुल्ले सूफी बन कर कश्मीर में   घुस  चुके  थे . ऐसा एक  सूफी  " बुलबुल  शाह  " था .उसने  रनचिन   से कहा  यदि  हिन्दू पंडित तुम्हें  हिन्दू नहीं   बनाते  तो  तुम  इस्लाम  कबुल   कर लो .इसा तरह  बुलबुल शाह ने  रनचिन  कलमाँ   पढ़ा कर  मुसलमान   बना दिया . जिस जगह  रनचिन  मुसलमान  बना था उसे  बुलबुल  शाह का  लंगर  कहा  जाता है  .जो  श्रीनगर के पांचवें  पुल के पास है . रन चिन   ने  अपना  नाम   " सदरुद्दीन  "   रखवा   लिया  था .बुलबुल शाह   की संगत  में  रनचिन  हिन्दुओं   का घोर शत्रु  बन गया . और 6 अक्टूबर  1320  को   रन चिन   ने धोखे से  मंत्री   रामचन्द्र   की  हत्या  कर दी .मंत्री   को  मरने के बाद   रनचिन   अपना  नाम " सुलतान  सदरुद्दीन  ' रख  लिया .फिर   अफगानिस्तान  से   मुसलमानों को   कश्मीर में  बुला कर बसाने लगा . और  करीब  सत्तर  हजार  मुसलमान की  सेना  बना ली  .  और कुछ  समय बाद  सन  1339 में  कोटा रानी   को  को कैद  कर लिया और  उस से  बलपूर्वक  शादी   कर  ली .सदरुद्दीन   के सैनिक  प्रति दिन  सैकड़ों  हिन्दुओं   का  क़त्ल  करते थे .इसलिए कुछ लोग  यातो  दर के कारण  मुसलमान  बन गए या भाग कर   जम्मू  चले   गए  . और  कश्मीर  घाटी  हिन्दुओं  से खाली  हो  गयी .

लेकिन   वर्त्तमान  कांगरेस   की  सरकार    जम्मू को भी  हिन्दू विहीन   बनाने में   लगी  हुई है .  काश  उस समय  महर्षि  दयानंद होते   जो  रनचिन  को  मुसलमान   नहीं    होने देते  .
 इसलिए    हिन्दुओं   को चाहिए कि सभी   हिन्दुओं   को अपना  भाई  समझे  , और जो भी  हिन्दू धर्म  स्वीकार करना चाहे उसे   हिन्दू बना कर अपने  समाज में शामिल  कर लें  .  और  हिन्दू विरोधी  कांगरेस का  हर प्रकार   से विरोध   करें  .

http://www.kashmir-information.com/ConvertedKashmir/Chapter9.html

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

रसूल का घरेलू व्यभिचार !

विश्व  में भारतीय  संस्कृति और परम्परा  को महान  माना  जाता  है  .क्योंकि  इस में  स्त्रियों  को  देवी   की  तरह  सम्मान दिया  जाता   है .यहाँ   तक  मौसी  ,  बुआ   चचेरी  बहिन  और पुत्र वधु  पर सपने   में  भी  बुरी  दृष्टि    रखने को   महापाप  और अपराध   माना   गया  है . लेकिन  इन्हीं  कारणों   से  कोई  भी  समझदार  व्यक्ति  इसलाम   को धर्म   कभी  नहीं   मानेगा  , क्योंकि मुहम्मद  साहब  अपनी  वासना  पूर्ति  के लिए कुरान   का  सहारा  लेकर ऎसी   ही स्त्रियों  से सहवास   करने  को वैध  बना  देते  थे  ,  जिसका   पालन  मुसलमान  आज  भी  कर  रहे  हैं .इस  विषय  को स्पष्ट   करने  के  लिये  कुरान   की  उन  आयतों  , हदीसों और  उनकी  ऐतिहासिक  प्रष्ट भूमि  को देखना  होगा  , कि मुहम्मद  साहब  ने  अपनी  सगी  मौसी    , चचेरी   बहिन  और अपने  दत्तक  पुत्र  की पत्नी  से  सहवास  कैसे  किया  था  . और इस  पाप   को   कुरान  की आयत  बना  कर  कैसे   जायज  बना दिया  .

इस्लामी  परिभाषा  में  अपने  शहर  को छोड़  कर  पलायन   करने  को  हिजरत (Migration )  कहा  जाता   है . लगभग  सन 622  में   मुहम्मद  साहब  को   मक्का  छोड़  कर  मदीना   जाना  पडा  था .उनके  साथ   कुछ  पुरुष  और  महिलायें  भी  थी . साथ   में  उनकी   प्रिय  पत्नी  आयशा  भी  थी . इसी  घटना   की  प्रष्ट भूमि   में  कुरआन  की  सूरा  अहजाब की  वह  आयतें    दीगयी   हैं  जिनमे मौसी, चचेरी  बहिन  , और पुत्रवधु   से  शादी  करना  या उनसे  सम्भोग  करने  को जायज   ठहरा  दिया गया  है  .ऐसी  तीन  औरतों  के  बारे में  इस  लेख  में  जानकारी  दी  जा  रही  है , जिन  से मुहम्मद   साहब  ने  कुरान   की  आड़  में  अपनी  हवस  पूरी   की  थी .

1--मौसी  के साथ कुकर्म 
मुहम्मद  साहब  की  हवस  की शिकार  होने  वाली  पहली  औरत  का  नाम  " खौला बिन्त  हकीम अल सलमिया  - خولة بنت حكيم السلمية  "  था  . और  उसके  पति  का  नाम "उसमान  बिन  मजऊम -  عثمان بن مظعون‎ "  था  . खौला  मुहम्मद  साहब  की  माँ  की  बहिन  यानि  उनकी  सगी  मौसी  ( maternal aunt ) थी  . इसको  मुहम्मद  साहब  ने अपना  सहाबी  बना  दिया  था . मदीना  की  हिजरत  में मुहम्मद आयशा  के साथ  खौला को  भी  ले गए  थे .यह  घटना  उसी  समय  की  है इस  औरत  ने  अय्याशी  के  लिए  खुद  को  मुहम्मद   के  हवाले  कर  दिया  था .यह बात  मुसनद   अहमद  में   इस प्रकार दी  गयी  है .
"खौला बिन्त  हकीम  ने रसूल  से पूछा  कि जिस औरत  को सपने में  ही स्खलन   होने  की  बीमारी  हो , तो  वह औरत  क्या  करे  , रसूल  ने  कहा  उसे  मेरे  पास लेटना  चाहिए "
"Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with    me "

 محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا """‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 - 

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬  )hadith-26768 

 तब  खौला  मुहम्मद  साहब  के पास  सो  गयी  , और  मुहम्मद  साहब  ने उसके  साथ सम्भोग  किया .

2-आयशा  ने खौला  को  धिक्कारा 
जब  आयशा  को पता  चला  कि  रसूल  चुपचाप  खौला  के साथ  सम्भोग  कर रहे  हैं तो उसने  खौला को  धिक्कारा और उसकी  बेशर्मी   के  लिए फटकारा  यह  बात इस हदीस  में  दी  गयी  है ,
"हिशाम  के  पिता  ने  कहा  कि  खौला  एक ऎसी  औरत थी  जिसने  सम्भोग  के लिए  खुद  को रसूल  के सामने  प्रस्तुत  कर  दिया था .इसलिए आयशा  ने उस  से  पूछा ,क्या तुझे एक पराये  मर्द  के सामने खुद  को पेश  करने  में  शर्म  नही  आयी ?  तब रसूल  ने  कुरान  की  सूरा  अहजाब 33:50  की  यह  आयत सुना दी , जिसमे  कहा  था  " हे नबी  तुम सम्भोग  के  लिए  अपनी  पत्नियों  की  बारी ( Turn )  को  टाल  सकते  हो .इस  पर आयशा  बोली  लगता  है  तुम्हारा अल्लाह  तुम्हें  और  अधिक  मजे  करने  की इजाजत  दे  रहा  है ."( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِلرَّجُلِ فَلَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏تُرْجِئُ مَنْ تَشَاءُ مِنْهُنَّ‏}‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَرَى رَبَّكَ إِلاَّ يُسَارِعُ فِي هَوَاكَ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الْمُؤَدِّبُ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ وَعَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ يَزِيدُ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ‏.‏

बुखारी -जिल्द 7 किताब  62  हदीस 48

3-आयशा  को ईर्ष्या  हुई 

कोई  भी  महिला  अपने  पति की दूसरी   महिला  से अय्याशी  को  सहन   नहीं  करेगी  . आयशा  ने  रसूल से  कहा  कि  मुझे  इस औरत से ईर्ष्या  हो  रही  है . यह  बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार  दी  गयी  है
"आयशा ने  कहा  कि  मैं  रसूल से  कहा मुझे  उस  औरत   से  जलन  हो रही  है जिसने  सम्भोग  के लिए खुद  को तुम्हारे  हवाले  कर  दिया . क्या एसा  करना  गुनाह  नहीं  है . तब रसूल ने   सूरा अहजाब  की 33:50 आयत  सुना  कर  कहा  इसमे  कोई  पाप  नहीं  है  ,क्योंकि  यह अल्लाह  का  आदेश  है . तब  आयशा ने  कहा  लगता  है , तुम्हारे  अल्लाह  को तुम्हें  खुश  करने  की  बड़ी  जल्दी  है "(It seems to me that your Lord hastens to satisfy your desire. )

सही मुस्लिम -किताब 8  हदीस 3453

4-चचेरी  बहिन  से सहवास 
मुहम्मद  साहब  के  चाचा अबू  तालिब  की बड़ी    लड़की  का  नाम "उम्मे  हानी  बिन्त  अबू तालिब - أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ  "  था  .जिसे   लोग "फकीतः और  " हिन्दा "  भी  कहते  थे .यह  सन 630  ईसवी  यानि  8   हिजरी  की  बात  है . जब  मुहम्मद साहब  तायफ़  की  लड़ाई  में  हार  कर  साथियों  के साथ जान  बचाने  के  लिए  काबा  में  छुपे  थे .लकिन  मुहम्मद  साहब   चुपचाप  सबकी  नजरें   चुरा   कर   उम्मे  हानी  के घर  में  घुस  गए ,लोगों   ने  उनको  काबा  में  बहुत  खोजा  .और आखिर  वह उम्मे  हानी  के घर में  पकडे  गए  .इस  बात  को छुपाने  के  लिए मुहम्मद  साहब  ने एक कहानी  गढ़  दी  और  लोगों  से  कहा कि  मैं  यरुशलेम  और  जन्नत  की  सैर  करने  गया  था .मुझे अल्लाह  ने बुलवाया  था .उस समय  उनकी पहली पत्नी खदीजा  की  मौत  हो चुकी थी वास्तव में  .मुहम्मद  साहब उम्मे  हानी  के  साथ  व्यभिचार  करने  गए  थे .उन्होंने  कुरान  की सुरा अहजाब   की आयत 33:50 सुना  कर सहवास  के  लिए  पटा   लिया  था .यह  बात हदीस  की  किताब  तिरमिजी   में  मौजूद  है . जिसे  प्रमाणिक  माना  जाता  है . पूरी  हदीस  इस प्रकार  है ,

"उम्मे हानी  ने  बताया उस रात  रसूल  ने मुझ से अपने  साथ शादी  करने   का  प्रस्ताव  रखा  , लेकिन मैं इसके  लिये  उन  से  माफी  मागी  . तब  उन्होंने  कहा  कि अभी  अभी  अल्लाह  की तरफ  से  मुझे एक  आदेश   मिला  है ".हे  नबी हमने  तुम्हारे   लिए वह पत्नियां  वैध  कर दी हैं ,जिनके मेहर  तुमने  दे दिये  .और  लौंडियाँ  जो युद्ध  में  प्राप्त  हो ,और चाचा  की  बेटीयाँ  , फ़ूफ़ियों  की  बेटियाँ ,मामू  की बेटियाँ,खालाओं  की  बेटियाँ और  जिस औरत ने तुम्हारे  साथ  हिजरत  की  है ,और वह ईमान  वाली  औरत  जो खुद को  तुम्हारे  लिए समर्पित  हो  जाये "  यह  सुन  कर  मैं  राजी  हो गयी  और  मुसलमान  बन  गयी "

" عَنْ أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَتْ خَطَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَذَرْتُ إِلَيْهِ فَعَذَرَنِي ثُمَّ أَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى ‏:‏ ‏(‏إنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللاَّتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالاَتِكَ اللاَّتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ ‏)‏ الآيَةَ قَالَتْ فَلَمْ أَكُنْ أَحِلُّ لَهُ لأَنِّي لَمْ أُهَاجِرْ كُنْتُ مِنَ الطُّلَقَاءِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ السُّدِّيِّ ‏.‏  "-هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ -

तिरमिजी -जिल्द 1किताब  44  हदीस 3214  पे.522

5-पुत्रवधु  से  सहवास 

मुहम्मद  साहब  के  समय अरब  में दासप्रथा प्रचलित  थी .लोग युद्ध  में  पुरुषों  , औरतों  , और बच्चों  को पकड़  लेते  थे .और उनको  बेच  देते थे .ऐसा  ही  एक लड़का मुहम्मद  साहब  ने  खरीदा  था  . जिसका  नाम " जैद बिन  हारिस  -  زيد بن حارثة‎  " था .(c. 581-629 CE) मुहम्मद  साहब  ने उसे आजाद  करके  अपना दत्तक  पुत्र  बना  लिया था अरबी  में . दत्तक  पुत्र (adopt son ) को " मुतबन्ना "  कहा  जाता  है . यह एक मात्र  व्यक्ति  है  जिसका  नाम कुरान सूरा  अह्जाब  33:37  में    मौजूद  है .इसी  लिए  लोग जैद  को " जैद मौला "या  " जैद बिन  मुहम्मद  भी  कहते  थे .यह बात इस हदीस से  साबित  होती  है ,

""حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا كُنَّا نَدْعُو زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ إِلاَّ زَيْدَ بْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَتْ ‏:‏ ‏(‏ ادعُوهُمْ لآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏   "

तिरमिजी -जिल्द 1 किताब 46 हदीस  3814

कुछ  समय  के बाद् जैद की  शादी  हो गयी  उसकी पत्नी  का  नाम "जैनब बिन्त जहश - زينب بنت جحش‎     " था वह  काफी सुन्दर और  गोरी थी  . इसलिये  मुहम्मद  साहब   की  नजर खराब  हो गयी .उन्होंने घोषित  कर  दिया  कि  आज  से  मेरे  दत्तक  पुत्र  को मेरे  नाम  से  नहीं  उसके असली  बाप  के  नाम  से  पुकारा  जाय .और  इसकी  पुष्टि  के  लिये  कुरान  की सूरा 33:5  भी ठोक  दी .यह  बात  इस  हदीस  से  सबित  होती  है  ,

6-रसूल  की  नीयत  में  पाप 

जैनब  को हासिल करने  के  लिए मुहम्मद  साहब  ने  फिर कुरान का दुरुपयोग   किया .और   लोगों  से  जैद को   मुहम्मद  का   बेटा  कहने  से मना  कर दिया , ताकि  लोग जैनब  को  उनके  लडके  की  पत्नी  नहीं  मानें .
"  जैनब कुरैश कबीले  की  सब से सुंदर लड़की  थी .और  जब  अल्लाह   ने  अपनी  किताब   में  जैद  के  बार में  सूरा 33  की  आयत 5  नाजिल    कर दी , जिसमे  कहा  था  कि  आज  से  तुम  लोग  जैद  को उसके असली  बाप  के  नाम  से  पुकारा   करो .,क्योंकि अल्लाह  की  नजर  में  यह  बात   तर्कसंगत  प्रतीत   लगती  है .और यदि तुम्हें  किसी  के  बाप  का नाम  नहीं पता हो ,तो उस  व्यक्ति  को  भाई  कह  कर  पुकारा  करो ,

मलिक मुवत्ता -किताब  30  हदीस 212

 7-कुरान की  सूरा 33:5  की  व्याख्या 

कुरान की  सूरा अहजाब की आयत 5  के अनुसार दत्तक पुत्र  जैद  को असली  पुत्र  का  दर्जा  नहीं  दिया  गया  , इस आयत  की  व्याख्या यानी तफ़सीर "जलालुद्दीन सुयूती -  جلال الدين السيوطي‎ " ने  की  है . इनका  काल c. 1445–1505 AD है .इन्होने  कुरान  की  जो तफ़सीर   की  है ,उसका  नाम " तफ़सीर जलालैन -تفسير الجلالين  "  है .इसमे  बताया  गया  है  कि रसूल  ने  जैद को अपने  पुत्र  का दर्जा नहीं   देने  के  लिए  यह  तर्क  दिए  थे ,1 .दत्तक  पुत्र रखने की  परंपरा  अज्ञान काल  है , अब इसकी कोई  जरुरत  नहीं  है .2 . मैंने  जिस समय  जैद  को खरीदा  था  ,उस समय अल्लाह ने  मुझे रसूल  नही  बनाया था .3. लोग  जैद  को  मेरा  सगा  बेटा  मान   लेते  थे . जिस  से  मेरी  बदनामी  होती  थी .4.  जैद  ने मुझ  से  जैनब  को तलाक  देने  का  वादा  कर  रखा  है .

{ وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِيۤ أَنعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَٱتَّقِ ٱللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا ٱللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى ٱلنَّاسَ وَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَاهُ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَراً زَوَّجْنَاكَهَا لِكَيْ لاَ يَكُونَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِيۤ أَزْوَاجِ أَدْعِيَآئِهِمْ إِذَا قَضَوْاْ مِنْهُنَّ وَطَراً وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ مَفْعُولاً }

Tafsir al-Jalalayn - (تفسير الجلالين )Sura -ahzab  33:5


इन्हीं  कुतर्कों  के आधार पर लगभग सन625  ईसवी  में  मुहम्मद  साहब  ने अपने दत्तक  पुत्र  जैद  की  पत्नी  से शादी  कर  डाली .यानी  जैनब  के साथ   व्यभिचार  किया .
देखिये  विडिओ -Prophet Muhammad lusts after & steals his adopted son's wife Pt. 2

http://www.youtube.com/watch?v=wp3pMgmGuVo

अपने  निकट सम्बन्ध  की स्त्रियों  के साथ  शारीरिक संबंध  बनाने  को इनसेस्ट (incest )  कहा  जाता  है , विश्व  के सभी  धर्मों  और हर  देश   के  कानून  में  इसे पाप  और  अपराध  माना  गया  है . लेकिन  मुहम्मद साहब  अपनी वासना  पूर्ति  के  लिए   तुरंत कुरान  की  आयत  सूना  देते  थे  . और इस  निंदनीय   काम  को  जायज  बना  देते थे .कुरान  की इसी  तालीम  के  कारण हर  जगह   व्यभिचार  और बलात्कार  हो रहे  हैं .क्योंकि  मुसलमान  इन  नीच  कर्मों  को गुनाह  नहीं  मानते  ,बल्कि  रसूल  की सुन्नत   मानते  हैं .


http://www.slideshare.net/UnveilingMuhammad/khaula-e