रविवार, 31 मार्च 2013

मुसलमान नकली नुत्फे की पैदायश ?


शिक्षा के महत्त्व से कोई भी व्यक्ति इंकार नहीं करता . क्योंकि शिक्षा से मनुष्य विनयशील ,और सभ्य बनता है . ऐसा भी माना जाता है कि जैसे जैसे कोई बालक या व्यक्ति जितनी अधिक शिक्षा प्राप्त करता जाता है ,वैसे ही उसके विचार और चरित्र में बुराइयां दूर होती जाती हैं .और ऐसे व्यक्ति किसी एक देश या जाति के लिए नहीं सम्पूर्ण विश्व की भलाई के लिए ही काम करते है ,
लेकिन यह नियम मूसलामानों पर लागु नहीं होता , क्योंकि ऐसे करोड़ों उदहारण है , कि मुसलमान जितने भी अधिक शिक्षित होते जाते हैं , उतने ही अधिक , उग्र , हिंसक ,अपराधी और आतंकवादी बनाते जाते हैं .इनकी मिसाल उस कार या स्कूटर की तरह है , जिसे जितना भी सुधरवाया जाता है , उतने ही ख़राब हो जाते हैं .और जब जाँच कराई जाती है , तो मैकेनिक कहता है " इनमे तो निर्माण सम्बन्धी दोष है (production defect"और इस कार या स्कूटर को सुधारना असंभव है .इसे तो कबाड़खाने में फेक देना चाहिए .क्योंकि इस कार या स्कूटर को बनाने के लिए जो भी पुर्जे लगाये गए हैं ,वह स्तर हीन ( below standard ) हैं . यही कारण है कि अफजल गुरु , और डेविड हेडली राणा जैसे सभी शिक्षित मसलमान कट्टर आतंकवादी पाए जाते है .क्योंकि इनकी पैदायश में ही खोट ( defect in manufacture ) है ,इस लेख में इसी रहस्य से पर्दा उठाया जा रहा है .और सभी तथ्य कुरान और हदीस से प्रमाणित हैं ,
1-मुसलमानों की फितरत समान है
फितरत अरबी शब्द है ,जिसे "फितरह  فطرة " भी बोला जाता है .हिंदी में इसके अर्थ स्वभाव ' प्रकृति ' या' वृत्ति ' होते हैं .और अंगरेजी में फितरत के अर्थ ‘disposition’nature’instinct’होते हैं .सभी मुसलमानों की फितरत बिलकुल एक जैसी होती है , यह इन हदीसों से साबित होता है ,
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने हमें बताया है ,कि जैसे ही मुसलमानों का बच्चा पैदा होता है .अल्लाह उसकी फितरत बना देता है . जो मरते समय तक वैसी ही बनी रहती है .और जिस से यहूदियों , ईसाइयों और मुसलमानों के बीच का फर्क पता चल जाता है "

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُلِدَ عَلَى الْفِطْرَةِ فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ وَيُنَصِّرَانِهِ وَيُشَرِّكَانِهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ لَوْ مَاتَ قَبْلَ ذَلِكَ قَالَ ‏"‏ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا عَامِلِينَ ‏"‏ ‏.‏

 Sahih Muslim, Book 033, Number 6426

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है बिना फितरत के कोई मुस्लिम बच्चा पैदा नहीं होता , चाहे उसके अभिभावक उसे यहूदी , मजूसी , या ईसाई बनाने का प्रयत्न करें .जैसे तुम किसी जानवर के अंग काट दो उसकी फितरत वही रहेगी "
 Sahih al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 441

2-सभी मुसलमान नुत्फे से बने 

दुसरे लोगों की तरह मुसलमान भी वीर्य यानि नुत्फे से पैदा हुए हैं , यह कुरान की इस आयत से प्रमाणित है ,

" निश्चय ही हमने मनुष्य को गीली मिट्टी के सत से बनाया ,फिर उसे सुरक्षित करके एक जगह टपकती हुई बूंद नुत्फे के रूप में रख लिया ,फिर उस नुत्फे को लोथड़े का रूप दे दिया .फिर उस लोथड़े को बोटी का रूप दे दिया .फिर् बोटियों से हड्डियां बनायी .फिर उन हड्डियों पर मांस चढ़ा दिया .फिर उसका बिलकुल दूसरा ही रूप देकर खडा कर दिया .तो देखो बरकत वाला अल्लाह ही सबसे उत्तम सृष्टिकर्ता है ." सूरा -अल मोमनीन 23:12 से 15 तक 
(इस आयत से साफ पता चलता है कि दुसरे प्राणियों की तरह मुसलमानों का जन्म सबसे पहले वीर्य या नुत्फे से होता है .जो माँ के गर्भाशय में पल बढ़ कर बच्चे के रूप में जन्म लेता है .अर्थात बच्चे के जन्म का महत्त्वपूर्ण और मुख्य आधार " नुत्फा Sperm" ही है )
3-कुरान में वीर्य के नाम 

सम्पूर्ण कुरान में वीर्य को 16 बार तीन विभिन्न नामों से उल्लेख किया गया है ,लेकिन कहीं भी वीर्य के "शुक्राणु Sperm" के बारे में कुछ नहीं लिखा है .इस से स्पष्ट होता है कि अल्लाह और उसके रसूल को वीर्य के बारे में तो ज्ञान था ,लेकिन वीर्य में होने वाले " शुक्राणुओं " के बारे में कोई ज्ञान नहीं था .कुरान में वीर्य के तीन नाम इस प्रकार हैं ,
1. -Nutfah" نطفة "कुरान में यह शब्द 12 बार आया है .और इस शब्द का प्रयोग करते हुए कुरान और हदीस में बताया है कि नुत्फे से ही मनुष्य पैदा होता है .नुत्फा शब्द कुरान की जिन सूरा और आयतों मौजूद है ,उनकी सूरा और आयत नंबर इस प्रकार हैं .nutfah: 16:4, 18:37, 22:5, 23:13, 23:14, 35:11, 36:77, 40:67, 53:46, 75:37, 76:2, 80:19.नुत्फा का अर्थ अरबी शब्द कोष में इस प्रकार बताया है , एक द्रव (liquid ) मना जाता है कि इसी से मनुष्य पैदा होता है 

2.माअ-Maa" ماء  "कुरान में यह शब्द तीन बार आया है . वैसे इसका अर्थ पानी (water ) होता है . लेकिन कुरान में इसका अभिप्राय पुरुष और स्त्री के वीर्य से लिया गया है .(Water. Sometimes used for semen (male or female). यह शब्द कुरान में इस जगह आया है .(Used in this way in verses 32:8 and 77:20, and 86:6).
3.मनी- Maniyy" مني "यह शब्द कुरान में केवल एक ही बार आया है .और पुरुष या स्त्री के वीर्य (Male or female semen )के लिए प्रयुक्त किया गया है .सभी हदीसों में यह शब्द आयशा द्वारा मुहम्मद के  कपड़ों से वीर्य के धब्बे साफ़ करने के प्रसंग में आया है .( It is frequently used in hadith ,that Aisha used to clean semen off Muhammad’s clothes)यह शब्द कुरान की सूरा अल कियामा 75 की आयत 37 में आया है .
4-वीर्य के चालीस चरण 
हदीसों के अनुसार वीर्य की बूंद को बच्चे के रूप में जन्म देने तक चालीस चरण (stages ) पूरा करने पड़ते हैं ,जो इन हदीसों में बताया है ,
"अबू तुफैल ने कहा कि एक बार मैं रसूल के घर गया , वहां अबू शरिया हुजैफा बिन उसैद अल गिफारी भी मौजूद थे। ,और सबके सामने रसूल ने बताया कि जब "नुत्फा " (वीर्य semen ) के माता के गर्भाशय में चालीस चरण ( 40 stages ) पूरे हो जाते हैं , यानि नुत्फा चालीस दिन रात गर्भाशय में पड़ा रहता है , तो एक फ़रिश्ता अन्दर घुस कर नुत्फा को ठीक आकार दे देता है ,और फ़रिश्ता वहीं पर तय कर देता है कि नुत्फा से लड़का बनाया जाए , या लड़की (male or female )" 
सही मुस्लिम -किताब 33 हदीस 6394 

यही बात कुछ अंतर से दूसरी हदीस में भी बतायी गयी है ,
सही मुस्लिम-किताब 33 हदीस 6395 

5-बच्चों में पैतृक समरूपता 
इस बात को विज्ञान भी स्वीकार करता है कि संतान पैदा करने में वीर्य यानि ' नुत्फा " का होना जरुरी है ,और उस वीर्य से लड़का होगा ,या लड़की यह ठीक से बताना मुश्किल होता है और होने वाली संतान पिता या माता में किसके समरूप होगी यह इन हदीसों में बताया गया है .जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है .
1.बाप बेटे में समरूपता 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है ,यदि पुरुष किसी स्त्री से सम्भोग करते समय स्त्री से पहले स्खलित होता है तो ,उसका होने वाला बच्चा पिता के अनुरूप होगा . और यदि स्त्री पहले स्खलित होती है , तो बच्चा माता के अनुरूप होता है " सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 546

2.माँ बेटी में समरूपता 
"उम्मे सलमाँ ने रसूल से पूछा यदि किसी औरत रात "एहतलामاحتلام-   "यानी स्वप्नदोष(  nocturnal discharge  ) हो जाए , तो क्या उसके लिए गुस्ल (bath ) करना अनिवार्य है , रसूल ने कहा हाँ .यदि किसी औरत रात के समय ( wet-dream ) "एहतलाम احتلام  "हो जाये और उसे पता चले कि उसकी योनि से " माअ Maa" ماء  "( "( वीर्य ) निकल गया ,और वह गुस्ल नहीं करे तो होने वाला बच्चा माता के अनुरूप होगा 
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 545 
हो सकता है कि जिन लोगों को शरीर विज्ञानं या भ्रूण विज्ञानं का पता नहीं है ,या कुरान और अल्लाह की ऐसी बातों पर विश्वास कर लेंगे .लेकिन शरीर में वीर्य कहाँ बनता है ,इसके बारे में कुरान में जो भी बताया है ,उसे पढ़कर अल्लाह और उसके रसूल की मुर्खता पर मुसलमान अपना सिर पीटने लगेंगे ,क्योंकि कुरान में कहा है ,
6--वीर्य कहाँ बनता है 
एक साधारण दसवीं कक्षा का विद्यार्थी भी जानता है कि वीर्य और शुक्राणु पुरुष के अंडकोष में तैयार होते हैं , लेकिन कुरान इसे रीढ़ और हंसली की हड्डी में बता रही है , जो इन आयतों दिया है ,
" तो मनुष्य देखे कि वह किस चीज से बना है ,एक उछलते हुए पानी (gushing fluid) से बना है ,जो निकलती है रीढ़ और हंसली के बीच में से (issued from between  loins and ribs) 
"يَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ الصُّلْبِ وَالتَّرَائِبِ "
issuing from between the loins [of man] and the pelvic arch [of woman]. (86:7)
सूरा -अत तारिक 86:5 से 7 तक 
पूरी जानकारी के लिए देखिये ,विडिओ 
Quran 86:5-7 Sperm comes from backbone of man & ribs of woman

http://www.youtube.com/watch?v=DtDp7mTnleA

7-वीर्य के बारे में सच्चाई 
विकीपीडया में वीर्य के बारे में इस प्रकार लिखा है ,"वीर्य एक जैविक तरल पदार्थ है, जिसे बीजीय या वीर्य तरल भी कहते हैं, जिसमे सामान्यतः शुक्राणु होते हैं. यह जननग्रन्थि (यौन ग्रंथियां) तथा नर अंगों द्वारा स्रावित होता है और मादा अंडाणु को निषेचित कर सकता है.
(Semen, also known as seminal fluid, is an organic fluid that may contain spermatozoa. It is secreted by the gonads (sexual glands) and  sexual organs of male , and can fertilize female ova.

8-निष्कर्ष 
इन सभी तथ्यों से यह बातें सिद्ध होती हैं कि ,
1.सभी मुसलमानों का स्वभाव एक जैसा होता है , जिसको सुधारना असंभव है .
2.मुहम्मद को झूठ बोलने और लोगों को अंधविश्वासी बनाने की आदत थी .
3.अल्लाह सर्वज्ञ नहीं , बल्कि महा मूर्ख है , उसे इतना भी ज्ञान नहीं कि वीर्य रीढ़ या हंसली में नहीं बल्कि पुरुष के अण्डकोश ( testicles ) में पैदा होता है .
4.अंतिम और महत्त्वपूर्ण बात यह सिद्ध होती है कि मुसलमान जिस वीर्य से बनते हैं वह नकली है .और बनावटी है .क्योंकि वह गैर मुस्लिमों की तरह अंडकोष से नहीं किसी दूसरी जगह से बनाया जाता है .अर्थात defctive और duplicate है .
यही कारण है कि सभी मुसलमान अपराधी और आतंकवादी होते हैं .इनको सुधारने की जगह नष्ट कर देना ही उचित होगा .


http://quranspotlight.wordpress.com/articles/quran-hadith-talmud-galen/#_Toc317621440

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

इस्लाम को धर्म कैसे मानें ?


कुछ दिन पहले हमारे ब्लॉग के एक पाठक महोदय शाहबाज खान ने टिप्पणी देते हुए एक अजीब सा तर्क दिया है ,कि किसी प्राचीन ग्रन्थ में " हिन्दूधर्म " शब्द का कोई उल्लेख नहीं मिलता है , इसलिए हिन्दूधर्म नामका कोई धर्म नहीं है .जबकि इस्लाम के साथ दीन यानी धर्म शब्द लगा है ,इसलिए इस्लाम एक धर्म है .और उन महाशय से हमारा यही जवाब है कि यदि इस्लाम को धर्म मान भी लिया जाये तो इसमे कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है .यही ऐसा धर्म है कि जिसमे रसूल के साथियों , खलीफाओं और मुहम्मद की पत्नियों को मुसलमानों का एक बहुत बड़ा समुदाय खुले आम लानत भेजता रहता है .यही धर्म है जिसमे रसूल द्वारा परदे का हुक्म होने के बावजूद खुद उनकी पत्नी बेनकाब होकर जंग करती है .और जिसके कारण आजतक मुस्लमान आपस में लड़ते रहते हैं .यही नही जहाँ भारत की स्त्री अपने पति के साथ कई जन्मों तक साथ निबाहने का इरादा रखती है .इस्लाम ही एक धर्म है ,जिसमे रसूल की प्यारी पत्नी मरने के बाद रसूल के साथ कब्र के दफ़न होने की जगह पत्थर या जंगल का पेड़ बनने की इच्छा रखती है .
इस लेख से हमारा उद्देश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं बल्कि प्रमाण देकर लोगों का इस्लाम के बारे में भ्रम दूर करना है , जिसे संक्षिप्त में बिन्दुवार दिया जा रहा है ,
1-आयशा का परिचय 
मुहम्मद साहब की कुल 12 पत्नियाँ थीं , जिनमे आयशा तीसरे नंबर पर आती है ,अयश के पिता का नाम अबूबकर था जो मक्का में आकर बस गए थे ,अयशा (Arabic: عائشة ) का जन्म सन 612 ईo में हुआ था .आयु में सबसे छोटी होने पर भी मुहम्मद साहब ने सभी औरतों के साथ आयशा को भी " उम्मुल मोमिनीन "(Arabic: أمّ المؤمنين   ) यानी ईमान वालों की माता का पद दे दिया था .जो कुरान की सूरा - अहजाब 33:6 में वर्णित है ,
2-आयशा की हदीसें
मुहम्मद के सहाबी अबू हुरैरा की कुल 5374 हदीसें किताबों में मौजूद हैं , उनमे रसूल के घर के लोगों द्वारा कही गयी हदीसों की संख्या इस प्रकार है ,आयशा 2210,उमर खत्ताब 527,अली इब्न अबी तालिब 536 और आयशा के पिता अबू बकर 142.इस प्रकार मुहम्मद के घर में ही कुल 3425 हदीसों का जन्म हुआ है .अर्थात आधी से अधिक हदीसें तो केवल आयशा द्वारा बयान की गयी हैं .
3-आयशा की पिटायी 
"आयशा ने कहा कि जब भी मैं रसूल को बताये बिना किसी काम के लिए बाहर जाती थी तो रसूल गुस्सा होकर मेरी छातियों पर इतनी जोर से घूंसे मारते थे , कि जिसके कारण कई दिनों तक छातियों में दर्द होता रहता था "
सही मुस्लिम -किताब 4 हदीस 2127
4-आयशा के झूठ 
"" अस्वादबिन यजीद ने कहा कि आयशा ने बताया है , कि रसूल ने अली को पहला खलीफा बनाने की वसीयत करने की इच्छा प्रकट की थी , जिसका मैंने भी समर्थन किया था .लेकिन उस समय उनके सीने में तेज दर्द उठने लगा . इस लिए मैंने उनको सहारा देकर अपनी गोद में लिटा लिया .ताकि वह आराम कर सकें , लेकिन मुझे इस बात का ज्ञान नहीं था कि वह रसूल की अंतिम साँस थी "

Sahin Muslim. Kitaab al Wasiyya-Book 013, Number 4013

"रसूल की म्रत्यु के बाद जब लोगों ने आयशा से रसूल की वसीयत के बारे में पूछा तो .तो आयशा ने इंकार कर दिया .और कहा कि रसूल ने अपने पीछे न कोई दीनार ,दिरहम छोड़ा है .और न उनके पास कोई बकरी , भेड़ या कोई ऊंट ही था . यही नहीं उनके पास कोई निजी सामान भी नहीं था . इसलिए उनकी वसीयत का सवाल ही नहीं उठता "
Sahin Muslim. Kitaab al Wasiyya-Book 013, Number 4011:

5--जंगे जमल 
इस्लामी इतिहास में 'जंगे जमल " को ऊंटों की लड़ाई (Battle of Camel ) कहा जाता है , यह घटना 3 दिसंबर सन 656 ईसवी में बसरा के पास खुरैबा गाँव के "वादी उस्सबा "मैदान में हुई थी . इस लड़ाई में एक तरफ आयशा के समर्थकों और दूसरी तरह अली के समर्थकों में लड़ाई हुई थी , जिसमे आयशा की फ़ौज ह़ार गयी थी .इस लड़ाई में आयशा के 16796 सैनिक और अली के 1070 सैनिक मारे गए थे .

6-लड़ाई का कारण 
शिया इतिहासकारों के अनुसार अयशा अली से उसी समय से नफ़रत करने लगी थी , जब वह एक व्यक्ति के साथ चुपचाप चली गयी थी , और लोगों ने उस पर व्यभिचार का आरोप लगा दिया था .लेकिन अली ने उसका बचाव नहीं किया था .और जब आयशा से पूछा गया कि वह रात भर कहाँ रही तो उसने बहाना कर दिया कि वह अपने गले का हार (Neckless ) खोज रही थी ..जबकि वह एक व्यक्ति के साथ अकेली पकड़ी गयी थी , और हसन ने यह बात अपने पिता अली को बता दी थी . यह सारी घटना इस हदीस में मौजूद है .
Sahih Bukhari Volume 5 ,Book 59,hadith number 462:

7-लड़ाई का कारण -2
आयशा का अली से नफ़रत करने का दूसरा मुख्य कारण यह था , कि जब खलीफा उस्मान की हत्या हुई तो आयशा मदीना में नहीं थी , वह अपने रिश्तेदार जुबैर को खलीफा बनवाना चाहती थी ,लेकिन उसे पता था कि मुहम्मद साहब ने सबसे पहले अली को ही खलीफा बनाने की इच्छा प्रकट कर दी थी .इस लिए अली आयशा के रास्ते की रूकावट बन रहे थे .जब उस्मान का क़त्ल हुआ तो अली बसरा में थे . आयशा जब मदीना आई तो उसने लोगों को बहकाया कि उस्मान की हत्या में अली का हाथ है .आयशा ने कुरैश के सरदारों से कहा कि हमें बसरा जाकर उस्मान की हत्या का बदला लेना चाहिए .और आयशा के साथ जुबैर और ताल्हा भी शामिल हो गए ,आयशा ने फ़ौरन एक फ़ौज बना कर बसरा की तरफ कूच कर दिया , फ़ौज का खर्च यमन के उसी गवर्नर ने दिए जिसे अली ने नियुक्त किया था .अपने इस भारी फ़ौज की कमान संभालने के लिए आयशा ने अपना बुरका फेक दिया और बेपर्दा होकर " अल अक्सर " नाम के ऊंट पर सवार हो गयी .इस तरह वह इस्लाम की पहली ऐसी औरत थी , जिसने मुहम्मद की पत्नी होने के बावजूद कुरान में दिए गए परदे के हुक्म का उल्लघन किया था 

8-लड़ाई का नतीजा 
चूंकि आयशा ने बेपर्दा होकर ऊंट पर सवार होकर लड़ाई का नेतृत्व किया था . इसलिए लोग आयशा के समर्थकों को " ऊंट वाले "(the companions of the camel)الاصحاب الجمل ")  कहने लगे .जो आजकल " सुन्नी " मुसलमान कहलाते हैं .लेकिन अली आयशा के समर्थकों को " नकिसून الناّكثون " यानी वचन तोड़ने वाले कहते nakisun (those who broke oath), थे .इस शब्द का उल्लेख कुरान की सूरा 48 आयत 10 में है .और जो लोग अली के साथ थे उनको " शीअते अली شيعة العلي" यानी अली के अनुयायी कहा जाता है .अर्थात (the followers of Ali).यद्यपि इस ऊंट के युद्ध में आयशा के समर्थक बुरी तरह से पराजित हुए थे .लेकिन शिया लोगों के अनुसार इसी धूर्त , बेशर्म . और चरित्रहीन औरत आयशा के कारण मुसलमानों के दो गिरोह बन गए . जिनकी आपसी लड़ाई में अब तक करोड़ों लोग मारे गए हैं
.यही कारण है कि मुसलमानों का दूसरा बड़ा समुदाय " शिया " सार्वजनिक रूप से मुहम्मद के साथियों ,और उनकी पत्नियों , खासकर आयशा को गालियाँ देते हैं , और उन पर लानत भेजते रहते हैं .जो इस विडिओ में दिया है -Video

Aisha & The Shia | عائشة والشيعة

http://www.youtube.com/watch?v=nw6I_LEQmvI

9-आयशा लानती है ?
आयशा धिक्कार योग्य है , यह प्रमाणों से सिद्ध हो चूका है , मुसलमानों को पता होना चाहिए कि रसूल की पत्नी या रिश्तेदार होने पर भी कोई सच्चा मुसलमान नहीं माना जा सकता है , जब तक उसके कर्म अच्छे नहीं हों . जिसकी मिसाल खुद कुरान की इस आयत में दी गयी है .फिर मुल्ले मौलवियों की क्या हैसियत है .
"अल्लाह ने कुफ्र करने वालों के बारे में नूह की पत्नी और लूत की पत्नी की मिसाल पेश कर दी है , और उनके लिए कहा कहा कि जाओ आग में जहन्नम की आग में दाखिल होने वालों के साथ "सूरा -तहरीम 66:10
10--आयशा की अंतिम इच्छा 
शिया विद्वान् अल्लामा हाफिज कारी वदूद हयी ने अपनी किताब " हयाते आयशा " में लिखा है कि जब रसूल की मौत के बाद लोग अयशा को तसल्ली देने के लिए आये ,तो उसने लोगगों से कहा कि यदि मैं मर जाऊं तो मुझे रसूल के साथ उनके हुजरे में दफ़न नहीं करना ,बल्कि मुझे अल बाकी कबरिस्तान में दफ़न करना ,जहाँ रसूल की दूसरी औरतें दफ़न है , मैं तो चाहती हूँ कि मैं मरने के बाद पत्थर या जंगल का कोई पेड़ बन जाऊं "
"when people came to her for meeting, and gave her hope; she said ,she made this will that she should not be buried in this hujra/place where prophet asws was buried,
so bury me along with other wives in baqi'i"she said 
"i wish i was a stone or a plant in a jungle"

"كنت أتمنى لو كان حجر أو زرع في غابة"
hayat-e-ayesha, qari waduud, page 109]
11-शहबाज खान को जवाब 
अब हम  शहबाज खान से इतना ही कहना चाहते हैं कि किसी चीज का नाम नहीं होने , या नाम बदल देने से लोग गुणों के आधार पर हिन्दूधर्म को धर्म स्वीकार कर लेंगे .लेकिन जिस इस्लाम में खुद मुसलमानों के एक समूह खुले आम मुहम्मद के साथियों को गाली देता हो .जिस इस्लाम में रसूल की औरत व्यभिचार में पकड़ी जाये और उसे बचाने के लिए कुरान की आयत बना दी जाये ,और जो रसूल दूसरों की औरतों के लिए परदे का आदेश देता हो उसी की पत्नी सबके सामने बेनकाब हो कर लड़ाई में हिस्सा लेती हो .और जिस रसूल की प्यारी पत्नी मरने के बाद रसूल के साथ दफ़न होने की बजाये पत्थर या पेड़ बनने की इच्छा रखती हो .हम ऐसे इस्लाम को धर्म कैसे मान सकते हैं .इस से तो बिना नाम का हिन्दू धर्म ही बेहतर है , हिन्दुओं का कोई भी समुदाय न तो किसी दूसरे समुदाय को गाली देता है , और न उनकी हत्याएं करता है .बताइए जो ऊंट वाली के समर्थक भारत को "भारतमाता "कहने पर आपत्ति उठा देते है , वही एक चरित्रहीन औरत को "उम्मुल मोमिनीन "किस मुंह से कहते हैं ?
.हम ऐसी दोगली निति वाले इस्लाम को धर्म नहीं मान सकते .

http://www.ismaili.net/histoire/history03/history339.html


शुक्रवार, 8 मार्च 2013

इस्लाम की खातिर गुदामैथुन !


लेख प्रारंभ करने से पूर्व पाठकों से क्षमा चाहते हैं ,क्योंकि उनको लेख का शीर्षक अश्लील लगेगा . परन्तु लेख में इस्लाम के बारे में जो जानकारियाँ दी जा रही हैं ,उन्हें पढ़कर अश्लीलता भी शर्म के मारे डूब कर मर जाएगी .
अभी तक लोग इस्लाम के बारे में इतना तो अच्छी तरह से जान चुके हैं , कि जिहाद इस्लाम का अनिवार्य और धार्मिक कार्य माना जाता है . और लोग यह भी समझ चुके हैं कि दुनिया का शायद ही कोई ऐसा अपराध होगा जो मुसलमान जिहाद के नाम से नहीं करते हों .निर्दोषों की हत्या , बलात्कार ,आतंकवाद और जो ऐसे ही दूसरे अपराध इस्लाम की खातिर किये जाते हैं , सभी जिहाद की परिभाषा में आते हैं . लेकिन इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह एक जगह तो इन अपराधों को गुनाह बताता है . तो जिहाद में इन से भी घृणित कामों को जायज ठहरा देता है .
ऐसा ही अत्यंत निंदनीय और घृणित काम पुरुषो द्वारा पुरुषों के साथ " गुदामैथुन " करना है .जिसे इस्लाम की खातिर जिहाद के लिए जायज बना दिया गया है .इस कुकर्म को अरबी में " लवात " कहा जाता है .लेख में इसी विषय पर जानकारी दी जा रही है .
1-लवात क्या है 
अंगरेजी में इस कुकर्म को "Sodomy " कहा जाता है . क्योकि इस्लाम से पहले सोडोम नामके शहर के यह कुकर्म काफी प्रचलित था . जिसे अरबी में मुसलमानों के एक नबी " लूत  لواط " के नाम से "लवात اللواط" नाम दे दिया गया है . मुसलमानों के नबी लूत के शहर के सभी लोग यह कुकर्म करते थे , जिसका उल्लेख कुरान में इस प्रकार दिया है ,
"क्या तुम पुरुषों के पास ( आप्राकृतिक ) काम के लिए जाते हो . और जिस काम के लिए अल्लाह ने औरतों को पैदा किया है , उनको छोड़ देते हो 
" सूरा -अश शुअरा 26:165-166

2-मुहम्मद को लवात का अंदेशा 
यद्यपि मुहम्मद को पता था कि उसके अधिकांश साथी यही कुकर्म करते थे , लेकिन उनको डर लगा रहता था कि कहीं अरब के सभी लोग लूत के शहर वालों जैसे नहीं बन जाएँ , जो इस हदीस में बताया है ,
"जबीर ने कहा कि रसूल ने कहा ,निश्चय ही मुझे इस बात का बड़ा डर है कि मेरा देश लूत वालों जैसा न बन जाये "
Jabir reported: The Messenger of Allah, peace and blessings be upon him, said, “Verily, what I fear most for my nation is the deed of the people of Lot.”
جَابِرًا يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَى أُمَّتِي عَمَلُ قَوْمِ لُوطٍ
1374 جامع الترمذي كتاب الجمعة أبواب السفر
قَالَ أَبُو عِيسَى  هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ
Sunan At-Tirmidhi, Book of Legal Punishments, Number 1374, Hasan

3-औरतों से गुदामैथुन 
मुहम्मद से समय और उसके बाद से अब तक इस्लाम में औरतों के साथ यह कुकर्म करना सामान्य बात मानी जाती है . जिसके विस्तार में न जाते हुए इस्लाम की उन किताबों के हवाले दिए जा रहे हैं , जिन में इस कुकर्म को जायज बताया गया है , यहाँ कि मुहम्मद के साथी भी यही करते थे ,किन किन लोगों ने इस कुकर्म को जायज माना
A-मदीना के उलेमा 
मुहम्मद के समकालीन सुन्नी उलेमा अपनी जिन किताबों में इस कुकर्म को सही बताया उनके हवाले इस प्रकार हैं ,
Fayl al Lawathar Volume 6 page 154 Kitab Nikah, Bab Mut'ah

Tafseer Qasmi Volume 2 page 223 Ayat Hars

Tafseer Ibn Katheer Volume 1 page 262 Ayat Hars

Fathul Bari Volume 8 page 191 Ayat Hars

Tafseer Mazhari, Volume 3, Page 19(Tafsir al-Mazhari (Arabic: تفسير المظهري‎) is a 13th century AH tafsir of the Qur'an, written by Qadi Thanaullah Panipati.)
B-मुहम्मद के साथी 
मुहम्मद के जो सहाबी यानि साथी औरतों और पुरुषों के इस कुकर्म को करते थे और जायज मानते थे ,उनका हवाला इस प्रकार है ,
Tafseer Qurtubi Volume 3 page 93 Ayat Hars:

"Fatwas on the permissibility of sodomy with men Saeed bin Maseeb Nafi, ibn Umar, Muhammad bin Kab, Abdul Malik, Imam Malik, a large group amongst the Sahaba and Tabaeen deemed sodomy to be permissible".

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक खोलिए 

http://www.sex-in-islam.com/amar.khan/anal-sex-islam-allah-prophet-muhammad.htm

लेकिन हमें इन बातों की गहराई में जाने की जरूरत नहीं है ,क्योंकि गन्दगी को जितने अन्दर खोदेंगे उतनी दुर्गध निकलेगी .हमारा मुख्य विषय इस्लाम की खातिर गुदामैथुन कराना है .जिसके बारे में मुस्लमान भी बहुत कम जानते होंगे
.
4-जिहादी गुदामैथुन करवाएं 
अमेरिका की राष्ट्रीय स्तर की समलैंगिकों "national gay and lesbian news magazine" पत्रिका ' Advocate.com ' में दिनांक  12 July 2012 को   एक समाचार प्रकाशित हुआ था ,जिसके संपादक  Lucas Grindley हैं .जिसके मुख्य अंश हिंदी में दिए जा रहे हैं , इन से जिहाद और इस्लाम का घिनावना रूप बेनकाब हो जायेगा .एडवोकेट पत्रिका में लिखा है कि
" अल कायदा से जुड़े अरब के एक मुफ़्ती ने "आत्मघाती बम  Suicide Bombers" बनने वाले नए जिहादी लड़कों को बताया कि यदि तुम इस्लाम के लिए शहीद हो जाओगे तो , मरने के बाद तुम्हें जन्नत में कुंवारी लड़कियां मिलेंगी और तुम पर अल्लाह की रहमत होगी . लेकिन इस से पहले तुम्हें तब तक " गुदामैथुन करवाना " होगा .जब तक तुम्हारी गुदा इतनी चौड़ी नहीं हो जाये कि गुदामार्ग में बम आसानी से घुस सके .
(for this method of jihad you must agree to be sodomized for a period in order that your anus will be widened such that your rectum can take the explosives.)मेरी दुआ है कि अल्लाह तुम्हारे ऊपर रहम करे क्योंकि तुमने अपनी गुदा (Anus ) अल्लाह को समर्पित करदी है , इस तरह तुम और तुम्हारे साथी मुजाहिदों में शामिल हो गए .तुम सभी का यही उदेश्य होना चाहिए कि जिहाद के लिए मेरी गुदा चौड़ी हो जाये .
"God have mercy on you: Is it permitted to offer my anus to one of the mujahidin brothers if the intention is pure and the goal is to train for jihad, and to widen my rectum"

http://www.advocate.com/politics/military/2012/07/12/religious-exemption-sodomy-suicide-bombers

5-फतवा देने वाले मुफ़्ती 
इस्लाम से सम्बंधित किसी आदेश को 'फतवा " और ऐसा आदेश देने वाले को " मुफ़्ती " कहा जाता है , जिन दो मुफ्तियों ने जिहादियों को इस्लाम की खातिर गुदामैथुन करवाने का फतवा जारी किया है , वह इस्लामी आतंकवादी संगठन " अल कायदा "के मुफ़्ती हैं , इनके बारे में अधिक जानकारी नहीं है , परन्तु इनके नाम इस प्रकार हैं
1.अब्दुल्लाह हसन अल असीरी- (Abdullah Hassan al-Asiri (Arabic: عبد الله حسن عسيري‎) इसका जन्म सन 1986 में सऊदी अरब के असीर कसबे में हुआ था ,यह सऊदी अरब के राजकुमार का दोस्त भी था.और उसका धार्मिक सलाहकार मुफ़्ती भी था फिर सन 27 अगस्त 2009 को अल कायदा का सरगना बन गया .
2.शेख अबुल मदाअ अल कसाब (Sheikh Bloody Butcher” (الشيخ أبو الدماء القصاب) अरबी में इसके नाम का अर्थ "शेख खूनी कसाई "होता है .और जैसा इसका नाम है , यह वैसा ही क्रूर है .इन दौनों की इच्छा जिहाद से दुनिया में इस्लामी राज्य स्थापना करने की है .और अपने इसी मकसद को जल्द पूरा करने के लिए इन्होने ऐसा अश्लील फतवा जारी किया है .जो अरबी में है
6-गुदामैथुन का फतवा 

فتوى في جواز توسيع الدبر باللواط إذا كان الغرض منه الجهاد

قال أن الإرهابي الذي فجر نفسه في محاولة اغتيال الأامير محمد بن نايف أدخل كبسولات التفجير على دفعات إلى مؤخرته، على شكل تحميله .
ويقال – والله أعلم - أن الإرهابي قبل أن يفعل سأل شيخاً صحوياً عن أنه ينوي أن تلاك في دبره كبسولات التفجير، طلباً للجهاد، لتنفيذ عمليات جهادية رغبة في الحور العين . 
طرح الإرهابي على الشيخ السؤال بهذه الصيغة : شيخنا رزقكم الله الشهادة والحور العين في الجنة . أردت رضي الله عنكم أن أقوم بعملية استشهادية، وتقدمت إلى "الشيخ أبو الدماء القصاب" . فقال لي إننا ابتكرنا طريقة جديدة وغير مسبوقة في العمليات الاستشهادية، وهو أن يُـلاك في دبرك كبسولات التفجير ، ولكي تتدرب على هذه الطريقة الجهادية لا بد أن ترضى بأن يُلاط بك فترة كي يتسع دبرك، وتكون مؤخرتك قادرة على أن تتحمل عبوة التفجير , وسؤالي رحمك الله : هل يجوز أن أبيح دبري لأحد الإخوة المجاهدين إذا كانت النية صالحة، والهدف الدربة على الجهاد، ليقوم بتوسيع دبري؟ .. فحمد الله الشيخ وأثنى عليه، وقال : الأصل أن اللواط محرم ولا يجوز . غير أن الجهاد أولى، فهو سنام الإسلام. وإذا كان سنام الإسلام لا يتحقق إلا باللواط، فلا بأس فيه، فالقاعدة الفقهية تقول : الضرورات تبيح المحظورات. وما لا يتحقق الواجب إلا به فهو واجب، وليس هناك أوجب من الجهاد. وعليك بعد أن يلاط بك أن تستغفر الله، وتكثر من الثناء عليه، وتأكد يا بني أن الله يبعث المجاهدين يوم القيامة حسب نياتهم، ونيتك إن شاء الله نصرة الإسلام. نسأل الله أن يجعلك ممن يستمعون القول ويتبعون أحسنه . وصلى الله على محمد.
6-A-Google Translation

"Fatwa in expanding anal, sodomy if its purpose Jihad"
,
He said that the terrorist who blew himself up in an attempt assassination Aloamir Mohammed bin Nayef Enter blasting caps on payments to the buttocks, in the form of downloading.
It is said - and God knows best - that the terrorist before he asked an old man does Sahoya that he intends to Tlak orchestrated blasting caps, a request for Jihad, to carry out jihad desire for virgins.
Ask a terrorist Sheikh question this formula: Sheikh Allah hath provided for martyrdom and virgins in paradise. I wanted God bless you, to do a martyrdom operation, and advanced to the "Sheikh Abu blood butcher." He told me we devised a new way and is unprecedented in the martyrdom operations, which is that Lilac in Dberk blasting caps, and to practice these new way jihad must be satisfied that the Alat your period to accommodate Dberk, and be your ass able to bear the bomb blast, and my question God bless : Is it permissible to permissible Woodbury for one of the mujahideen brothers valid if the intention not goal of Jihad, but is expanding the anus  ? .. Ahamd Sheikh and praised him, and said: The basic principle is that sodomy  and may not be. Hever, the first Jihad, is hump Islam. If the hump of Islam can only be achieved sodomy, there is nothing wrong in it, jurisprudential rule says: a virtue of necessity. What can be achieved only by it is the duty, and there is no obligatory jihad. And you after your death  to ask God for forgiveness, and do a lot of praise, and make sure my son that God sends Mujahideen on the Day of Resurrection by their intentions, and intention, God willing, the victory of Islam. We ask God to make you listen to those who say and follow it properly. God bless Mohammed."

( नोट - अरबी से अंगरेजी का यह अनुवाद गूगल से किया गया है , जिसकी गलतियों के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं .लोग चाहें तो हिंदी अनुवाद कर सकते हैं .लेकिन आशय वही है जो प्रारंभ में ही दे दिया गया है .)

http://web.archive.org/web/20091002024147/http://www.montdiatna.com:8686/forum/showthread.php?t=105911

7-मुल्लों की बेशर्मी 
अभी तक लोग यही समझ रहे होंगे कि मुल्ले मौलवी लोगों को सदाचार की तालीम देते होंगे , लेकिन इस विडियो को देख कर लोगों आखें खुल जाएँगी , क्योंकि मुफ़्ती इस्लाम की खातिर इतनी नीचता पर उतर जाते हैं कि खुले आम "लौंडेबाजी " करवाने का फतवा दे रहे हैं जो इस विडियो में देखा जा सकता है , देखिये विडिओ "Sodomy 'For the sake of Islam(Video)

http://www.youtube.com/watch?v=uI9C2CCT-QM

فتوى وهابية : يجوز توسيع الدبر من اجل الجهااد

8-पाठकों से अनुरोध 

हमारा अपने सभी पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें और निष्पक्ष होकर फैसला करें कि क्या अब भी कोई इस्लाम को धर्म समझेगा ? क्या इस्लाम का विस्तार इन्हीं कुकर्मों से किया जाता है .? यदि इस्लाम सच्चा है तो ऐसे नीच कामों के करने की क्या जरुरत है ?हम मानते हैं कि हिन्दू धर्म में भी कमियां हो सकती हैं , जिनको सुधारा जा सकता है .लेकिन यदि इस्लाम ऐसे हरेक कुकर्म को जायज बताता है तो इसमे हमारा क्या दोष है . हम गाली तो नहीं दे सकते परन्तु यही कह सकते हैं , जो फतवे में कहा है ,
"اتسعت شرجه الإسلام     "
"इस्लाम की खातिर अपनी गुदा चौड़ी करो "

http://www.gatestoneinstitute.org/3158/islam-sodomy

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

इस्लामी वयस्क परीक्षण !


जिस समय टी .वी . के सभी चैनलों पर बजट सम्बन्धी चर्चा खबरें आ रही थीं , उसी समय बीच में 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक 23 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में छठवें आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड ने गुरुवार आरोप तय करने का आदेश दे दिया .चूँकि यह घटना इतनी ह्रदय विदारक थी कि सारा भारत उन सभी नरराक्षसों को मौत की सजा देने की मांग कर रहा था .यद्यपि इस अपराध के लिए सभी अभियुक्त सामान रूप से दोषी हैं , लेकिन सरकार ने उनके नाम छुपा रखे थे , इन सभी पापियों ने जो दुष्कृत्य किया था , उसे देख कर हमने पहले ही लिख दिया था कि इतना नीच काम कोई मुसलमान ही कर सकता है , और बाद में यह बात सही निकली .क्योंकि अदालत ने छटवें आरोपी पर जितने भी अभियोग लगाये हैं , सभी काम मुहम्मद की सुन्नत है ,जिसे मुसलमान अपराध नहीं मानते ,
अब मुसलमान उस उस दुष्ट को नाबालिग साबित करने के लिए तरकीबें निकाल रहे हैं , ताकि उसे मौत की सजा से बचाया जा सके .यद्यपि इस बात में कोई शंका नहीं है कि सभी अपराधों की प्रेरणा इस्लामी तालीम से मिलती है , लेकिन आप किसी भी मुल्ले मौलवी से यह बात कहेंगे तो वह यही उत्तर देगा कि इस्लाम तो सदाचार , संयम , और परहेजगारी की तालीम देता है . इस्लाम में बलात्कार को गुनाह माना जाता है , इत्यादी ,
चूंकि मुख्य मुद्दा बलात्कार और छठवें मुस्लिम आरोपी के नाबालिग होने का है ,इसलिए इस्लामी सदाचार का पाखंड और असलियत के साथ इस्लाम के अनुसार बालिग (Adult )होने की जाँच कैसे होती है , इसका तरीका इस लेख में दिया जा रहा है ,
1-इस्लाम का ढोंगी सदाचार 
इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म का प्रभाव था . और कई ईसाई साधू ऐसे भी होते थे ,जो संयम का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे . मुहम्मद का गुरु और खदीजा का चचेरा भाई वरका बिन नौफल भी एक ब्रह्मचारी था . शायद उसी से प्रेरित कर मुहम्मद ने यह आयत कुरान में जोड़ी होगी , जिसमे मुसलमानों को यह उपदेश दिया गया है ,
"और जिन्हें विवाह करने का अवसर प्राप्त न हो ,उन्हें चाहिए कि वे तब तक संयम का पालन करें ,जब तक अल्लाह उन्हें अनुग्रह से संपन्न कर दे " सूरा -अन नूर 24:33

(let those who cannot find a match keep chaste till Allah give them independence by His grace. 24:33)

( इस आयत में संयमी के लिए अरबी में "अफीफ عفيف    " शब्द दिया गया है ,जिसका अंगरेजी में अर्थ "Chaste " होता है .दुसरे शब्दों को ऐसे लोगों को ब्रह्मचारी , अरबी में " ताहिरطاهر  "और अंगरेजी में पवित्र और संतpure-saintly"भी कह सकते हैं )लेकिन इस आयात को पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि कुरान कुंवारे लोगों को संयम और कामवासना से बचने की शिक्षा देता है .बल्कि कुरान मुस्लिम युवकों को लडाकियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करने की प्रेरणा देता है , जैसा कि इन आयतों के कहा गया है ,
 2-औरतें पकड़ो बलात्कार करो 
औरतें और अय्याशी इस्लाम के असली आधार है , इतिहास साक्षी है . कि मुहम्मद के साथी जिहादी सबसे पहले औरतें ही लूटते थे . यही नहीं हर मुसलमान मरने के बाद जन्नत में औरतें ही चाहता है .चूँकि भारत में जिहाद नहीं हो सकती ,इसलिए मुसलमान किसी अकेली लड़की को पकड़ लेते हैं . और बलात्कार कर देते हैं ,क्योंकि कुरान पकड़ी गयी औरत से सहवास करने की आज्ञा देता है , कुरान में कहा है ,
"अपनी पत्नियों के उन लौंडियों के साथ सम्भोग करना कुछ भी निंदनीय नहीं है ,जो तुम्हारे हाथों पकड़ी जाएँ "सूरा -अल -मआरिज 70:30
(Captives    your right hand  posess)
"अपनी पत्नियों के अलावा उन लौंडियों के साथ ,जो उनके कब्जे में हों ,सहवास करना निंदनीय नहीं है "सूरा -अल मोमिनून 23:6
"हमने तुम्हारी लौंडियाँ हलाल कर दी हैं ,जो अल्लाह ने तुम्हें माले गनीमत में दी हैं " सूरा -अहजाब 33:50
"पत्नियों के सिवाय तुम्हारे लिए तुम्हारी लौंडियाँ भी हलाल हैं ,अल्लाह सब चीज की खबर रखने वाला है " सूरा -अह्जाब 33:52
इस्लामी परिभाषा में हर प्रकार से हथियाई गयी , पकड़ी गयी , अगवा की गयी हो या खरीदी हुई सभी के लिए अरबी में एक ही शब्द "السرية " है .और ऐसी औरत की इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करना इस्लाम में अपराध नहीं माना जाता है .(Islam allows a man to have intercourse with  capt  woman, whether he has a wife or wives or he is not married. A Captiive woman with whom a man has intercourse is known as a sariyyah )

लेकिन मुहम्मद ने ऐसे सहवास को बलात्कार नहीं कहते हुए अरबी में "मलिकत ईमानुकुम ملكت ايمانكم" और " मलिकत यमीनुकुम ملكت يمينكم" शब्द का प्रयोग किया है .और पकड़ी गयी औरत को रखैली माना है .जिनके साथ बलपूर्वक सहवास करना मुसलमानों का अधिकार है .देखिये विडिओ
Sex allowed with Slave Women in Islam_ Dr Zakir Naik.flv

http://www.youtube.com/watch?v=Bj74kfA5UQY

यही बात हदीस में भी कही है , सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3432 
3-वयस्क की परिभाषा 
इस्लाम के अनुसार 15 साल की आयु होने पर लडके और लड़की को वयस्क माना जाता है .इस आयु को " बुलूग بُلوغ‎)" और ,आयु पूरा करने वाले को " बालिग  بالغ " कहा जाता है .इतनी आयु के लोग वयस्क ( Adult ) इसलिए माने जाते हैं , क्योंकि वह जिहाद के लिए उपयोगी होते हैं .
लड़का बालिग तब माना जाता है जब उसके श्रोणी के बाल निकलने लगें(grows pubic hair) , या शिश्न से वीर्य निकलने लगे .(has a nocturnal emission) और लड़की तब बालिग मानी जाती है जब उसका मासिक स्राव निकलने लगे .(when she  menstruates)यही बात फतवे में दी गयी है ,

Once you get semen you are baaaligh

"تحصل مرة واحدة السائل المنوي كنت الكبار  "

http://en.allexperts.com/q/Islam-947/2010/4/Adult-age.htm

4-वयस्कता का परीक्षण 
आज अदालत दिल्ली बलात्कार काण्ड छठवें (मुस्लिम)आरोपी के वयस्क होने का पता करने के लिए हाथ पैर मार रही है , कभी उसका जन्म प्रमाणपत्र खोज रही है कभी किशोर न्यालालय के आदेशानुसार धारा 3 के अधीन अभियुक्त की bone-ossification testकरवा रही है , लेकिन मार्च सन 627 में ही मुहम्मद ने एक ऐसी विधि खोज ली थी , जिस से मूर्ख व्यक्ति भी पता कर लेगा कि अभियुक्त बालिग है , अथवा नहीं .यह विधि हदीस में आज भी मौजूद है .इस हदीस के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है .घटना इस प्रकार है , कि मदीना के पास "बनी कुरैजा " नामका एक यहूदी कबीला रहता था .मार्च सन 627 को मुहम्मद ने अपने जिहादियों के साथ उस कबीले पर अचानक धावा बोल दिया था जिसमे करीब 900 लोगों के सर काट कर हत्या कर दी गयी थी .मुहम्मद का आदेश था कि सभी बालिग पुरुषों को मार दिया जाये . और औरतों से बलात्कार करके उनको लौंडी बना लिया जाये .हदीस कहती है ,
1."कसीर इब्न अस्सायब ने कहा कि रसूल ने हम लोगों से कहा जाओ सभी बालिग़ मर्दों को मार डालो .पता करो जिन के नीचे के बाल दिखायी दें वह बालिग़ हैं , उन्हें क़त्ल कर दो . और जिनके नीचे के बाल नहीं निकले वह नाबालिग है , उनको जिन्दा छोड़ दो "

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَسَدُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ خُزَيْمَةَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبْنَاءُ، قُرَيْظَةَ أَنَّهُمْ عُرِضُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ قُرَيْظَةَ فَمَنْ كَانَ مُحْتَلِمًا أَوْ نَبَتَتْ عَانَتُهُ قُتِلَ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مُحْتَلِمًا أَوْ لَمْ تَنْبُتْ عَانَتُهُ تُرِكَ ‏.‏

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3459

2-"अतिय्या ने कहा कि बनू कुरैजा के जनसंहार के समय मैं मौजूद थे . लेकिन उस समय मेरे नीचे के बाल नहीं निकले थे . इसलिए मुझे नाबालिग मान कर जिन्दा छोड़ दिया गया था "

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ، قَالَ كُنْتُ يَوْمَ حُكْمِ سَعْدٍ فِي بَنِي قُرَيْظَةَ غُلاَمًا فَشَكُّوا فِيَّ فَلَمْ يَجِدُونِي أَنْبَتُّ فَاسْتُبْقِيتُ فَهَا أَنَا ذَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ ‏.‏  "
Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3460

5-छठवें अभियुक्त के अपराध 

भले सेकुलर और मुसलमान उस छठवें अपराधी मुसलमान को बालिग नहीं मानें . लेकिन उसने जो जघन्य काम किये हैं उसके आगे मुहम्मद भी नाबालिग लगेगा .क्योंकि .. प्रमुख मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने उस पर , गैंग रेप ,हत्या ,अपहरण , आप्रक्रतिक यौनाचार ,हत्या का प्रयास ,डकैती , सबूतों को नष्ट करने का प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं .यही नहीं एक सब्जी विक्रेता को लूटने के मामले में उस पर लूटपाट का मामला भी चल रहा है .
हमें पूरा विश्वास है , यदि अदालत मुहम्मद की हदीस का पालन कर के छठवे आरोपी को बालिग़ मान लेती है , तो मुल्लों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो जाएगी .

http://www.thereligionofpeace.com/muhammad/myths-mu-rape.htm