सोमवार, 31 दिसंबर 2012

रसूली उन्माद या पागलपन


जब किसी पुस्तक को धर्मग्रन्थ कहा जाता है ,तो लोगों को ऐसा लगता है कि जरुर इस पुस्तक में ,जनकल्याण . आत्मोन्नति ,सदाचार और समाजसुधार की शिक्षा दी गयी होगी .कुरान भी एक ऐसी किताब है ,मुसलमान जिसे अल्लाह की किताब होने का दावा करते हैं .लेकिन जिस दिन से ही कुरान संकलित की गयी थी ,उसी समय से ही आजतक उसकी बेतुकी ,अटपटी ,अर्थहीन और परस्पर विरोधी बातों पढ़कर लोग कहते हैं कि कुरान अल्लाह की किताब नहीं बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति की रचना है ,जिसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं होगा ,या वह व्यक्ति अति कल्पनाशील व्यक्ति होगा .या उसे मतिभ्रम हो गया होगा .उस समय जो लोग मुहम्मद साहब के बारे में ठीक से जानते थे वह मुहम्मद साहब के बारे में जो कहते थे वह कुरान में इस प्रकार कहा गया है ,
1-दिवास्वप्न का रोगी 
ऐसे लोग जागते हुए भी सपना देखते हैं , और उनको सपने की बात सच लगती है ,इस रोग को Day dreamigया disambiguation-कहा जाता है
 .लोग कहते हैं कि इसकी बातें दिवास्वप्न की तरह हैं ,जिसे इसने अपनी कल्पना से गढ़ लिया है "सूरा -अल अम्बिया 21:5
इसी रोग के कारण मुहम्मद साहब को दिन में भी सपने में अद्भुत नज़ारे दिखते थे . कुरान में कहा है .
शहर के परले पार बेर के पेड़ के पास ,जन्नत के बिलकुल पास , जब बेर पर कुछ छाया सी पड़ी तो मैनें अल्लाह की निशानियाँ देखीं "
सूरा -नज्म 53:14 से 18
हदीस में इस आयत का खुलासा इस प्रकार दिया गया है , देखिये यह हदीस ,
अब्दुल्लाह ने कहा कि एकबार रसूल एक पेड़ से टिक कर आराम कर रहे थे ,तो उन्होंने कहा मैंने देखा कि पूरे आसमान में क्षतिज तक हरे रंग का गलीचा बिछा हुआ है . फिर उन्होने कुरान की सूरा-नज्म की 14 से 18 तक की आयत सुना दी 

حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه – ‏{‏لَقَدْ رَأَى مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَى‏}‏ قَالَ رَأَى رَفْرَفًا أَخْضَرَ سَدَّ أُفُقَ السَّمَاءِ‏.‏"

"सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 456 

2- पागल कवि 
लोग कहते हैं यह एक पागल कवि है "सूरा -अत तूर 52:30
लोग बोले कि इसके अन्दर पागलपन भरा है "सूरा -अल मोमिनून 23:70
( there is madness in him )
लोग खाते हैं कि यह एक उन्मादी कवि है "सूरा -साफ्फात 37:36

3-मुहम्मद चालाकी 
जब लोग मुहम्मद को पागल कहने लगे तो उन्होंने लोगों भरोसा दिलाने के लिए यह आयतें सुना दी .
मुहम्मद को न कोई उन्माद हुआ और न यह भूतग्रस्त है "सूरा -आराफ 7:184 
(Muhamad  not mad  and   possessed )
हे नबी तुम साथियों से कहो कि तुम्हारा यह साथी (मुहम्मद ) पागल नहीं हुआ "सुरा -तकबीर 81:22
हे नबी तुम खड़े हो जाओ और दो एक अपने लोगों को साथ ले लो जो लोगों से कहें कि हमारा साथी पागल नहीं हुआ "सूरा -सबा 34:46
" हे नबी तुम पर तुम्हारे रब की कृपा है कि तुम अभीतक पागल नहीं हुए "सूरा -कलम -68:2

4-पागल कहने से नाराज 
यद्यपि मुहम्मद साहब ने पूरा प्रयास किया कि लोग उनको पागल नहीं कहें , फिर भी यदि कोई पागल कह देता था ,तो वह उसे जहन्नम का भय दिखाते थे ,
और जिन लोगों ने हमारा आदर पूर्वक अभिवादन नहीं किया ,उनके लिए तो जहन्नम ही ठिकाना है "सूरा -मुजादिला 58:8

5-काल्पनिक फ़रिश्ता 

मुहम्मद साहब ने लोगों में यह बात फैला रखी थी ,कि मैं तो अनपढ़ हूँ ,मैं कुरान की आयतें कैसे लिख सकता हूँ . मुझे तो अल्लाह अपने खास फ़रिश्ते जिब्रील (Gabriel ) द्वारा कुरान की आयतें भेजता रहता है .और यह वही फ़रिश्ता है ,जिसका उल्लेख तौरेत और इंजील में किया गया है .मुहम्मद साहब यही बातें अपनी सबसे छोटी पत्नी आयशा से भी कहते थे .जो एक बच्ची और नादान थी .मुहम्मद साहब को लगा कि उनकी गप्पों पर आयशा विश्वास कर लेगी . इस लिए एक दिन उन्हों आयशा से जो कहा था वह इस हदीस में दिया है ,
"अबू सलमा ने कहा कि अचानक रसूल ने आयशा को पुकार कर कहा ,आयशा वहां देखो जिब्रील खड़ा है ,जो तुम्हें सलाम कर रहा है ,तुम उसके सलाम का जवाब दो .आयशा बोली लेकिन मुझे वहां कोई दिखाई दे रहा है .
"
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهَا ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ، هَذَا جِبْرِيلُ يَقْرَأُ عَلَيْكِ السَّلاَمَ ‏"‏‏.‏ فَقَالَتْ وَعَلَيْهِ السَّلاَمُ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ‏.‏ تَرَى مَا لاَ أَرَى‏.‏ تُرِيدُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم‏.‏

बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 440

इसीतरह जब लोगों ने जब मुहम्मद साहब से उस फ़रिश्ते के आकार प्रकार ,रंगरूप के बारे में सवाल किया तो मुहम्मद साहब ने बड़ी चालाकी से यह जवाब दे दिया , जो इस हदीस में दिया है ,
"याह्या बिन सुलेमान ने कहा कि रसूल ने बताया कि एकबार जिब्रील ने मेरे घर आने का वादा किया था ,मगर दीवार पर एक कुत्ते की तस्वीर देख कर वह डर गया .और वापिस चला गया . बुखारी -
"حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ وَعَدَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جِبْرِيلُ فَقَالَ إِنَّا لاَ نَدْخُلُ بَيْتًا فِيهِ صُورَةٌ وَلاَ كَلْبٌ‏.‏
जिल्द 4 किताब 54 हदीस 450

6-कुरान में बेतुकी आयतें 
इतना होने पर भी मुहम्मद साहब फ़रिश्ते के बहाने कुरान में बेतुकी ,निरर्थक , और बेसिर पर की आयतें बनाते रहे , जिसके कुछ नमूने देखिये
-"कसम है उनकी ,जो पंक्तिबद्ध हो जाते हैं .और फिर डाँटते हैं .और झिड़कते हैं .फिर इसका जिक्र करते हैं " सूरा-अस साफ्फात 37 :1 से 3 
-"कसम है तूर की .और लिखी हुई किताब की .और खुले हुए पर्ण)(parchament) की .और अपने घर की ऊंची छत की "सूरा -अत तूर 52 :1 से 4 
-"कसम है उनकी जो आखिरी सीमा तक जा लेते हैं.और इधर उधर निकल लेते हैं .और उतराते(float) हैं "सूरा -अन नाजिआत 79 :1 से 3 
-"कसम है उनकी जो हिनकारते है ,फिर आग झाड़ते हैं "सूरा -आदियात 100:1-2
वह खड़खडाने वाली चीज , क्या है वह खड़खडाने वाली चीज "सूरा -अल कारिया 101:1-2
और जब लोग कुरान की ऐसी ही पागलपन की बातें सुन सुन कर ऊब गए तो मुहम्मद साहब ने लोगों को यह आयत सुना दी ,
"और तुम्हारे रब ने अबतक तुम्हें नहीं छोड़ा और न तुम से ऊब गया है "सूरा -अज जुहा 93:3

7-अल्लाह ने मुहम्मद की बुद्धि छीन ली 
यह एक अटल सत्य है कि जैसे हरेक ढोंगी ,पाखंडी और झूठे लोगों का एक न एक दिन भंडा जरुर फूट जाता है . उसी तरह आखिर मुहम्मद साहब को स्वीकार करना पड़ा की उनकी बुद्धि अल्लाह ने छीन ली थी .जैसा इस प्रमाणित हदीस में दिया है ,
उबदा बिन अस्सामित ने कहा कि जब लोग रमजान महीने की रात लैलतुल कद्र की सही तारीख के बारे में बहस कर रहे तो ,रसूल बोले मैं तुम्हें सही तारीख इस लिए नहीं बता सकता , क्योंकि अल्लाह ने मेरी बुद्धि छीन ली है knowledge was taken away  (" 

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ يُخْبِرُ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ، فَتَلاَحَى رَجُلاَنِ مِنَ الْمُسْلِمِينَ فَقَالَ ‏ "‏ إِنِّي خَرَجْتُ لأُخْبِرَكُمْ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ، وَإِنَّهُ تَلاَحَى فُلاَنٌ وَفُلاَنٌ فَرُفِعَتْ وَعَسَى أَنْ يَكُونَ خَيْرًا لَكُمُ الْتَمِسُوهَا فِي السَّبْعِ وَالتِّسْعِ وَالْخَمْسِ ‏"‏‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 1 किताब 2 हदीस 47

निष्कर्ष -इस्लाम के प्रचारक कितने भी कुतर्क करें ,और कुरान को अल्लाह की किताब साबित करने का कितना प्रयास करें ,लेकिन हदीस से यह सिद्ध हो चूका है कि अल्लाह ने ही मुहम्मद साहब की बुद्धि छीन ली थी .और ऊपर से मुस्लिम विद्वान् यह भी दावा करते हैं कि मुहम्मद साहब अनपढ़ थे . और यही कारण कि कुरान में जगह ,जगह बेतुकी ,ऊंटपटांग ,निरर्थक और मानवता विरोधी बातों की भरमार है .और ऐसी बातें सिर्फ एक विक्षिप्त , व्यक्ति ही कह सकता है , जिसकी बुद्धि नष्ट हो गयी हो .

और कुरान को वही लोग मान सकते हैं जिनकी बुद्धि छिन गयी हो . हमारी बुद्धि अभी तक सुरक्षित है 


http://www.islamreview.com/articles/Meaningless_Quranic_Verses.shtml

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

मुसलमानों के अधिकार का औचित्य !


विश्व के हरेक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार मिलना चाहिए . सभी इस बात पर सहमत होंगे . परन्तु इस बात से भी सभी लोग सहमत होंगे अधिकारों का जन्म कर्तव्य से होता है . सिर्फ जनसख्या कम होने के आधार पर ही अधिकारों की मांग करना तर्कसंगत नहीं है . सब जानते कि मुसलमानों ने सैकड़ों साल तक इस देश को लूट लूट कर कंगाल कर दिया . लोगों की भलाई की जगह मकबरे , कबरिस्तान , मजार और मस्जिदें ही बनायी है . और जब हिदू देश की आजादी के लिए शहीद हो रहे थे ,तो इन्हीं मुसलमानों ने देश के टुकडे करवा दिए . फिर भी अल्पसंख्यक होने का बहाना लेकर अधिकारों की मांग कर रहे हैं . आप एक भी ऐसा मुस्लिम देश बता दीजिये जहाँ अल्पसंख्यक होने के आधार पर गैर मुस्लिमों को वह अधिकार मिलते हों ,जो मुसलमान यहाँ मांग रहे हैं . मुसलमान हमेशा दूसरों के अधिकार छीनते आये हैं और आपसी मित्रता ,सद्भाव , भाईचारे की आड़ में पीठ में छुरा भोंकते आये हैं यह इस्लाम के इतिहास से प्रमाणित होता है , मुसलमान अपनी कपट नीति नहीं छोड़ सकते , कैसे कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो सकती ,

1-मुसलमानों की कपट नीति 
अरब के लोग पैदायशी लुटेरे , और सतालोभी होते हैं .मुहम्मद की मौत के बाद ही उसके रिश्तेदार खलीफा बन कर तलवार के जोर पर इस्लाम फैलाने लगे . और जिहाद के बहाने लूटमार करने लगे , यह सातवीं शताब्दी की बात है , उस समय मुसलमानों का दूसरा खलीफा "उमर इब्ने खत्ताब " दमिश्क पर हमला करके उस पर कब्ज़ा कर चुका था . उम्र का जन्म सन 586और 590 ईस्वी के बीच हुआ था और मौत 7नवम्बर 644 ईस्वी में हुई थी . चूंकि यरूशलेम दमिश्क के पास था ,और वहां बहुसंख्यक ईसाई थे . यरूशलेम स्थानीय शासन "पेट्रीआर्क सोफ़्रोनिअसSophronius  " (Σωφρόνιος ) के हाथों में था . ईसाई उसे संत (Saint ) भी मानते थे .यरूशलेम यहूदियों ,ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र शहर था . और उमर बिना खूनखराबा के यरूशलेम को हथियाना चाहता था . इसलिए उसने एक चाल चली . और यरूशलेम के पेट्रआर्क सन्देश भेजा कि इस्लाम तो शांति का धर्म है . यदि आप के लोग समर्पण कर देगे तो हम भरोसा देते है कि आपकी और आपके लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे .और इसके साथ ही उमर एक संधिपरत्र का मसौदा ( Draft ) यरूशलेम भिजवा दिया . जिस पर यरूशलेम के पेर्ट्रीआर्क ने सही कर दिए . और उमर पर भरोसा करके यरूशलेम उमर के हवाले कर दिया .

2-उमर का सन्धिपत्र 
इस्लामी इतिहास में इस संधिपत्र को " उमर का संधिपत्र ( Pact of Umar ) या " अहद अल उमरिया  العهدة العمرية‎ " कहा जाता है .इसका काल लगभग सन 637 बताया जाता है . उमर ने यह संधिपत्र "अबूबक्र मुहम्मद इब्न अल वलीद तरतूशأبو بكر محمد بن الوليد الطرطوش"  " से बनवाया था .जिसने इस संधिपत्र का उल्लेख अपनी प्रसिद्ध किताब " सिराज अल मुल्क  سراج الملوك" के पेज संख्या 229 और 230 पर दिया है .इस संधिपत्र का पूरा प्रारूप " एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी University of Edinburgh  " ने सन 1979 में पकाशित किया है .इस संधिपत्र की शर्तों को पढ़ने के बाद पता चलेगा कि मित्रता के बहाने मुसलमान कैसा धोखा देते हैं . और अल्पसंख्यकों को अधिकार देने के बहाने उनके अधिकार छीन लेते है . यद्यपि उमर ने इस्लाम को शांति का धर्म बता कर लोगों गुमराह करने के लिए इस संधिपत्र बड़ा ही लुभावना शीर्षक दिया था

3-इस्लामी शासन में गैर मुस्लिमों का अधिकार !
यद्यपि उमर का संधिपत्र सातवीं सदी में लिखा गया था लेकिन सभी मुस्लिम देश इसे अपना आदर्श मानते है . और हरेक मुस्लिम देश के कानून में उमर के संधिपत्र की कुछ न कुछ धाराएँ जरुर मौजूद है ,उमर के संधिपत्र का हिंदी अनुवाद यहाँ दिया जा रहा है ,
1-हम अपने शहर में और उसके आसपास कोई नया चर्च ,मठ , उपासना स्थल , या सन्यासियों के रहने के लिए कमरे नहीं बनवायेंगे . और उनकी मरम्मत भी नहीं करवाएंगे . चाहे दिन हो या रात 
2-हम अपने घर मुस्लिम यात्रियों के लिए हमेशा खुले रखेंगे , और उनके लिए खाने पीने का इंतजाम करेंगे 
3-यदि कोई हमारा व्यक्ति मुसलमानों से बचने के लिए चर्च में शरण मांगेगा ,तो हम उसे शरण नहीं देंगे 
4-हम अपने बच्चों को बाईबिल नहीं पढ़ाएंगे 
5-हम सार्वजनिक रूप से अपने धर्म का प्रचार नहीं करेंगे , और न किसी का धर्म परिवर्तन करेंगे .
6-हम हरेक मुसलमान के प्रति आदर प्रकट करेंगे , और उसे देखते ही आसन से उठ कर खड़े हो जायेंगे . और जब तक वह अनुमति नहीं देता आसन पर नहीं बैठेंगे .
7-हम मुसलमानों से मिलते जुलते कपडे ,पगड़ी और जूते नहीं पहिनेंगे 
8-हम किसी मुसलमान के बोलने ,और लहजे की नक़ल नहीं करेंगे और न मुसलमानों जैसे उपनाम (Surname ) रखेंगे 
9-हम घोड़ों पर जीन लगाकर नहीं बैठेंगे , किसी प्रकार का हथियार नहीं रखेंगे , और न तलवार पर धार लगायेंगे 
10-हम अपनी मुहरों और सीलों ( Stamp ) पर अरबी के आलावा की भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे 
11-हम अपने घरों में सिरका (vinegar ) नहीं बनायेंगे 
12-हम अपने सिरों के आगे के बाल कटवाते रहेंगे 
13-हम अपने रिवाज के मुताबिक कपडे पहिनेंगे ,लेकिन कमर पर "जुन्नार" ( एक प्रकार का मोटा धागा ) नहीं बांधेंगे 
14-हम मुस्लिम मुहल्लों से होकर अपने जुलूस नहीं निकालेंगे , और न अपनी किताबें , और क्रूस प्रदर्शित करेंगे , और अपनी प्रार्थनाएं भी धीमी आवाज में पढेंगे 
15-यदि कोई हमारा सम्बन्धी मर जाये तो हम जोर जोर से नहीं रोयेंगे , और उसके जनाजे को ऐसी गलियों से नहीं निकालेंगे जहाँ मुसलमान रहते हों . और न मुस्लिम मुहल्लों के पास अपने मुर्दे दफनायेंगे 
16 -यदि कोई मुसलमान हमारे किसी पुरुष या स्त्री को गुलाम बनाना चाहे ,तो हम उसका विरोध नहीं करेंगे 
17-हम अपने घर मुसलमानों से बड़े और ऊँचे नहीं बनायेंगे 

" जुबैरिया बिन कदमा अत तमीमी ने कहा जब यह मसौदा तैयार हो गया तो उमर से पूछा गया , हे ईमान वालों के सरदार , क्या इस मसौदे से आप को संतोष हुआ , तो उमर बोले इसमें यह बातें भी जोड़ दो ,हम मुसलमानों द्वारा पकडे गए कैदियों की बनायीं गयी चीजें नहीं बेचेंगे . और हमारे ऊपर रसूल के द्वारा बनाया गया जजिया का नियम लागू होगा " बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 38

4-पाकिस्तान में हिन्दुओं के अधिकार 

पाकिस्तान की मांग उन्हीं मुसलमानों ने की थी जो अविभाजित भारत के उसी भाग में रहते थे जो अज का वर्त्तमान भारत है .पाकिस्तान बनाते ही जिन्ना ने कहा था आज से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों द्वार सील हो गया है "the fate of minorities in this country was sealed forever "
पाकिस्तान में इसी लिए अकसर आये दिन हिन्दू लड़कियों पर बलात्कार होता है , मंदिर तोड़े जाते हैं , बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कराया जाता है .और हमारी हिजड़ा सेकुलर सरकार हिना रब्बानी के साथ मुहब्बत के तराने गाती रहती है . दिखने के लिए पाकिस्तान के संविधान की धारा 20 में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दावा किया गया है . लेकिन मुसलमान संविधान की जगह उमर की संधि पर अमल करते हैं .
हम लोगों से पूछते हैं , सरकार मुसलमानों को अधिकार किस खजाने से देगी ? क्या सोनिया इटली से खजाना लाएगी ?सीधी सी बात है कि मुसलमानों को अधिकार हिन्दुओं से छीन कर दिया जायेगा .
और अब समय आ गया है कि हिन्दू अपना अधिकार इन लुटेरों को देने की बजाये इन छीन लें . तभी देश की गरीबी दूर हो जाएगी औए आतंकवाद भी समाप्त हो जायेगा . क्योंकि हमारे ही पैसों से हमारा ही नाश हो रहा है .
हिन्दुओ अपनी अस्मिता बचाओ , अपने अधिकार छीन लो , अभी उठो !

http://www.bible.ca/islam/islam-kills-pact-of-umar.htm

रविवार, 23 दिसंबर 2012

मुहम्मद की दर्दनाक मौत का कारण !


आज तक लोग यही बात मानते आये हैं ,कि मुहम्मद साहब अपनी आयु पूरी करके कुदरती मौत से मरे थे . लेकिन इस्लामी इतिहास की किताबों और हदीसों का गहन अध्ययन करने के बाद और कुरान को पढ़ने बाद यह बात सिद्ध होती है कि खुद अल्लाह ने मुहम्मद साहब के गले की मुख्य धमनी कटवा दी थी . जिस के कारण मुहम्मद साहब की बड़ी दर्दनाक मौत हो गयी थी .इस लेख में इसी सत्य को विस्तार से सप्रमाण प्रस्तुत किया जा रहा है ,ताकि झूठ का भंडाफोड़ हो सके
धर्म के नाम पर भोले भाले लोगों को गुमराह करके ,सम्पति और सता हथियाना यह कोई नयी बात नहीं है .भारत में भी अनेकों फर्जी अवतार , सिद्ध और चमत्कारी बाबा हो चुके हैं .चूंकि यहूदी ,ईसाई और इस्लाम धर्म में अवतार नहीं होते ,इसलिए इन धर्मों में नबी और रसूल होते हैं .और अक्सर ऐसे नबी या रसूल अपनी कामना पूर्ति के लिए शैतान के वश में हो जाते थे . और सत्य की जगह असत्य का प्रचार करने लगते थे .यह बात कुरान  से पता चलती है . इसमें कहा है ,
1-सभी नबी स्वार्थी होते थे 
अक्सर देखा गया है कि बड़े बड़े संत महात्मा भी , लोभ के वश में आकर सत्य का मार्ग छोड़ देते हैं . ऐसे ही अल्लाह ने जितने भी नबी और रसूल भेजे थे ,वह निजी स्वार्थ और कामना पूर्ति के लिए शैतान के प्रभाव में आकर सत्य के साथ असत्य मिला देते थे . और लोगों को गुमराह करते थे . कुरान में इस आयत यही बताया है ,
"हे नबी तुम से पहले जो नबी और रसूल भेजे गए ,उन्होंने शैतान के प्रभाव में आकर अपनी कामना पूर्ति के लिए सत्य के साथ असत्य मिला दिया था ."
सूरा -अल हज्ज 22:52 

2-झूठे नबियों की सजा 
बाइबिल यानी तौरेत में उन सभी झूठे नबियों को मौत की सजा बताई है , जो अपने मन से वचन बोलते थे और लोगों से कहते कि यह ईश्वर के वचन हैं .
 और उस झूठे  नबी ने अभिमान में आकर जो भी कहा हो तू उस से भय नहीं खाना " बाइबिल .व्यवस्था विवरण -अध्याय 18 :22
 और जो नबी अभिमान करके ,ऐसे वचन कहे जिसकी आज्ञा मैंने उसे नहीं दी गयी हो ,और वह अपने नाम से कुछ भी कहे , तो वह नबी मार डाला जायेगा " 
बाइबिल .व्यवस्था विवरण -अध्याय 18 :20-21  

3-मुहम्मद मानसिक रोगी थे 
इन प्रमाणिक हदीसों से सिद्ध होता है कि मुहम्मद साहब का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था . और उनको इलाज की जरूरत थी
"जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,एक बार जब काबा की फिर से मरम्मत हो रही थी , और मैं रसूल के साथ पत्थर ढो रहा था . मैंने रसूल से कहा आप अपनी तहमद (Waist Sheet ) ऊंची कर दीजिये , ताकि उलझ कर आपको चोट न लग जाये . फिर जैसे ही रसूल ने तहमद ऊँची की . वह अचानक चिल्लाने लगे ,लाओ मेरी तहमद , मेरी तहमद कहाँ है . जबकि तहमद कमर में बंधी हुई थी " बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 170

"आयशा ने कहा रसूल हमेशा कल्पनाएँ (Fancy ) करते रहते थे .उनको ऐसा भ्रम होता था कि वह कुछ काम कर रहे हैं ,या कह रहे हैं ,लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता था . मैंने उनका इलाज भी करवाया था . एक दिन दो लोग रसूल के पास आये और बोले आपका दिमाग भ्रमित (Bewiched ) हो गया है " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 490 

4-मुहम्मद शैतान के दोस्त 
मुहम्मद साहब ने अपनी मानवता विरोधी बातों अल्लाह के वचन साबित करने के लिए लोगों में यह बात फैला दी ,कि मैं तो अनपढ़ हूँ , यह आयतें अल्लाह का फ़रिश्ता भेजता है .लेकिन कुछ लोग जानते थे कि मुहम्मद शैतान के दोस्त थे . इस हदीस में कहा है ,
. जुन्दाब बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,कि कुरैश की औरतें कहती थीं , मुहम्मद से जिब्राईल नहीं शैतान मिलता था . और मुहम्मद पर उसी का प्रभाव था। "
बुखारी -जिल्द 2 किताब 21 हदीस 225

5-मुहम्मद को फ़रिश्ते का भ्रम 
मानसिक रोगी होने के कारण मुहम्मद साहब को फ़रिश्ते ही फ़रिश्ते दिखाई देते थे , यहाँ तक वह अपनी पत्नी आयशा को भी फ़रिश्ता देखने पर मजबूर करते थे 'जबकि सब जानते थे कि रसूल को भ्रम हो गया है . फिर भी वह डर के मारे हाँ में हाँ मिलाते रहते थे .
आयशा ने कहा कि रसूल जब चाहे मुझसे कहते रहते थे ,आयशा वहां देखो ,जिब्राईल तुम्हें सलाम कर रहा है .लेकिन मुझें वहां कोई दिखाई नहीं देता था ."
बुखारी -जिल्द 8 किताब 74 हदीस 266

 अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान बिन ऑफ ने अबू हुरैरा से पूछा क्या आपने कभी रसूल को जिब्राईल से बातें करते हुए देखा है , या उनकी बातें सुनी हैं .तो हुरैरा ने कहा कि शायद रसूल को ऐसा भ्रम हो गया है . कि वह किसी से बातें कर रहे हैं " बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 173

6-लड़के को फ़रिश्ता समझा 
अरब के मुसलमान समलैंगी होते हैं . कई खलीफा ऐसे (Homosexual ) थे . ऐसा ही कोई सुन्दर लड़का मुहम्मद के पडौस में रहता होगा जिसे मुहम्मद ने फ़रिश्ता समझ लिया होगा . क्योंकि मानसिक रोगी को अजीब अजीब चीजें दिखती रहती हैं .इसलिए मुहम्मद ने एक लडके को फ़रिश्ता समझ लिया . जैसा इस हदीस में है .
अबू उस्मान ने कहा कि जब मुझे खबर मिली कि जिब्राइल रसूल से मिलने आया करता है .और रसूल के जाने के बाद उम्मे सलमा ने भी उस से बात की है .इसलिए जब मैंने उम्मे सलमा से पूछा कि जिब्राईल कैसा दिखता है .तो उम्मे सलमा ने कहा अल्लाह की कसम है , वह एक खुबसूरत लड़का (Dihya ) है ." 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 827 

अबू उस्मान ने कहा कि ,एक बार जिब्राईल रसूल के घर आया , उस समय उम्मे सलमा भी मौजूद थी ,अचानक रसूल बाहर चले गए . और उम्मे सलमा जिब्राईल से बातें करने लगी ,तभी रसूल आगये और बोले यह कौन है , इसे अन्दर आने की अनुमति किस ने दी , उम्मे सलाम बोली यह एक " दियत कलबी " ( सुन्दर युवक دَحْيَةَ الْكَلْبِيِّ  "  ( a handsome person  )है " बुखारी - जिल्द 6 किताब 61 हदीस 503 

7-मुहम्मद शैतान के वश में 
मानसिक संतुलन खराब हो जाने से धीमे धीमे मुहम्मद साहब शैतान के वश में हो गए ,और वह अल्लाह के नाम से शैतान के वचन सुनाने लगे .क्योंकि कोई स्वस्थ व्यक्ति जिहाद की बातें नहीं कहता ,
आयशा ने कहा रसूल पर जादू का प्रभाव था .उनको ऐसा लगता था कि वह कुछ काम कर रहे हैं ,लेकिन वह कुछ नहीं करते थे . उनको लगता था कि अल्लाह उनको सन्देश भेज रहा है . एक दिन रसूल ने मुझे बताया .कि मेरे पास दो व्यक्ति आये एक मेरे पास , दूसरा मेरे कदमों के पास बैठ गए . एक ने कहा इस मुहम्मद को क्या बीमारी है , दूसरा बोला यह शैतान के प्रभाव में है " बुखारी -जिल्द 7 किताब 71 हदीस 661

8-अल्लाह की चेतावनी 
और जब अल्लाह को पता चला कि उसका रसूल हमारे नाम से झूठी बातें गढ़ रहा है ,और फसाद फैला रहा है ,तो अल्लाह में मुहम्मद को यह अंतिम चेतावनी दे डाली .
"और यह नबी ( मुहम्मद ) यदि हमारे नाम से कोई बात गढ़ता है ,सूरा -हाक्का 69:44

وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ

Now if he  had dared to attribute some [of his own] sayings unto Us, 69:44

" तो हम हम इसकी गर्दन की धमनी ( Aorta ) काट डालेंगे " सूरा -हाक्का 69:46
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ
and would indeed have cut his life-vein, 69:46

9-मुहम्मद ने गुनाह कबूला 
यद्यपि इन प्रसिद्ध इस्लामी इतिहास के अनुसार मुहम्मद ने स्वीकार किया था , कि मैंने अल्लाह के नाम पर लोगों को गुमराह किया था .शैतान के प्रभाव में आकर फर्जी आयतें सुनाता था .
"आखिर एक दिन मुहम्मद ने खुद अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा ,कि मैंने अल्लाह के बहाने लोगों को धोखा दिया है .और मैंने अल्लाह के नाम से अपनी ऐसी बातें कहीं है , जो अल्लाह ने नहीं कही थीं "

 Muhammad later reversed himself, confessing, "I have fabricated things against Allah and have imputed to him words which he has not spoken.as Allah's.

"محمد انعكس في وقت لاحق نفسه، يعترف، "لقد ملفقة ضد الله والأشياء المنسوبة اليه والكلمات التي لم يكن قد قال في والله.  "

 (Al Tabari, The History of Al-Tabari, vol. 6, p.111

(तबरी -तबरी का पूरा नाम "अबू जाफर मुहम्मद इब्न जरीर अल तबरी أبو جعفر محمد بن جرير بن يزيد الطبري‎"है .इसका जन्म सन 838 ईस्वी में ईरान के प्रान्त तबरिस्तान में हुआ था . और मृत्यु सन 923 ई 0 में हुई थी .तबरी ने कुरान की व्याख्या में आयतों की ऐतिहासिक प्रष्ठभूमि ,और घटनाक्रम भी दिया है . और मुहम्मद के जीवन की ऐसी बातें भी लिखी हैं , जिसे दुसरे मुस्लिम इतिहासकारों ने नहीं लिखा है .)
"मुहम्मद ने कहा कि भूल से शैतान की वाणी सुना दी थी "

and said he had mistaken the words of "Satan"

"وقال انه مخطئ على حد قول "الشيطان  "

 (Ibn Ishaq, Sirat Rasul Allah, pp.165-166) 
(इब्न इशाक -इसका पूरा नाम " मुहम्मद इब्न इसहाक इब्न यासिर इब्न खियार محمد بن إسحاق بن يسار بن خيار‎, " था लोग उसे सिर्फ " इब्न इसहाक ابن إسحاق" कहते हैं .इसका अर्थ इसहाक का पुत्र होता है .यह अरब का महान इतिहासकार था ,और अब्बासी खलीफा मंसूर के समय मौजूद था .इसहाक में मुहम्मद की जीवनी के बारे में प्रमाण इकट्ठे किये थे . जिसे हदीस की तरह प्रमाणिक माना जाता है .इसकी मृत्यु सन 761 या 767 ई 0 में हुई था इब्न इसहाक ने दो किताबें लिखी हैं .1 . सीरते रसूलल्लाह "سيرة رسول الله‎ "(Life of the Messenger of God)और 2.अल सीरा अल नाबीबिय्या " السيرة النبوية‎"( Prophetic biography  )इन किताबों में इस्लाम से पहले की घटनाएँ भी दर्ज है . और मुहम्मद के बारे में छोटी से छोटी बातें भी लिखी हैं .जानकारी के लिए यह विडियो देखिये -
How did Muhammad die? Allah killed him for being a false prophet and lair


http://www.youtube.com/watch?v=hlikOiMYHTI

10-मुहम्मद की दर्दनाक मौत 
लगता है कि अपना गुनाह कबूल करने बाद भी मुहम्मद साहब ने अपनी आदतें नहीं छोडी , और शान्ति की जगह ,जिहाद , हत्या , लूट ,जैसी बातें लोगों को सिखाते रहे .शायद इसी बात पर नाराज होकर अल्लाह ने सजा के रूप में उनकी मौत का इंतजाम कर दिया था .और उनको ऐसी कष्टदायी मौत दी थी . कि जिसे देख कर भविष्य में किसी को फर्जी रसूल बनने की हिम्मत नहीं हो .यह इन हदीसों से साबित होता है ,
इब्न अब्बास ने कहा , कि मेरे साथ उमर बिन खत्ताब ,और अब्दुर्रहमान बिन ऑफ बैठे हए थे , उमर ने मुझ से कहा कि मैं आपका सम्मान करता हूँ , क्योंकि आपका दर्जा ऊंचा है .क्या आप सूरा -नस्र 110:1 की इस आयत का खुलासा करेंगे "जब अल्लाह की मदद आएगी ,तो विजय हो जाए " यह बात रसूल की बीमारी के बारे में हो रही थी .उमर ने कहा मुझे इसका मतलब समझ में नहीं आया .क्योंकि रसूल आयशा से कह रहे थे ,"आयशा मैंने खैबर में जो खाना खाया था . उसी के कारण यह भयानक दर्द हो रहा है . ऐसा लग रहा है कि उसी खाने के जहर से मेरी मुख्य धमनी (Aorta ) को कोई काट रहा है "
(Narrated 'Aisha: The Prophet in his ailment in which he died, used to say, "O 'Aisha! I still feel the pain caused by the food I ate at Khaibar, and at this time, I feel as if my aorta is being cut from that poison.)
बुखारी -जिल्द 4 किताब 59 हदीस 713

अबू हुरैरा ने कहा ,खैबर में एक यहूदिन ने एक भेड़ पकाकर रसूल को दावत खिलाई थी .जिसमे तेज जहर मिला हुआ था . रसूल ने उस गोश्त को खाया .जब "बिश्र अल बरा इब्न मासूर अंसारी "उस गोश्त को खाते ही मर गया , तो रसूल ने उस औरत को क़त्ल करा दिया . तब तक जहर का असर रसूल पर होने लगा था .वह दर्द से कराहने लगे और कहने लगे ,ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई मेरी मुख्य धमनी (Aorta)को काट रहा है .
" الأَكْلَةِ الَّتِي أَكَلْتُ بِخَيْبَرَ فَهَذَا أَوَانُ قَطَعَتْ أَبْهَرِي ‏ ‏.‏"

सुन्नन अबू दाऊद - किताब 41 हदीस 18(Reference Sunan Abi Dawud 4511,English translation : Book 40, Hadith 4496 )

11-मुहम्मद की मौत की तारीख 
इस्लामी इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद साहब की मौत उस धीमे जहर के कारण हुई थी , जो उनको खैबर के युद्ध में ख्हने में मिलाकर दिया गया था .खैबर का युद्ध हिजरी 6 और 7 के बीच ( सन 628 और 629) में हुआ था . और तब से वह जहर मुहम्मद साहब पर अपना असर दिखा रहा था .और उसी जहर उनके गले की धमनी में भयानक दर्द होता रहता था .आखिर करीब तीन चार साल कष्ट भोग कर 10 हिजरी 8 जून सन 632 को मुहम्मद साहब की मृत्यु हो गयी .
निष्कर्ष-इन सभी प्रमाणों से यह बातें सिद्ध होती हैं कि 1. धर्म के नामपर पाखंड करना , अल्लाह के नाम पर फर्जी आयतें बना कर जिहाद की शिक्षा देकर अशांति फैलाने लोगों का एक न एक दिन भंडाफोड़ हो जाता है ,2..और यदि कोई अल्लाह को माने या ईश्वर को माने यह अटल सत्य है " जो जैसा करेगा उसे वैसा ही फल मिलेगा ."चाहे वह मुहम्मद हो , या ओसामा बिन लादेन . हमें याद रहना चाहिए कि मुहम्मद ने ही क़ुरबानी की रीती निकाली थी . ताकि जिहादी निर्दयी बन जाएँ ,मुहम्मद के कहने पर मुसलमान हर साल जैसे लाखों मूक जानवरों के गले पर छुरी फिर देते हैं , वैसे ही मुहम्मद की मौत गर्दन की मुख्य धमनी कटने से हुई थी . जैसे जानवर तड़प तड़प कर मर जाते है . वैसे मुहम्मद एडियाँ रगड़ कर मर गए . यही कारण है कि अल्लाह ने मुहम्मद के बाद कोई रसूल नहीं बनाया ,क्योंकि अल्लाह को पता है कि कोई भी मुसलमान सदाचारी और शांतिप्रिय नहीं होता .
हमें मुहम्मद के अंजाम से सबक लेने की जरुरत है !

http://www.billionbibles.org/sharia/muhammad-false-prophet.html

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

मुहम्मद की दौलत का भंडाफोड़ !


आज हमें मुहम्मद साहब के चरित्र से शिक्षा लेने की जरुरत है . ऐसा इसलिए नहीं कि वह अल्लाह के सच्चे अनुयायी और सबसे प्यारे अंतिम रसूल थे . बल्कि इसलिए नहीं कि वह जोभी गलत काम करते थे उसे जायज बताने के लिए अल्लाह की तरफ से कोई न कोई आयत कुरान में जोड़ देते थे . यानि अपने सभी गलत कामों में अल्लाह को शामिल कर लेते थे . यद्यपि मुस्लिम विद्वान् दावा करते हैं कि मुहम्मद साहब एक सच्चे सीधे और सदा व्यक्ति थे ,और उनको धन संपत्ति से कोई मोह नहीं था . और न उन्होंने जीवन भर में किसी प्रकार की दौलत और जमीन अपने पास रखी थी . लेकिन हदीसों और इस्लाम की इतिहास की किताबों से सिद्ध होता है कि मुहम्मद साहब दुनिया में एकमात्र ऐसे नबी थे इस्लाम की जगह अपनी दौलत पर अधिक प्यार था . उनको इस्लाम की नहीं दौलत की चिंता बनी रहती थी , जो इस हदीस से सिद्ध होता है ,

1-महालोभी और लालची रसूल 
मुहम्मद साहब को धन संपत्ति का कितना मोह और लालच था , इसे साबित करने के लिए यह एक ही हदीस काफी है ,
"उकबा बिन आमिर ने कहा कि रसूल कहते थे कि मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं है कि मेरी मौत के बाद तुम इस्लाम त्याग कर फिर से मुशरिक हो जाओ , लेकिन मुझे तो इस बात की सबसे बड़ी चिंता लगी रहती है , कि कहीं मेरी संपत्ति दूसरों हाथों में न चली जाये "
बुखारी-जिल्द 2 किताब 2 हदीस 428
2-बद्र की लूट 
मुहम्मद के साथी पहले भी काफिले लूटते थे , और मुहम्मद की कई औरतें भी थी ,जिनका खर्चा चलाना कठिन हो रहा था ,इसलिए मुहम्मद जब अपने परिवार और साथियों के साथ मदीना में रहने लगे , तो लूटमार करने लगे . इसका नाम उन्होंने "गजवा " रख दिया था जिसका अरबी बहुवचन " गजवात " होता है .जिसका वास्तविक अर्थ "युद्ध (Battle ) नहीं बल्कि "छापा  raids  " या लूट  (plundering)  होता है .मुहम्मद ने अपने जीवन में ऐसे कई गजवे (छापे ) किये , और लूट का माल घर में भर लिया था .चूँकि मदीना से कुछ दूर ही मुख्य व्यापारिक मार्ग था , जो लाल समुद्र (Red Sea ) के किनारे यमन से सीरिया तक जाता था . और इसी मार्ग से काफिले अपना कीमती सामान लाते -लेजाते थे .मुहम्मद की जीवनी लिखने वाले प्रसिद्ध मुस्लिम इतिहासकार इब्ने इसहाक ( Ibn Ishaq/Hisham 428) पर लिखा है .कि अबूसुफ़यान ने रसूल को एक गुप्त सूचना दी , कि मदीना से करीब 80 मील दूर मुख्य मार्ग से काफिला गुजरने वाला है .जिसमे पचास हजार सोने की दीनार , और चांदी के दिरहम के साथ काफी कीमती सामान है .अबूसुफ़यान ने यह भी बताया कि उस काफिले में केवल तीस या चालीस लोग ही हैं .यह खबर मिलते ही रसूल ने अपने लोगों को आदेश दिया कि जल्दी जाओ और उस काफिले पर धावा बोल दो . और काफिले का जितना भी माल है सब लूट लो .मुहम्मद के आदेश से मुसलमानों ने मदीना से करीब 80 मील दूर "बद्र " नामकी जगह पर 13 मार्च शनिवार सन 624 तदानुसार 17 रमजान हिजरी सन 2 को उस काफिले पर धावा बोल दिया .मुसलमान इस लूट को" बद्र का युद्ध  Battle of Badr "या अरबी में "गजवा बद्र غزوة بدر‎ "कहते हैं .इस लूट का कमांडर अबूसुफ़यान था . जिसके साथी अबूबकर ,उमर .अली ,हमजा ,मुसअब इब्न उमर ,जुबैर अल अब्बास , अम्मार इब्न यासिर और अबूजर अल गिफारी थे . यह लोग 70 ऊंट और दो घोड़े भी लाये थे .इनमे जादातर लोग मुहम्मद के रिश्तेदार थे . और सबने मिलकर काफिले की संपत्ति लुट ली . क्योंकि काफिले वाले कम थे .और मुहम्मद ने अल्लाह का डर दिखा कर वह सारा माल घर में भर लिया .जिसका नाम मुहम्मद ने "अनफाल " रख दिया .

3-कुरान में अनफाल 
क्योंकि बद्र की इस लूट में मुहम्मद के कई रिश्तेदार शामिल थे , इसलिए वह भी अपना हिस्सा मांगने लगे . तब उनका मुंह बंद करने के लिए मुहम्मद ने आयत बना दी ,
" हे नबी जो लोग तुम से अनफाल के धन के बारे में सवाल ( आपत्ति ) करते हैं ,तो उनसे कह दो कि इस अनफाल के धन पर केवल रसूल का ही अधिकार है "
सूरा -अनफाल 8:1 ( अनफाल का अर्थ"Accession " होता है .यह ऐसी संपत्ति को कहते हैं ,जो दूसरों से छीन कर प्राप्त की गयी हो )
यह बात इन हदीसों से प्रमाणित होती है , कि मुहम्मद ने अकेले ही लूट का माल हथिया लिया था ,
"सईद बिन जुबैर ने इब्न अब्बास से पूछा कि कुरान की सूरा " अनफाल ( सूरा 8) किस लिए उतरी थी . तो वह बोले यह सूरा बद्र में लुटे गए माल को रसूल के लिए वैध ठहराने के लिए उतरी थी "बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 404 
बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 168

4-लूट का माल रसूल के घर में 
मुहम्मद ने पहले तो बद्र के लूट की दौलत अपने लिए वैध ठहरा दी और अपने परिवार में बाँट दी , जैसा इन हदीसों में कहा है ,
"अली ने कहा ,कि बद्र की लुट में मुझे जो दौलत और सोना मिला , उस से मैंने उसी दिन एक ऊंटनी खरीद ली . मैं फातिमा से शादी करना चाहता था .इस लिए मैंने लूट के सोने से " बनू कैनूना " के सुनार (Goldsmith ) से फातिमा के लिए जेवर बनवा लिए . और कुछ सोना सुनारों को बेच कर अपनी और फातिमा की शादी और दावत पर खर्च कर दिया .और अपने और फातिमा के लिए दो ऊंटनियाँ काठी (Saddles ) सहित खरीद लीं 
.बुखारी -जिल्द 5 किताब59 हदीस 340

5-खैबर पर हमला 
एकबार जब मुहम्मद को लूट से काफी दौलत मिल गयी तो लूट से दौलत कमाने का चस्का लग गया , और धन के साथ जमीन पर भी कब्ज़ा करने लगे ,मुहम्मद में ऐसा एक और हमला खैबर पर किया था .खैबर में फदक का बगीचा यहूदियों के पास था , जो कई पीढ़ियों से वहां के खजूर बेच कर ,पैसा कमा रहे थे , और दुसरे धंधे कर रहे थे . जब मुहम्मद को पता चला कि फदक के खजूरों को बेचकर यहूदी धनवान हो रहे हैं ,तो मुहम्मद ने 7 मई सन 629 को करीब 1500 जिहादी और 200 घुड़सवारों की फ़ौज बना कर खैबर पर हमला कर दिया .और यहूदियों को मार भगा दिया . और फदक के बागों पर कब्ज़ा कर लिया .यह घटना इब्न इसहाक ने मुहम्मद की जीवनी " सीरत रसूलल्लाह " में विस्तार में लिखी है .अरब के उत्तरी भाग में खैबर नामकी जगह में एक "नखलिस्तान (Oasis ) था . जहाँ पानी की प्रचुरता होने से खजूरों के बड़े बड़े बाग़ थे . इनका नाम "फदक فدك" था . यह बाग़ मदीना से करीब 30 मील दूर था .फदक के खजूर अच्छे होते थे और इनसे काफी आमदानी होती थी .खैबर की लूट में मुहमद ने यहूदियों से फदक के बाग़ के साथ 2000 कीमती यमनी कपड़ों की गाठें (Bales ) और 5000 कपड़ों के थान लूट लिये थे ,यहूदी यह सामान सीरिया भेजने वाले थे . इसके अलावा मुहम्मद ने फदक पास दो बाग़ " अल शिक्क الشِّق" और "अल कतीबाالكتيبة " पर भी कब्जा कर लिया था .और सबको अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था .जब तक मुहम्मद जीवित रहे फदक बाग़ उनकी संपत्ति माने गए . उन्हीं की उपज से मुहम्मद अपने इतने बड़े परिवार का खर्चा चलाते रहे . खलीफा उमर इन बागों की कीमत पचास लाख दीनार आंकी थी .और जब फातिमा और अली अपने पुत्रों हसन और हुसैन के लिए अबू बकर से फदक के बागों से अपना हिस्सा मागने गयी थी , तो अबू बकर ने इंकार कर दिया था .शिया -सुन्नी विवाद का यह भी एक कारण है .

6-लुटेरे के घर डाका 
मुहम्मद ने जिस दौलत और जमीन के लिए हजारों निर्दोष लोगों इस लिए को मार दिया था .कि इस दौलत से मेरे परिवार के लोग पीढ़ियों तक मजे से ऐश करते रहेंगे , लेकिन मुहम्मद को पता नहीं था कि उसकी मौत के बाद लूट की सम्पति उसका सगा ससुर एक डाकू की तरह हथिया लेगा ,और मुहम्मद की औरतों , और लड़की दामाद को अबू बकर ने एक फूटी कौड़ी नहीं दी थी ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
"आयशा ने कहा कि रसूल की मौत के बाद उनकी दूसरी पत्नियाँ रसूल की सम्पति में हिस्सा चाहती थी . इसके लिए उन्होंने उस्मान बिन अफ्फान को मेरे पिता अबू बकर के पास भेजा . तो मेरे पिता ने कहा " रसूल का कोई वारिस नहीं होता " मैंने तो रसूल की दौलत ग़रीबों में खैरात कर दी है " 
सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4351

अबू बकर ने कहा कि एकमात्र मैं ही रसूल की संपत्ति का संरक्षक हूँ . और जब अली और अब्बास अबू बकर से बद्र और "फदक" के बागों में हिस्सा मांगने आये तो . अबू बकर बोला अल्लाह की कसम खाता इनमे तुम्हारा कोई हिस्सा नहीं बनता ." सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4349
"उरवा बिन जुबैर ने कहा कि , आयशा ने बताया , जब फातिमा और अली मेरे पिता अबू बकर के पास गए , और उन से बद्र और खबर की लूट का हिस्सा माँगा ,तो ,मेरे पिता ने कहा , मैं उस अल्लाह की कसम खाकर सच कहता हूँ जिसके हाथों में मेरी जान है .लूट की वह सारी दौलत इस्लामी राज्य की स्थापना में खर्च हो गयी . और रसूल की यही अंतिम इच्छा थी . यह सुन कर फातिमा और अली रुष्ट होकर घर लौट गए .
सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4354

7-लूट का क्रूर तरीका 
मुसलमान दावा करते हैं कि हमारे रसूल तो बड़े दयालु और रहमदिल थे , उन्होंने जिंदगी भर एक व्यक्ति की भी हत्या नहीं की थी . लेकिन सब जानते हैं लालच में अँधा व्यक्ति कुछ भी कर सकता है .मुहम्मद ने लूटों के दौरान हत्या का जो तरीका अपनाया था , उसे जानकर कटर से कठोर दिल वाले काँप जायेंगे मुहम्मद लोगों को जिन्दा दफना देता था , ताकि कोई सबूत्त बाकि नहीं रहे ,.
"अबू तल्हा ने कहा कि बद्र की लूट में रसूल ने सभी काफिले वालों बुरी तरह से मारा , जिस से कुछ तो अपनी जान बचा कर काफिले का सामान छोड़ कर भाग गए .लेकिन 24 लोग रसूल के हाथों पकडे गए .जो बुरी तरह से घायल थे . तब रसूल ने उन सभी को बद्र के एक सूखे और गहरे कुंएं में फिकवा दिया .और हमें वहीँ तीन दिन रात रुकने का हुक्म दिया . कहीं कोई कुंएं से जिन्दा न निकल सके . अबू तल्हा ने बताया की जब भी रसूल काफिले लूटते यही तरीका अपनाते थे .जिस से घायल काफिले वाले कुंएं में भूखे प्यासे मर जाते थे " बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 314 
8-मुहम्मद की धूर्तता 
जिस तरह हर मुसलमान अपने अपराधों पर पर्दा डालने के लिए दूसरों पर आरोप लगा देता है , उसी तरह खुद को हत्या के अपराध से निर्दोष साबित करने के लिए मुहम्मद अल्लाह को ही जिम्मेदार बता देता था . जैसा कुरान में कहा है ,
" हे रसूल तुमने उनका क़त्ल नहीं किया , बल्कि अल्लाह ने उनको क़त्ल किया है . और तुमने उनको कुंएं में नहीं फेका ,बल्कि अल्लाह ने ही उनको कुएं में फेका है .सूरा -अनफाल 8: 17

9-निष्कर्ष 
 इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि मुहम्मद एक महालोभी , क्रूर लुटेरा और ऐसा धूर्त था कि लोग उसके द्वारा की गयी हजारों हत्याओं का पता भी नहीं कर सकें . जब लाश ही नहीं मिलेगी तो लोग मुहम्मद को दयालु मान लेगे , इसके अतिरिक्त यह बात भी सिद्ध है कि मुहमद और अल्लाह एकही थैली के चट्टे बट्टे है . और अल्लाह भी मुहम्मद की मर्जी के मुताबिक आयतें बना देता था .
लेकिन इस अटल सत्य को हजारों अल्लाह मिल कर भी नहीं बदल सकते ,कि हरेक धूर्त का एक दिन "भंडाफोड़ " जरुर हो जाता है .मुहम्मद ने जैसे क्रूर कर्म किये थे वैसी ही कष्टदायी मौत मारा गया .
यदि धूर्तता सीखना हो तो रसूल से सीखो 


http://www.answering-islam.org/Silas/rf1_mhd_wealth.htm

रविवार, 9 दिसंबर 2012

भाईचारा या सेकुलर खुजली ?


आपसी भाईचारा , मित्रता और दोस्ती समाज को संगठित और सशक्त करने के लिए जरूरी है . इस बात से कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति इन्कार नहीं करेगा .लेकिन यह भी सत्य है कि मित्रता और दोस्ती दौनों तरफ से होना चाहिए . किसी से दोस्ती करते समय हमें महर्षि दयानन्द के बताये इस नियम का पालन करना चाहिए " सबसे प्रेमपूर्वक ,धर्मानुसार और जैसे को तैसा " व्यवहार करना चाहिए .परन्तु हमें यह देखकर आश्चर्य होता है कि इस्लामी इतिहास को जानते हुए कुछ सेकुलरों को हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की खुजली इतनी बढ़ गयी है ,कि क्रिकेट के माध्यम से भारत पकिस्तान की दोस्ती के सपने देख रहे हैं .इनका बस चले तो जैसे राजा मानसिंह ने मुगलों से दोस्ती बढ़ने के लिए अपनी बहिन अकबर को दे दी थी . वैसे ही यह सेकुलर अपनी बहिने पाकिस्तान व्याह देंगे .फिर भी उनके साथ वैसा ही धोखा होगा जैसा औरंगजेब ने शिवाजी से किया था .हमें यह लेख लिखने की प्रेरणा " आजतक टी वी "प्रोगराम एजेंडा आजतक 2012 से मिली , जो दिनांक 6 दिसंबर 2012 को प्रसारित हुआ . इसमे पत्रकार "राहुल कँवल " ने पाकिस्तान इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष से इस्लामी आतंक के बारे में सवाल किये थे . और इमरान ने स्वीकार किया कि जिहाद ही आतंकवाद है .बड़े दुःख की बात है कि आमिर खान जैसा दोगला चुप बैठा , रहा और अपनी फिल्मों की बातें करता रहा  उस विडियो का एक भाग -.देखिये
Imran Khan - Special Interview by Rahul Kanwal - Aaj Tak( 6 December 2012)


http://www.youtube.com/watch?v=zLP49icD2qg

संयोग की बात है कि उसी दिन भोपाल में मुसलमान विरोध दिवस मना रहे थे . मुझे मेरे एक मित्र ने एक फतवा दिखाया , जिसमें काफिरों से दोस्ती करने को गुनाह बताया गया है .यहाँ पर उस फतवे के मुख्य भाग ज्यों के त्यों दिए जा रहे हैं .ताकि सेकुलर खुजली का इलाज हो सके
.
1-गैर मुस्लिमों से दोस्ती का क्या मतलब ?
क़ुर्आन में वर्णित है कि हमारे लिए काफिरों (नास्तिकों, अविश्वासियों, अधर्मियों, अनेकेश्वरवादियों) को दोस्त बनाना जाइज़ नहीं है, परंतु इसका अभिप्राय क्या है . मेरा मतलब यह है कि किस हद तक यह जाइज़ है ?क्या हमारे लिए उनके साथ मामला करना जाइज़ है ? मैं पढ़ता हूं, तो क्या हमारे लिए उनके साथ बास्केट बॉल खेलना जाइज़ है ? क्या हम उनके साथ बास्केटबॉल आदि के बारे में बात कर सकते हैं ? क्या हम उनकी संगत अपना सकते हैं जबकि वे अपने आस्था के मामलों को अपने तक ही रखते हैं .
मैं इसके बारे में इसलिए प्रश्न कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक व्यक्ति को जानता हूँ जो इसी तरह उनके साथ रहता है और उसका उनके साथ रहना उसके आस्था पर कोई प्रभाव नहीं डालता है, लेकिन इसके बावजूद मैं उस से कहता हूँ : तुम इन लोगों के बजाय मुसलमानों के साथ क्यों नहीं रहते हो  और वह यह जवाब देता है कि : अधिकांश - या कई एक - मुसलमान अपने एकत्र होने के स्थान में शराब पीते हैं और नशीले पदार्थ सेवन करते हैं, तथा उनके साथ गर्लफ्रेंड होती हैं, और वह इस बात से डरता है कि इन मुसलमानों के पाप उसे लुभा सकते हैं, किंतु उसे विश्वास है कि काफिरों का कुफ्र उसे कदापि प्रलोभित नहीं कर सकता है, क्योंकि वह एक ऐसी चीज़ है जो उसके लिए प्रलोभित करने वाली – आकर्षक - नहीं है, तो क्या उसका काफिरों के साथ रहना, खेलना, और खेल के बारे में बात चीत करना , काफिरों को दोस्त बनाने में शुमार होगा. 
हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह के लिए योग्य है।अल्लाह तआला ने मोमिनों  पर काफिरों –अविश्वासियों - को दोस्त बनाना निषेद्ध कर दिया है और इस पर बहुत सख्त धमकी दी है

2-अल्लाह की धमकी 
अल्लाह तआला ने फरमाया :

﴿يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لا تَتَّخِذُوا الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى أَوْلِيَاءَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ وَمَنْ يَتَوَلَّهُمْ مِنْكُمْ فَإِنَّهُ مِنْهُمْ إِنَّ اللَّهَ لا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ ﴾ [المائدة : 51]. 

“ऐ विश्वासियो (ईमानवालो !), तुम यहूदियों और ईसाईयों को दोस्त न बनाओ, यह तो आपस में एक दूसरे के दोस्त हैं, तुम में से जो कोई भी इनसे दोस्ती करे तो वह उन्हीं में से है, अल्लाह तआला ज़ालिमों को कभी हिदायत नहीं देता।
 सूरतुल माइदा-5 : 51).
कुरान में गैर मुस्लिमों , से मित्रता करने को अनेकों बार निषिद्ध किया है , जैसे इस आयत में अल्लाह तआला ने उल्लेख किया है कि मुसलमानों में से जो व्यक्ति यहूदियों और ईसाईयों से दोस्ती करेगा, वह उन्हें दोस्त बनाने के कारण उन्हीं में से हो जायेगा। तथा एक अन्य स्थान पर वर्णन किया है कि उनसे दोस्ती रखना अल्लाह की अप्रसन्नता (क्रोध) और उसके प्रकोप में अनंत के लिए रहने का कारण है, और यह कि यदि उनको दोस्त बनाने वाला मुसलमान होता तो उन्हें दोस्त न बनाता, और वह अल्लाह तआला का यह फरमान हैः

﴿تَرَى كَثِيرًا مِنْهُمْ يَتَوَلَّوْنَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَبِئْسَ مَا قَدَّمَتْ لَهُمْ أَنفُسُهُمْ أَنْ سَخِطَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَفِي الْعَذَابِ هُمْ خَالِدُونَ  وَلَوْ كَانُوا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالنَّبِيِّ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مَا اتَّخَذُوهُمْ أَوْلِيَاءَ وَلَكِنَّ كَثِيرًا مِنْهُمْ فَاسِقُونَ﴾ [المائدة: 80-81]

“आप उनमें से अघिकांश लोगों को देखेंगे कि वे काफिरों से दोस्ती करते हैं, जो कुछ उन्हों ने अपने आगे भेज रखा है वह बहुत बुरा है, (यह) कि अल्लाह (तआला) उन से नाराज़ हुआ और वे हमेशा अज़ाब में रहेंगे। अगर वे अल्लाह पर, पैगंबर और जो उनकी तरफ उतारा गया है, उस पर ईमान रखते तो वे काफिरों को दोस्त न बनाते, परंतु उन में से अधिकांश लोग दुराचारी हैं।
 सूरतुल माइदा-5 : 80, 81).
तथा एक अन्य स्थान पर, उनसे घृणित करने के कारण को स्पष्ट करते हुए, उन्हें दोस्त बनाने से मना किया है, और वह अल्लाह तआला का यह फरमान है :
﴿ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لا تَتَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ قَدْ يَئِسُوا مِنْ الآخِرَةِ كَمَا يَئِسَ الْكُفَّارُ مِنْ أَصْحَابِ الْقُبُورِ ﴾ [الممتحنة : 13].

“ऐ विश्वासियो (मुसलमानो), तुम उस क़ौम से दोस्ती न करो, जिन पर अल्लाह का क्रोध (प्रकोप) आ चुका है, जो आखिरत से इस तरह निराश हो चुके हैं जैसेकि मरे हुए क़ब्र वालों से काफिर मायूस हो चुके हैं। 
सूरतुल मुमतहिना-60 : 13).

तथा एक दूसरे स्थान पर इस बात को स्पष्ट किया है कि इस (निषेद्ध) का स्थान यह है कि जब दोस्ती रखना किसी डर और बचाव के कारण न हो, और यदि वह दोस्ती इसी के कारण है तो ऐसा करने वाला व्यक्ति माज़ूर (क्षम्य) है, और वह अल्लाह तआला का यह फरमान है :

﴿ لا يَتَّخِذْ الْمُؤْمِنُونَ الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ وَمَنْ يَفْعَلْ ذَلِكَ فَلَيْسَ مِنْ اللَّهِ فِي شَيْءٍ إِلا أَنْ تَتَّقُوا مِنْهُمْ  تُقَاةً ﴾ [آل عمران3: 28].

“मोमिनों को चाहिए कि ईमानवालों को छोड़कर काफिरों को अपना दोस्त न बनायें, और जो ऐसा करेगा तो अल्लाह तआसा से उसका कोई संबंध नहीं है (अल्लाह से बेज़ार है), सिवाय इसके कि तुम उनके डर से किसी तरह की हिफाज़त का इरादा करो। 
सूरत आल इमरान 3:28
इस आयत में उन सभी आयतों का स्पष्टीकरण है जो काफिरों से सामान्य रूप से दोस्ती से मना करने वाली हैं कि : इसका स्थान चयन (और स्वेच्छा) की स्थिति में है, लेकिन भय और तक़िय्या (वचाव व सावधानी) की हालत में उनसे दोस्ती रखने की छूट दी गई है केवल इतनी मात्रा में जिसके द्वारा उनकी बुराई से बचा जा सके, तथा इसके अंदर उस दोस्ती से दिल का पवित्र और साफ होना आवश्यक है, और जो व्यक्ति किसी चीज़ को मजबूरी में करता है वह उस आदमी के समान नहीं है जो उसे अपने चुनाव से करता है।

और इन आयतों के प्रत्यक्ष अर्थ से यह समझ में आता है कि जिस व्यक्ति ने काफिरों से जानबूझकर इच्छापूर्वक और उनके अंदर अभिरूचि रखते हुए दोस्ती की तो वह उन्हीं के समान काफिर समझा जाएगा -अज़वाउल बयान“ (2 /98, 99)

तथा काफिरों से दोस्ती रखने के निषिद्ध (हराम) रूपों में से : उन्हें मित्र और संगी बनाना, उनके साथ खाना और खेलना भी है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि मुसलमान पर अनिवार्य है कि वह अल्लाह के दुश्मनों से द्वेष रखे और उनसे अलगाव प्रकट करे ; क्योंकि यही पैगंबरों और उनके अनुयायियों का तरीक़ा है, अल्लाह तआला ने फरमाया :

﴿ قَدْ كَانَتْ لَكُمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ فِي إِبْرَاهِيمَ وَالَّذِينَ مَعَهُ إِذْ قَالُوا لِقَوْمِهِمْ إِنَّا بُرَآءُ مِنْكُمْ وَمِمَّا تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ كَفَرْنَا بِكُمْ وَبَدَا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةُ وَالْبَغْضَاءُ أَبَداً حَتَّى تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَحْدَهُ﴾ [الممتحنة60:4

मुसलमानो!) तुम्हारे लिए इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों में बहुत अच्छा आदर्श (नमूना) है, जबकि उन सब ने अपनी क़ौम से साफ शब्दों में कह दिया कि हम तुम से और जिन-जिन कि तुम अल्लाह के सिवाय पूजा करते हो, उन सबसे पूरी तरह से विमुख (बरी) हैं। हम तुम्हारे (अक़ीदे का) इंकार करते हैं," और जबक तुम अल्लाह के एक होने पर ईमान न लाओ हमारे और तुम्हारे बीच हमेशा के लिए बैर और द्वेष "हमेशा बना रहेगा "(
सूरतुल मुमतहिना -60:4
3-अल्लाह का हुक्म 
 तथा अल्लाह तआला ने हुक्म दिया है

﴿ لا تَجِدُ قَوْماً يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الآخِرِ يُوَادُّونَ مَنْ حَادَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَوْ كَانُوا آبَاءَهُمْ أَوْ أَبْنَاءَهُمْ أَوْ إِخْوَانَهُمْ أَوْ عَشِيرَتَهُمْ أُولَئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ الأِيمَانَ وَأَيَّدَهُمْ بِرُوحٍ مِنْهُ ﴾ [المجادلة58:22]

“आप अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखने वालों को ऐसा नहीं पाएंगे कि वह अल्लाह और उसके पैग़ंबर से दुश्मनी रखने वालों से दोस्ती रखते हों, चाहे वे उनके बाप, या उनके बेटे, या उनके भाई, या कुंबे - क़बीले वाले ही क्यों न हों, यही लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह तआला ने ईमान को लिख दिया है और जिनका पक्ष अपनी रूह से किया है।
 सूरतुल मुजादिला-58:22
इस आधार पर मुसलमान के लिए जाइज़ नहीं है कि उसके दिल में अल्लाह के दुश्मनों के लिए स्नेह और प्यार पैदा हो जो वास्तव में  ही दुश्मन हैं,
4-अल्लाह का फरमान 
अल्लाह तआला ने फरमाया 
"
﴿ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِمْ بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا بِمَا جَاءَكُمْ مِنَ  الْحَقِّ يُخْرِجُونَ الرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ أَنْ تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ رَبِّكُمْ ﴾ [الممتحنة : 1]

“ऐ ईमान वालो ! मेरे और अपने दुश्मनों को अपना दोस्त न बनाओ, तुम तो दोस्ती से उनकी ओर संदेश भेजते हो और वे उस सच को जो तुम्हारे पास आ चुका है इंकार करते हैं, वे पैगंबर को और स्वयं तुम को भी केवल इस वजह से निकालते हैं कि तुम अपने रब अल्लाह पर ईमान रखते हो।” 
सूरतुल मुमतहिना -60:1
लेकिन जहाँ तक उसका काफिरों के साथ मेल मिलाप रखने का मामला है, तो काफिरों के साथ मेल मिलाप रखने से निषेद्ध का कारण केवल कुफ्र में पड़ने का भय है, बल्कि इस प्रावधान के सबसे स्पष्ट कारणों में से : उनका अल्लाह, उसके पैगंबर और मोमिनों से दुश्मनी रखना है, अल्लाह तआला ने इस कारण की ओर अपने इस कथन के द्वारा संकेत किया है :

तो एक मुसलमान को यह कैसे शोभा देता है कि वह अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मन के साथ रहे और उससे दोस्ती रखे !
5-पाठकों से सवाल 
हमें पूरा विश्वास है कि इस फतवे दिए गए अल्लाह के आदेशों से मुसलमानों के विचार और नीयत के बारे में सबको सही जानकारी मिल गयी होगी . और उन सेकुलरों की हिन्दू मुस्लिम भाईचारे करने की खुजली मिट गयी होगी .हम भी दोस्ती और मित्रता के समर्थक हैं . लेकिन जब खुद अल्लाह ही मुसलमानों को गैर मुस्लिमों से नफ़रत करने का आदेश दे रहा है , तो भाड़ में जाए ऐसी दोस्ती , हम भले शैतान से दोस्ती कर लेंगे ,परन्तु कभी मुसलमान से न तो दोस्ती करेंगे और न उनकी बातों पर विश्वास करेंगे .
बताइए क्या आप फिर भी हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की वकालत करेंगे ?

http://islamqa.com/en/ref/5

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

कुरान की प्रेरणा बाइबिल से ली गयी !


मुस्लिम विद्वान् कहते हैं कि कुरान अल्लाह की किताब है ,जो अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद के ऊपर नाजिल कि थी .लेकिन यदि हम कुरान और बाइबिल की शिक्षा और कहानियों को ध्यान से पढ़ें तो उनमे काफी समानता मिलती है .इस बात को सभी मानते हैं कि बाइबिल कुरान से काफी पुरानी है .बाइबिल के दो भाग हैं , पुराना नियम और नया नियम .पुराने नियम को यहूदी "तनख " कहते हैं ,इसमे 39 किताबें शामिल हैं .पुराना नियम करीब 535 ई .पू में सकलित हो चूका था .और नए नियम में 27 किताबें शामिल हैं ,जो सन 66 संकलित हो चुकी थी .और यूरोप के अलावा अरब में भी प्रचलित थीं .इस्लाम के अनुसार पुराने नियम में तौरेत और जबूर आती हैं ,और नए नियम को इंजील कहा जाता है .अरब के लोग इन किताबों से अच्छी तरह परिचित थे .कुरान की पहली आयत सन 610 में उतरी थी ,और मुहम्मद की मौत सन 632 तक कुरान की आयतें उतरती ( बनती )रहीं .जिनका सन 644 में खलीफा उस्मान बिन अफ्फान ने संकलन किया था .
आज की कुरान में कोई मौलिकता (Originality ) नहीं दिखाई देती है ,सब बाइबिल से ली गयी हैं .यद्यपि किसी भाषा के टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ज्यों का त्यों अनुवाद करना असंभव होता है ,लेकिन उनके भावार्थ में समानता दिखाई मिल जाती है . यही बात कुरान और बाइबिल के बारे में लागु होती है .दौनों के विचारों में असाधारण समानता से सिद्ध होता है ,कि मुहम्मद ने कुरान की रचना बाइबिल से प्रेरणा लेकर की थी .सिफ कुछ थोड़ी सी बातें ऐसी थी ,जो मुहम्मद ,और अरब लोगों से सम्बंधित है .यहाँ पर कुछ उदहारण दिए जा रहे हैं ,जिन से पता चलता है कुरान ऊपर से नहीं उतरी ,बल्कि नीचे ही बैठकर बाइबिल से मसाला लेकर मुहम्मद ने बनायीं थी .देखिये 

1-औरतों का हिस्सा पुरुषों से आधा होगा 
कुरान -"एक पुरुष का हिस्सा दो औरतों के हिस्से के बराबर होगा "सूरा -निसा 4 :11
बाइबिल -यदि उनकी आयु 20 साल से अधि हो तो ,पुरुषों के लिए 20 शेकेल और औरतों के लिए 10 शेकेल ठहराए जाएँ " लैव्य व्यवस्था .27 :5
2-माहवारी के समय औरतों से दूर रहो 
कुरान -"वह औरतों की माहवारी के बारे में पूछते हैं ,तो कह दो यह तो नापाकी है ,तो औरतों की माहवारी के समय उनसे अलग रहो "
सूरा -बकरा 2 :222
बाइबिल -"जब कोई स्त्री ऋतुमती हो ,तो वह सात दिनों तक अशुद्ध मानी जाये .और जो कोई भी उसे छुए वह भी अशुद्ध माना जाये "
लैव्य व्यवस्था -15 :19
3-औरतें खुद को छुपा कर रखें 
कुरान -"हे नबी ईमान वाली औरतों से कहदो कि जब वह घर से बहार निकलें तो ,अपने ऊपर चादर के पल्लू लटका लिया करें "
सूरा -अहजाब 33 :59
बाइबिल -स्त्री के लिए उचित है कि वह आधीनता का चिन्ह ओढ़नी अपने सर पर रख कर बाहर निकलें " 1 कुरिन्थियों 11 :11
4-अल्लाह गुमराह करता है 
कुरान -शैतान ने कहा ,हे रब जैसा तूने मुझे बहकाया है ,उसी तरह में छल करके लोगों को बहकाऊँगा " सूरा -अल हिज्र 15 :39
"उन लोगों के दिलों में बीमारी थी ,अल्लाह ने उनकी बीमारी और बढा दी "सूरा -बकरा 2 :10
बाइबिल -फिर खुदा ने उनकी आँखें अंधी और दिल कठोर बना दिए ,जिस से वह न तो आँखों से देख सकें और न मन से कुछ समझ सकें "
यूहन्ना -12 :40
"यदि हमारी बुद्धि पर परदा पड़ा हुआ है ,तो यह खुदा के कारण ही है .और संसार के ईश्वर ने लोगों की बुद्धि को अँधा कर दिया है "
2 कुरिन्थियों 4 : 3 -4
5 -विधर्मियों को क़त्ल कर दो 
कुरान -"और उनको जहाँ पाओ क़त्ल कर दो और घरों से निकाल दो "सूरा -बकरा 2 :191
"काफिरों को जहाँ पाओ ,पकड़ो और उनका वध कर दो "सूरा -निसा 4 :89
"मुशरिकों को जहाँ पाओ क़त्ल कर दो ,उन्हें पकड़ो ,उन्हें घेरो ,उनकी जगह में घात लगा कर बैठे रहो "
सूरा -तौबा 9 :5
बाइबिल -"अगर पृथ्वी के एक छोर से दूरारे छोर तक दूसरे देवताओं के मानने वाले हो ,तो भी उनकी बात नहीं मानो,और न उनपर तरस खाना .न उन पर दया दिखाना .औं न उनको शरण देना .बल्कि उनकी खोज करके उनकी घात अवश्य करना .और उनका पता करके उनका तलवार से वध कर देना "
व्यवस्था विवरण -13 :6 से 13
"जोभी यहोवा की शरण को स्वीकार नहीं करें ,उनको क़त्ल कर दो ,चाहे उनकी संख्या कम हो ,या अधिक .और चाहे वह पुरुष हों अथवा स्त्रियाँ हों " 2 इतिहास 15 :13
6-विधर्मी नरक में जलेंगे 
कुरान -मुनाफिकों का ठिकाना जहन्नम है ,और वह बुरा ठिकाना है "सूरा -तौबा 9 :73
"काफिरों और मुनाफिकों ठिकाना जहन्नम है ,जहाँ वह पहुँच जायेंगे " सूरा -अत तहरीम 66 :9
बाइबिल -जो पुत्र को नहीं मानता,उस पर परमेश्वर का क्रोध बना रहेगा " यूहन्ना 3 :37
"फिर उन लोगों से कहा जायेगा ,हे श्रापित लोगो हमारे सामने से निकलो ,और इस अनंत आग में प्रवेश करो ,जो शैतान और उसके साथियों के लिए तय्यार की गयी है " मत्ती -25 :41
7-विधर्मियों से दोस्ती नहीं करो 
कुरान -ईमान वालों को चाहिए कि वे काफिरों को अपना संरक्षक और मित्र न बनायें ,और जो ऐसा करता है उसका अल्लाह से कोई नाता नहीं रहेगा "
 सूरा -आले इमरान 3 :28
बाइबिल -अविश्वासियों के साथ बराबर का व्यवहार नहीं करो ,इसलिए यातो तुम उनके बीच से निकलो ,या उनको अपने बीच से निकाल डालो .अन्धकार और ज्योति का क्या सम्बन्ध है ." 2 कुरिन्थियों 6 :14 से 17

8-कलमा की प्रेरणा भी बाइबिल से 
मुसलमानों का मूलमंत्र या कलमा दो भागों से बना हुआ है जो इस प्रकार है" لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِؕ "
 "ला इलाह इल्लल्लाह -मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह "अर्थात नहीं हैं कोई इलाह मगर अल्लाह ,और मुहम्मद अल्लाह का रसूल है .कलामे दूसरा भाग मुहम्मद ने खुद जोड़ लिया था .जबकि पहला भाग बाइबिल में काफी पहले से मौजूद था .यहाँ पर मूल हिब्रू के साथ अरबी और अंगरेजी भी दिए जा रहे हैं .
Hear, O Israel,  the LORD our God— the LORD is ONE  -Deuteronium 6:4
"اسمع يا إسرائيل ، الرب إلهنا، رب واحد "
""शेमा इस्रायेल यहोवा इलोहेनु अदोनाय इहद "
"שְׁמַע, יִשְׂרָאֵל: יְהוָה אֱלֹהֵינוּ, יְהוָה אֶחָד "

He is the God , and there is no other god beside him.
"" हू एलोहीम व् लो इलोही लिदो "
"انه هو الله ، وليس هناك إله غيره بجانبه."
הוא האלוהים של כל בשר, ואין אלוהים לידו 
http://www.nabion.org/html/the_shema

इन सभी प्रमाणों से साफ सिद्ध हो जाता है कि मुहम्मद को कुरान बनाने कि प्रेरणा बाइबिल से मिली थी .बाकि बातें उसने अपनी तरफ से जोड़ दी थीं .क्योंकि दौनों में एक जैसी बातें दी गयी हैं .केवल इतना अंतर है कि यहूदी ऐसी अमानवीय बातों पर न तो अमल करते हैं और न दूसरों को मानने पर मजबूर करते हैं .इन थोड़े से यहूदियों ने हजारों अविष्कार किये है ,जिन से विश्व के सभी लोगों को लाभ हो रहा है .लेकिन दूसरी तरफ इतने मुसलमान हैं ,जो कुरान की इसी शिक्षा का पालन करते हुए विश्व का नाश करने पर तुले हुए है .इसी तरह मुट्ठी बार पारसियों ने देश की उन्नति के लिए जो किया है उसे सब जानते हैं .
अगर मुहम्मद बाइबिल की बुरी बातें छोड़ कर अच्छी बातें कुरान में लिख देता तो विश्व में सचमुच का इस्लाम हो जाता .
नक़ल के साथ अकल होना भी जरुरी होता है .नकलची कभी रसूल नहीं हो सकता .

http://dwindlinginunbelief.blogspot.com/search/label/The%20Bible%20and%20the%20Quran%20agree

रविवार, 2 दिसंबर 2012

नास्तिक कैसे होते हैं ?


सामान्यतः जो व्यक्ति ईश्वर , परलोक ,और कर्म फल के नियम पर विश्वास नहीं करता उसे नास्तिक कहा जाता .चूँकि बौद्ध और जैन ईश्वर को नहीं मानते इसलिए अज्ञानवश हिन्दू उनको नास्तिक कह देते हैं .यद्यपि बौद्ध और जैन कर्म के सिद्धांत को मानते हैं .और पाप पुण्य पर विश्वास करते हैं .लेकिन जो लोग निरंकुश होकर सिर्फ भौतिकतावाद और अपना सुख और स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं , वास्तव में वही नास्तिक होते हैं .ऐसे लोगों मान्यता एक प्रसिद्द कहावत से समझी जा सकती है ,
" लूटो खाओ मस्ती में , आग लगे बस्ती में "
ऐसे लोग सभी मर्यादाएं , परंपरा ,नियम और लोक लज्जा की परवाह नहीं करते .भले देश और समाज बर्बाद हो जाये .भगवान बुद्ध और महावीर के समय ऐसे ही विचार रखने वाला एक व्यक्ति चार्वाक था , जिसके लाखों अनुयायी हो गए थे , उसके विचारों को ही चार्वाक दर्शन कहा जाता है .
1-चार्वाक दर्शन
चार्वाक दर्शन एक भौतिकवादी नास्तिक दर्शन है। यह मात्र प्रत्यक्ष प्रमाण को मानता है तथा पारलौकिक सत्ताओं को यह सिद्धांत स्वीकार नहीं करता है। यह दर्शन वेदबाह्य भी कहा जाता है।
वेदवाह्य दर्शन छ: हैं- चार्वाक, माध्यमिक, योगाचार, सौत्रान्तिक, वैभाषिक, और आर्हत। इन सभी में वेद से असम्मत सिद्धान्तों का प्रतिपादन है।
चार्वाक प्राचीन भारत के एक अनीश्वरवादी और नास्तिक तार्किक थे। ये नास्तिक मत के प्रवर्तक वृहस्पति के शिष्य माने जाते हैं। बृहस्पति और चार्वाक कब हुए इसका कुछ भी पता नहीं है। बृहस्पति को चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र ग्रन्थ में अर्थशास्त्र में भी उल्लेख किया है ."सर्वदर्शनसंग्रह "में चार्वाक का मत दिया हुआ मिलता है  पद्मपुराण में लिखा है कि असुरों को बहकाने के लिये बृहस्पति ने वेदविरुद्ध मत प्रकट किया था
2-भोगवाद ही नास्तिकता है 
भोगवाद ,चरम स्वार्थपरायण मानसिकता और अय्याशी ही नास्तिक होने की निशानी है , चाहे ऐसे व्यक्ति किसी भी धर्म से सम्बंधित हों .चार्वाक की उस समय कही गयी बातें आजकल के लोगों पर सटीक बैठती हैं ,चार्वाक ने कहा था ,
न स्वर्गो नापवर्गो वा नैवात्मा पार्लौकिकः 
नैव वर्नाश्रमादीनाम क्रियश्चफल्देयिका .
अर्थ -न कोई स्वर्ग है ,न उस् जैसा लोक है .और न आत्मा ही पारलौकिक वस्तु है .और अपने किये गए सभी भले बुरे कर्मों का भी कोई फल नहीं मिलता अर्थात सभी बेकार हो जाते हैं .
यावत् जीवेत सुखं जीवेत ऋणं कृत्वा घृतं पीबेत 
भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः .
अर्थात-जब तक जियो मौज से जियो और कर्ज लेकर घी पियो मतलब मौज मस्ती करो
कैसी चिंता, शरीर के भस्म हो जाने के बाद फिर वह वापस थोड़े ही आती है।
"पीत्वा पीत्वा पुनः पीत्वा यावतपतति भूतले , पुनरुथ्याय वै पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते .
अर्थ -पियो ,पियो खूब शराब पियो ,यहाँ तक कि लुढ़क कर जमीन पर गिर जाओ . और होश में आकर फिर से पियों .क्योंकि फिरसे जन्म नही होने वाला .
वेद शाश्त्र पुराणानि सामान्य गाणिका इव, मातृयोनि परित्यज विहरेत सर्व योनिषु .
अर्थ -वेद , और सभी शास्त्र और पुराण तो वेश्या की तरह हैं .तुम सिर्फ अपनी माँ को छोड़कर सभी के साथ सहवास कर सकते हो .
3-यूनानी नास्तिक 
भारत की तरह यूनान (Greece ) भी एक प्राचीन देश है ,और वहां की संस्कृति भी काफी समृद्ध थी .वहां भी नास्तिक लोगों का एक बहुत बड़ा समुदाय था .जिसे एपिक्युरियनिस्म (Epicureanism)कहा जाता है .जिसे ईसा पूर्व 307 में एपिक्युरस (Epicurus)नामके एक व्यक्ति ने स्थापित किया था .ग्रीक भाषा में ऐसे विचार को "एटारेक्सिया (Ataraxia Aταραξία )भी कहा जाता है .इसका अर्थ उन्माद , मस्ती ,मुक्त होता है .इस दर्शन (Philosophy ) का उद्देश्य मनुष्य को हर प्रकार के नियमों , मर्यादाओं .और सामाजिक . कानूनी बंधनों से मुक्त कराना था .ऐसे लोग उन सभी रिश्ते की महिलाओं से सहवास करते थे . जिनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाना पाप और अपराध समझा जाता था .
ऐसे लोग जीवन को क्षणभंगुर मानते थे .और मानते थे कि जब तक दम में दम है हर प्रकार का सुख भोगते रहो .क्योंकि फिर मौका नहीं मिलेगा .जब इन लोगों को स्वादिष्ट भोजन मिल जाता था तो यह लोग इतना खा लेते थे कि इनके पेट में साँस लेने की जगह भी नहीं रहती थी . तब यह लोग उलटी करके पेट खाली कर लेते थे .स्वाद लेने के लिए फिर से खाने लगते थे .
4-असली नास्तिक सेकुलर 
सेकुलर प्राणियों की एक ऐसी प्रजाति है ,अनेकों प्राणियों गुण पाए जाते हैं .गिरगिट की तरह रंग बदलना , लोमड़ी की तरह मक्कारी ,कुत्तों की तरह अपने ही लोगों पर भोंकना ,अजगर की तरह दूसरों का माल हड़प कर लेना .और सांप की तरह धोके से डस लेना .इसलिए ऐसे प्राणी को मनुष्य समझना बड़ी भारी भूल होगी . ऐसे लोग पाखंड और ढोंग के साक्षात अवतार होते हैं .दिखावे के लिए ऐसे लोग सभी धर्मों को मानने का नाटक करते हैं, लेकिन वास्तव में इनको धर्म या ईश्वर से कोई मतलब नहीं होता . अपने स्वार्थ के लिए यह लोग ईश्वर को भी बेच सकते हैं .ना यह किसी को अपना सगा मानते है .और न कोई बुद्धिमान इनको अपना सगा मानने की भूल करे .
वास्तव में आजकल के सेकुलर ही नास्तिक हैं .बौद्ध और जैन नहीं .मुलायम सिंह , लालू प्रसाद ,दिग्विजय सिंह ,और अधिकांश कांगरेसी सेकुलर- नास्तिक है .

http://en.wikipedia.org/wiki/C%C4%81rv%C4%81ka

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

खतना कराना शैतान की चाल है !


वैसे तो सभी मुसलमान मानते हैंकि इंसान को अल्लाह ने बनाया है.और उसका अकार,रूप संतुलित और ठीकठाक बनाया है .उसे किसी तरह की कमी नहीं रखी.और यह भी दावा करते हैं कि अल्लाह ने कुरआन में सारी बातें खोल खोल कर साफ़ बता दी हैं.लेकिन जब उनसे खतना के बारे में पूछा जाता है ,तो वे बेकार के बहाने करने लगते हैं.एक व्यक्ति ने जब इसके बारे में सवाल किया तो इम्पेक्ट उर्फ़ सलीम ने कहा कि अप फल को छीलकर क्यों खाते हैं.हमने कहा अगर अल्लाह को छिला हुआ फल पसंद है तो फल का नाम भी बता देते ?लेकिन मेरा मुसलमानों से सवाल है कि वे एक भी आयत बताएं जिसमे खतना का हुक्म हो .या वे बता दें कि मुहम्मद ने कब खतना कराई थी ?.,इसकी कोई हदीस बता दें?
 अब हम मुख्य विषय पर आते हैं कि यह अल्लाह का हुक्म नहीं !!

1 -अल्लाह ने इंसान को उचित रूप में बनाया 
"हमने तुम्हें बनाया तो ,ठीक अनुपात और आकार में बनाया और इस प्रकार की रचना बनाई जैसी होना चाहिए .सूरा अल इनफितार 82 :7 -8 
"तुम क्यों नहीं मानते कि हमने ही तुम्हें पैदा किया और तुम्हारा आकार देने वाले हम हैं ,या तुम आकार देने वाले हो .सूरा अल वाकिया -56 :57 
"हमने तुम्हारा अकार बनाया और अच्छा आकार बनाया .सूरा अल मोमिनीन -40 :64 
"अल्लाह ने जो भी चीज बनाई व्यर्थ नहीं बनाई .सुरा आले इमरान -3 :191 
"हमने इन्सान को अच्छे से अच्छी स्थिति में बनाया .सूरा अत तीन -95 :3 

2 -अल्लाह के दिए आकार को बदलना शैतान की चाल है -

"शैतान ने अल्लाह से कहा ,मैं तेरे बन्दों को बहकाऊँगा ,उनको वासना के मायाजाल में फंसऊँगा ,फिर वे अपने चौपायों के कान फडवाएंगे और अलाह की रचना में बदलाव करेंगे ,और पशुओं को देवताओं के नाम छोड़ देंगे ,ऐसा करने वाले शैतान के मित्र हैं "सूरा अन निसा -4 :119 

इस आयत की तफ़सीर में "अल्लाह की रचना "में बदलाव का उदहारण दिया गया है जैसे -नसबंदी करना .किसी को बाँझ करना ,परिवार नियोजन करना ,आजीवन ब्रह्मचारी रहना ,और किसी को हिजड़ा बनाना है .इसी आयत कि बदौलत मुसलमान परिवार नियोजन नहीं करते हैं .इसे गुनाह मानते है .

3 -खतना कराना यहूदिओं की नक़ल है -

वैसे तो मुसलमान यहूदिओं को रोज गालियाँ देते हैं .लेकिन उनकी नक़ल करके छोटे छोटे बच्चों की खतना कर देते है .जब वह नादान होते है .कुरआन में ऐसा कोई आदेश नहीं है ,यह बाईबिल का आदेश है -
" खुदा ने कहा तू और तेरे बाद तेरे वंशज पीढी दर पीढी हरेक बच्चे का खतना कराये,और उनके लिंग की खलाड़ी काट दे   जो तेरे   में पैदा हो या जिसे मोल से खरीदा हो सबका खतना कर 
"बाइबिल -उत्पत्ति अध्याय -17 :9 से 14 

 4 -मूसा और उसके पुत्रों का खतना नहीं हुआ 

" मिस्र निकालने बाद जितने लोग पैदा हुए किसी का खतना नहीं हुआ -यहोशु-5 :5 
"अपना नहीं बल्कि अपने ह्रदय का खतना करो "बाइबिल व्यवस्था -10 :16 

यहाँ तक तो लड़कों के खतना की बात है .लेकिन मुहम्मद ने अल्लाह से आगे बढ़ कर औरतों के खतना का हुक्म दे डाला

5 -औरतों का खतना -female genital mutilation 

यह मुहमद के दिमाग की खुराफात है .इसका कुरान में कोई जिक्र नहीं है चूँकि यहूदी लड़कों का खतना करते थे मुहम्मद उसका उलटा करा चाहता था .उसे यहूदिओं से नफ़रत थी .उसने कहा -
"रसूल ने कहा कि काफिर और यहूदी जैसा करते हैं ,उम उसका उलटा करो .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 780 

एक दिन मदीना में उम्मे अत्तिया लड़किओं की खतना करने जा रही थी ,मुहम्मद ने उस से कहा कि लड़की की योनी को गहराई से मत छीलो .ऐसा न हो कि वह उसके पति को अच्छी न लगे -अबू दाऊद-किताब 41 हदीस 5149 ,5151 और 5152 

"रसूल ने कहा कि लड़किओं की सिर्फ भगनासा clitoris और आस पास के भागोस्ष्ठ छील दो बुखारी जिल्द 7 किताब 72 हदीस 779 

6 -महिला खतना में क्या होता है 

भगनासा को बिलकुल निकाल देना -removal clitoris भगोष्ठ को छील देना या काट देना trimming of labia majora .और cutting 

महिला खतना अरब में अधिक है .लेकिन भारत के मुसलमान भी अपनी औरतो की खतना इस लिए करा देते है कि उनकी औरतें किसी गैर मुस्लिम के साथ न भाग जाए ,क्योंकि सिर्फ मुस्लिम ही ऎसी बर्बाद और बिद्रूप औरत को रख सकता है.
( नोट -यह लेख भंडाफोडू ब्लॉग में 30 अगस्त 2010 को प्रकाशित हुआ था . जिसमे हमने जब सलीम नामके जकरिया समर्थक से खतना के बारे में कुरान का आदेश पूछा था तो उसे सांप सूँघ गया था ,इसलिए यह लेख फिर से प्रकाशित किया है . ताकि लोग मुल्लों की असलियत समझ सकें .और जो लोग कुरान के आदेश के बिना खतना करते हैं उन्हें काफिर क्यों नहीं माना जाये )

http://sheikyermami.com/2009/09/30/are-you-a-sponsor-of-female-genital-mutilation/