बुधवार, 25 जुलाई 2012

इस्लाम ईमान या घोर अज्ञान !


इस्लाम का अर्थ शांति है ,इसलिए इस्लाम दुनियां में शांति फैलाना चाहता है .और शांति के द्वारा विश्व के सभी मनुष्यों में एकता और भाईचारा स्थापित करना चाहता है .लेकिन यह सारी बातें सरासर झूठ और गुमराह करने वाली हैं . ऐसा सिर्फ वही कहते हैं , जिन्हें यातो इस्लाम का सही ज्ञान नहीं है . या पूर्वाग्रह से ग्रस्त सेकुलर होते हैं .
वास्तव में इस्लाम कोई धर्म नहीं बल्कि एक विघटनकारी विचार है ,जिसने पैदा होते ही अपनी तर्कहीन मान्यताओं के आधार पर सारे विश्व के लोगों को एक ही झटके में मुस्लिम और गैर मुस्लिम ऐसे दो समूहों में विभाजित कर दिया था .चूँकि इस्लाम में ऐसी कई मान्यताएं मौजूद हैं जो परस्पर विरोधी है .जिन पर मुसलमान बिना सोचे समझे विश्वास करते है .इसी को इस्लाम में ईमान कहा जाता है .मुसलमानों के इसी अलगाववादी इमान के कारण देश का विभाजन हुआ था ,क्योंकि इस्लामी मान्यता के अनुसार हिन्दू मुशरिक बहुदेववादी है . और उनको क़त्ल करना धार्मिक कार्य है . बहुत कम लोग जानते होंगे कि जिहादी आतंकवाद के पीछे मुसलमानों का यही इमान है .इसलिए हमें पहले शिर्क और मुशरिक की परिभाषा समझना जरुरी है .
1-शिर्क और मुशरिक 

शिर्क का तात्पर्य बहुदेववाद ( Polytheism ) होता है .और अल्लाह के साथ किसी को शामिल करना (Association with Allah ) भी होता है
कुरान के हिंदी अनुवाद के अंत में कुरान की शब्दावली के पेज 1241 और 1245 पर व्याख्या दी गयी है .
शिर्क -अल्लाह के गुणों ,अधिकारों , स्वत्व .में किसी को शामिल समझना,या अल्लाह के साथ किसी को पुकारना .अथवा आदर करना .
मुशरिक -यदि कोई ऐसा माने कि जोभी भला बुरा काम अल्लाह कर सकता है वैसा ही कोई और कर सकता है .या कोई अल्लाह कीव्यवस्था में हस्तक्षेप कर सकता है .ऐसे  लोगों के मुशरिक होने में संदेह नहीं है .
2-सभी मुशरिक अपराधी हैं 
इस्लामी मान्यता के अनुसार शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है , जिसकी सजा सिर्फ मौत होती है .
-"निसंदेह अल्लाह इस बात को कभी माफ़ नहीं करेगा कि उसके साथ किसी को शामिल किया जाये .और इस से कम किसी भी गुनाह को माफ़ कर देगा "
 सूरा-निसा 4 : 116 
-"तुम्हें जहाँ भी मुशरिक मिलें ,उनको क़त्ल कर दो .या फिर उनको तब तक कैद में रखो जब तक वह ईमान नहीं लाते " सूरा -तौबा 9 :5 
" فَٱقۡتُلُواْ ٱلۡمُشۡرِكِينَ حَيۡثُ وَجَدتُّمُوهُمۡ وَخُذُوهُمۡ وَٱحۡصُرُوهُمۡ وَٱقۡعُدُواْ لَهُمۡ ڪُلَّ مَرۡصَدٍ۬‌ۚ فَإِن تَابُواْ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ   "
यही कारण है की मुसलमान आतंकवाद और निर्दोष लोगों की हत्या को अपराध नहीं मानते . बल्कि ऐसा करने वालों का बचाव करते हैं .लेकिन सेकुलर लोग मुसलमानों को खुश करने के लिए इस कटु सत्य को स्वीकार नहीं करते कि मुसलमानों ईमान दोगला होता है .क्योंकि जिन कामों के कारण वह हिन्दुओं को मुशरिक बताते हैं वही काम जब खुद करते है तो उसे अपने इमान आधार बताते हैं . इस बात को स्पष्ट करने के लिए शिर्क और मुशरिक की परिभाषा ध्यान से पढ़िए और फिर देखिये मुसलमान क्या क्या मानते हैं ,
3-शैतान और अल्लाह की समान शक्ति 
अबू कतदा ने कहा की रसूल मानते थे कि अच्छे सपने अल्लाह दिखाता है और बुरे सपने शैतान दिखाता है "
बुखारी - जिल्द 9 किताब 87 हदीस 113 
सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा कि अगर तुम बुरे सपने देखो तो समझो कि वह शैतान कि तरफ से हैं .तो उसके बारे में किसी को नहीं बताओ .और शैतान से बचने के लिए अल्लाह की शरण मांगो " बुखारी - जिल्द 9 किताब 87 हदीस 114 
अबू कतदा ने कहा कि रसूल ने कहा अगर तुम्हें बुरा सपना आये तो बायीं तरफ थूक दो . क्योंकि उस तरफ शैतान रहता है "
बुखारी -जिल्द 9 किताब 87 हदीस 115 
इन हदीसों से सिद्ध होता है कि जो काम अल्लाह कर सकता है वही काम शैतान भी कर सकता है .इसीलिए कुरान में कहा है ,
जब कुरान पढो तो शैतान से बचने के लिए अल्लाह को याद कर लो " सूरा-अन नहल 16 :98 
इसका मतलब है कि जितनी बार भी मुसलमान अल्लाह को याद करेंगे उसके साथ शैतान का नाम जरुर लेंगे .यह शिर्क नहीं तो क्या है .
4-बुरी नजर और जादू पर इमान 
रसूल मानते थे कि बुरी नजर ( Evil eye ) सचमुच होती है . जिसके असर से लोग बीमार हो जाते है " इब्ने माजा- किताब 5 हदीस 3506 और 3507 
किसी कि बुरी नजर के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए लोग एक बर्तन में पानी में रसूल का बाल डाल देते थे . और वह पानी लोगों को पिला देते थे .लोग मानते थे कि इस टोटके से बीमारी दूर हो जाएगी " बुखारी - जिल्द 7 किताब 72 हदीस 784 
रसूल मानते थे कि झाड़फूंक करने से जादू का और बुरी नजर का प्रभाव दूर हो सकता है " सही मुस्लिम - किताब 26 हदीस 5450 
आयशा ने कहा कि रसूल ने अपनी पत्नियों से सम्भोग करने के लिए उनकी बारी ( Turn ) निश्चित कर रखी थी .लेकिन बनी जुरैक के एक तांत्रिक यहूदी लाबिद बिन असम ने रसूल पर ऐसा कला जादू कर दिया था ,जिस से रसूल यह भी भूल जाते थे कि उन्होंने किस औरत से सम्भोग किया है .कई महीनों तक रसूल किसी से भी सम्भोग कर लेते थे . जब मैंने उन पर से जादू उतरवाया तभी वह ठीक हो सके "
बुखारी - जिल्द 8 किताब 73 हदीस 89 
5-अंधविश्वास पर ईमान 
रसूल मानते थे कि अल्लाह लोगों को डराने ले लिए जमीं पर भूकंप भेजता रहता है " बुखारी -जिल्द 2 किताब 18 हदीस 167 
रसूल मानते थे कि फ़रिश्ते काले कुत्तों से इतना डरते है कि यदि किसी के घर में काले कुत्ते का चित्र भी होगा तो , फरिशे उस घर के अन्दर नहीं जायेंगे "
 बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 833 
जिहादियों में मल मूत्र और पसीने से कस्तूरी की सुगंध निकलती रहती है "इब्ने माजा - किताब 4 हदीस 2795 
रसूल को विश्वास था कि जोभी रेशम या ऊन के वस्त्र पहिनेगा वह बन्दर या सूअर के के रूप में बदल जायेगा " सुन्नन अबू दाऊद- जिल्द 3 किताब 32 हदीस 4028 
6-जिन्नों की शक्तियों पर ईमान 
रसूल ने बताया है कि अक्सर जिन्न साँपों का रूप धर लेते हैं ,और यदि तुम्हारे घर में कोई भयानक सांप आ जाये और यदि वह तीन दिन तक नहीं काटे तो समझ लो वह मुसलमान जिन्न है . और उसे जाने दो . यदि वह काट ले तो वह काफ़िर होगा . उसे मार डालो " सही मुस्लिम -किताब 26 हदीस 5558 
7-रसूल के मूत्र और थूक पर ईमान 
हदीसों के अलावा मुसलमान " अश शिफा बि तारीफे हुकूके मुस्तफा  كتاب الشفاء بتعريف حقوق المصطفى‎" नामकी किताब को मानते है , जिसे " काजी इलयाद"ने लिखा था .इनका काल हि० 544 यानि सन 1149 ई ० है . इस किताब में मुहम्मद की चमत्कारी शक्तियों . और उनके थूक और मूत्र से इलाज करने की विधियाँ दी गयीं है .यही नहीं मुसलमानों का विश्वास है कि इस किताब का पाठ करने से या घर में रखने से सभी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं .
अब्दुल्लाह बिन जुबैर ने कहा है कि लोग रसूल की पेशाब पिया करते थे .और रसूल भी किसी को ऐसा करने से मना नहीं करते थे .सहाबी मानते थे कि रसूल की पेशाब पीने से पेट का दर्द ( Stomach ) नहीं होगा " अश शिफा - पेज 36 
मिटटी में रसूल का थूक मिला कर चाटने से बुखार मिट जाता है " सही मुस्लिम - किताब 26 हदीस 5444 
8-रसूल के चमत्कारी कान और आंखें

रसूल जब जन्नत गए थे तो , वहीँ बैठे बैठे जमीन पर चलने वाले बिलाल के पैरों की आहट सुनते रहते थे . " बुखारी - जिल्द 2 किताब 21 हदीस 250 
रसूल अपना सर घुमाये बिना ही एक ही समय आगे की और पीछे की तरफ की चीजें देख सकते थे " सही मुस्लिम - किताब 4 हदीस 853 . 854 , 856 
बाकि इब्न मुखलल्द ने कहा कि आयशा ने बताया है कि रसूल घोर अँधेरी रात में भी साफ देख सकते थे .जैसे बिल्लियाँ और उल्लू देख सकते हैं "अश शिफा - पेज 38 
आयशा ने कहा कि जब रसूल मेरे साथ सहवास करते थे तो जिबरील देखता रहता था .और रसूल कहते थे देखो आयशा जिब्राइल तुम्हें सलाम कर रहा है . लेकिन मुझे वहा कोई दिखाई नहीं देता था " बुखारी -जिल्द 8 किताब 74 हदीस 266 
9-अल्लाह के अज्ञान पर ईमान 
अल्लाह ईश्वर नहीं हो सकता इसको साबित करने के लिए यह एकही हदीस काफी है .जिसमे अल्लाह के द्वारा मुहम्मद के दिल के ओपरेशन करने का विवरण दिया है ,
मालिक बिन साअस ने कहा कि रसूल ने कहा .जब मैं जन्नत में गया तो मरे सामने एक सोने का बर्तन लाया गया , जिसमे इल्म और ईमान भरा हुआ था .फिर अल्लाह ने मेरे सीने को दायीं तरफ से ऊपर से नीचे से पेट तक चीर दिया . और मेरा दिल बाहर निकाला और जमजम के पानी से धोकर दिल में ज्ञान और ईमान भर दिया " सही मुस्लिम - किताब 1 ईमान हदीस 315 


"وقد احضرت حوض الذهب كامل من الحكمة والإيمان، وبعد ذلك افتتح اليمين (جزء من الجسم) من الطرف العلوي من الصدر إلى الجزء السفلي من البطن وغسله بماء زمزم، ثم شغل مع الحكمة والايمان."




 Sahih Muslim  - Book 1  Iman   Hadith  no 315 

नोट -अल्लाह इतना मूर्ख था कि उसको इतना भी ज्ञान नहीं था कि दिल सीने में दायीं तरफ नहीं बायीं तरफ होता है .

आज हमें मुसलमानों के ऐसे ऐसे मूर्खता भरी बातों पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है .क्योंकि ऐसी ही बातें मानने पर भी जब मुसलमान मुशरिक नहीं मने जाते है तो उनको हिन्दुओं को मुशरिक कहने का कोई अधिकार नहीं है .सोचिये जब इनका अल्लाह और रसूल खुद इतने मुर्ख और अन्धविश्वासी थे तो मुसलमान कैसे होंगे .और यदि मुशरिक होने सभी गैर मुस्लिम क़त्ल के योग्य है तो मुसलमान वाजिबुल क़त्ल क्यों नहीं . क्योंकि यही सबसे बड़े मुशरिक है .
इन मुशरिकों को जहाँ पाओ क़त्ल कर दो !सूरा -तौबा 9 :5 

http://islam-watch.org/AbulKasem/IslamicVoodoos/Part5b.htm

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

सेकुलर और मुसलमान क्या चाहते हैं ?


सेकुलर शब्द विदेश से आयातित और सबसे अधिक भ्रामिक शब्द है .इसलिए भारत की किसी भी भाषा में "सेकुलर " के लिए कोई समानार्थी और पर्यायवाची अर्थ नहीं मिलता है .लेकिन कुछ चालाक लोगों ने हिंदी में " सेकुलर " का अर्थ " धर्मनिरपेक्ष " शब्द गढ़ दिया था .यदपि इस शब्द का उल्लेख न तो किसी भी धर्म के ग्रन्थ में मिलता है और न ही इसकी कोई परिभाषा कहीं मिलती है .और फिर जब " सेकुलर "शब्द का विपरीत शब्द " सम्प्रदायवादी "बना दिया गया तो यह शब्द एक ऐसा अमोघ अस्त्र बन गया कि अक्सर जिसका प्रयोग हिन्दुओं प्रताड़ित उनको अपराधी साबित करने ,उन पर पाबंदियां लगाने के लिए किया जाने लगा .
इसका परिणाम यह हुआ कि खुद को सेकुलर बताने वाला बड़े से बड़ा अपराधी , और भ्रष्टाचारी लोगों की दृष्टि में दूध का धुला बन गया .और मोदी जैसे हजारों देशभक्त अपराधी लगने लगे .बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि इमाम बुखारी जैसे अनेकों कट्टर मुस्लिम नेता भी " सेकुलरिज्म " की वकालत करने लगे .सेकुलरों और मुसलमानों के इस नापाक गठबंधन का रहस्य समझने के लिए कुरान का सहारा लेना जरुरी है ,

1-सेकुलरों के लक्षण 
यद्यपि न तो अरबी में सेकुलर के लिए कोई शब्द है , और न कुरान में सेकुलर लोगों का उल्लेख है , लेकिन कुरान में सेकुलरों के जो लक्षण बताये हैं वह वर्त्तमान सेकुलर नेताओं पर सटीक बैठते है ,
"जब यह लोग मुसलमानों के साथ मिलते हैं , तो उन से कहते है कि हम भी ईमान वाले हैं . और जब एकांत में अपने नेताओं से मिलते हैं ,तो उन से कहते हैं कि हम तो तुम्हारे साथ है .हम तो मुसलमानों से मजाक करते हैं " सूरा -बकरा 2 :14 
"हे नबी यह मुनाफिक ( सेकुलर ) जब तुम्हारे पास आते हैं ,तो कहते हैं कि हम मानते हैं कि आप अल्लह के रसूल हो . लेकिन यह लोग सभी के सभी झूठे हैं "
सूरा -अल मुनाफिकून 63 :1 
" यह लोग कसमें खाते हैं कि हम तो तुम्हीं में से हैं .जबकि वह किसी के साथ नहीं होते हैं " सूरा -तौबा 9 :56 
कुरान में बताये यह सभी लक्षण उन सेकुलरों में मिलते हैं , जिनको कुरान में " मुनाफिक مُنافق" यानि Hypocretes "और हम दोगला कह सकते हैं .ऐसे लोग किसी के मित्र नहीं होते .
2-मुसलमानों की नीति 
मुसलमान अपने स्वार्थ के लिए सेकुलरों का सहयोग करते है ,लेकिन कुरान के इन आदेशों का पालन करते हैं , जैसे ,'
" तुम अपने धर्म के अनुयाइयों के अलावा किसी किसी पर भी विश्वास नहीं करो 
"सूरा - आले इमरान 3 :73 
" तुम अपने लोगों के आलावा किसी को भी अपनी गुप्त योजनाओं के बारे में सच नहीं बताओ " सूरा -आले इमरान 3 : 318 
" समझ लो कि यह सब काफ़िर एक दूसरे के संरक्षक और मित्र हैं "सूरा-अल अनफाल 8 :73 
( अर्थात सभी काफ़िर एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं )
" तुम इन काफिरों और मुनाफिकों का आदेश कभी नहीं मानना " सूरा अल अहजाब 33 :1
"तुम इन दोगली बातें बोलने वालों का कहना नहीं मानना .यह तो चाहते ही कि तुम किसी भी तरह से अपने इरादों में ढीले पड़ जाओ .और उनकी बातों में फंस जाओ " सूरा -अल कलम 68 : 8 -9 


" तुम कभी दोगले लोगों के बहकावे में नहीं आना " सूरा -अद दहर 76 :24 


3-मुसलमानों का ढोंग 
जो मुस्लिम नेता सेकुलर होने का पाखंड करते हैं ,और यह कहते हैं कि हम तो सभी लोगों को समान मानते हैं . और सबकी भलाई चाहते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि मस्जिदों में नमाज के बाद ऐसी दुआएं मांगी जाती है , जैसे ,
"ईमान वालों के लिए उचित नहीं है कि वे मुशरिकों ( मूर्ति पूजकों ) की भलाई के लिए क्षमा ,प्रार्थना करें , चाहे वह उनके मित्र या रिश्तेदार ही क्यों नहीं हों .क्योंकि यह भड़कती हुई आग वाली जहन्नम में जाने वाले हैं " सूरा -तौबा 9 :113 


"
 مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُوْلِي قُرْبَى مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ " Sura Taubah -. (9:113)


"हमें काफ़िरों के मुक़ाबिले में नुसरत अता फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :250 


" وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
अब काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :286 


"فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ"


"काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा। "आलि इमरान 3: 147


" وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ  "

यह और ऐसी कुरानी दुआएं नमाज के साथ और बाद में की जाती हैं ,इन से मुसलमानों के इरादों का पता चलता है .

4-मुसलमानों का लक्ष्य 

आज सेकुलर और मुसलमान इसलिए साथ है ,क्योंकि सेकुलर मुसलमानों के वोटों से अपनी सत्ता बचाए रखना चाहते हैं . और मुसलमान सेकुलरों के सहारे इस देश में इस्लामी राज्य की स्थापना करना चाहते है .जैसा कि कुरान में कहा है .
" तुम गैर मुस्लिमों से तब तक युद्ध करते रहो , जब तक उनका सफाया न हो जाये , और  अल्लाह का धर्म ही बाकी रह जाये "
 सूरा -बकरा 2 :193 


इन तथ्यों से सिद्ध होता है कि मुसलमान सेकुलरों का साथ तबतक देते रहेंगे जब तक उनकी संख्या इतनी कि अधिकांश प्रान्तों में उनकी सरकारें बन जाएँ .और यदि ऐसा हो गया तो मुसलमान इन सेकुलरों को भी नहीं छोड़ेंगे .
याद रखिये जिन मुसलमान बादशाहों ने हुमूकत के लिए अपने बाप , और मुहम्मद के परिवार के लोगों जिन्दा नहीं छोड़ा वह मुनाफिक सेकुलर लोगों को कैसे जिन्दा रहने देंगे ?

http://wikiislam.net/wiki/Qur%27an,_Hadith_and_Scholars:Friendship_with_Non-Muslims

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

कुरान में पवित्र अश्लील शब्द


किसी भी व्यक्ति की शराफत , शिष्टता ,गुण अवगुण और स्वभाव उसके द्वारा बोलचाल प्रयोग किये या लिखे गए शब्दों से पता चल जाते हैं .दुनिया की हरेक भाषा में पुरुष स्त्री के गुप्त अंगों से सम्बंधित शिष्ट और अश्लील शब्द पाए जाते हैं .और सभ्य लोग उन्हीं शब्दों का प्रयोग करते हैं ,जो समाज में स्वीकृत होते हैं .लेकिन उन्हीं शब्दों के लिए कुछ ऐसे भी पर्यायवाची शब्द होते है .जिनका गाली के रूप में प्रयोग किया जाता है .और जो भी व्यक्ति अपनी बातों के दौरान या लेखों में अश्लील शब्दों का प्रयोग करता है .लोग उसे असभ्य ,अशिष्ट या गंवार मानकर तिरस्कार करते हैं .
1-फुर्ज शब्द का गलत अर्थ 
मुसलमान कुरान को अल्लाह की किताब बताते है .जो अरबी भाषा में है .और अरबी भाषा में जननांग (Genitalia)के लिए कई शब्द मौजूद होंगे , मगर अल्लाह ने अपनी कुरान में उन्ही शब्दों का प्रयोग किया है , जो मुहम्मद साहब के समय अनपढ़ , गंवार ,और उज्जड बद्दू लोग गाली के लिए प्रयोग करते थे.कुरान में ऐसा ही एक शब्द " फर्ज فرج " है जो इन तीन अक्षरों ( फे  ف   रे ر जीम ج) से बना है और इसका बहुवचन ( Plural )" फुरूज فروج" होता है जिसका असली अर्थ छुपाने के लिए कुरान के अनुवादक तरह तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं .चालक मुल्ले फुर्ज शब्द का अर्थ " गर्भाशय Uterus "बताकर लोगों को गुमराह करते रहते हैं जबकि गर्भाशय के लिए अरबी में " रहम  رحم    " शब्द प्रयुक्त होता है 
2-कुरान में फुर्ज का उल्लेख 
पूरी कुरान में अधिकतर " फुर्ज " का बहुवचन शब्द " फुरुज "प्रयुक्त किया गया है ,और मुल्लों उनके जो अर्थ दिए है ,अरबी के साथ हिंदी और अंग्रेजी में दिए जा रहे हैं .बात स्पष्ट हो सके .देखिये ,
1." जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की "


" الَّتِي أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا  "
"अल्लती खसलत फुरूजुहा "
who guarded her chastity,Sura-at Tahrim 66:12


2."अपनी गुप्त इन्द्रियों की रक्षा करने वाली "
" وَالْحَافِظِينَ فُرُوجَهُمْ  "
"वल हाफिजूना फुरूजुहुम "
and women who are mindful of their chastity, Sura- al Ahzab 33:35
3.ईमान वाली स्त्रियों से कहो कि वह अपनी गुप्त इन्द्री की रक्षा करें "( mindful of their chastity)सूरा-अन नूर 24 :31 
" وَيَحْفَظْنَ فُرُوجَهُنَّ "
"व युफ्जिन फरूजहुन्न "
4.हमने उस स्त्री की फुर्ज में अपनी रूह फूंक दी , जिसकी वह रक्षा कर रही थी "( guarded her chastity)  (सूरा-अल अम्बिया 21 :91 
"والتي احصنت فرجها فنفخنا فيها من روحنا وجعلناها وابنها اية للعالمين  "21:91

दी गयी कुरान की इन सभी आयतों में " फुर्ज " का बहुवचन " फुरूज " प्रयोग किया गया है , जिसका अर्थ चालाक मौलवी हिंदी में " गुप्त इन्द्री , सतीत्व " और अंगरेजी में chastityबताकर लोगों को गुमराह करते रहते हैं .जबकि फुर्ज का अर्थ कुछ और ही है .जो विकीपीडिया में दिया है , देखिये ,
In Arabic, the word Al-Farj (الفرج) means Vagina


http://wikiislam.net/wiki/Allah:_I_sent_Jibreel_to_blow_into_Mary's_Vagina


3-फुर्ज अश्लील और गन्दी गाली है 
लोगों ने फुर्ज का अर्थ अंगरेजी में Vagina यानि स्त्री की योनी साबित कर दी है . और अरबी लुगत ( शब्दकोश ) से भी यही सिद्ध होता है ,जैसे 
"فرج المرأة الداخل "


   "inside the Woman's vagina "


लेकिन फुर्ज का अर्थ योनी से स्पष्ट नहीं होता है क्योंकि योनी के लिए अरबी में " अल मुहमल"المهبل और " गमद غمد"शब्द मौजूद है .जो शिष्ट शब्द है 
अंगरेजी में फुर्ज जैसी गाली का अर्थ नहीं होगा लेकिन हिंदी में गाली के रूप में गुंडे मवाली अक्सर बोलते रहते है ,जो " च " शब्द से शुरू होता है .


4-आकाश में भी योनी 
दूसरी भाषा की तरह अरबी में भी अश्लील मुहावरे प्रचलित हैं जिसका उदहारण इस आयत से मिलता है
" हमने आकाश को ऐसा बनाया और सजाया कि उसमे कोई त्रुटी ( फर्ज " नहीं है "( free of  faults)सूरा -काफ 50 :6 
"أَفَلَمْ يَنْظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِنْ فُرُوجٍ  "
"व मा लहा मन फुरूज "
यदि हम इस आयत के अंतिम शब्दों का यह अर्थ करें "और उसमे कोई योनी नहीं है " तो यह अर्थ गलत होगा इसका सही अर्थ होगा " उसमे कोई चुतियापा नहीं है ''क्योंकि इस आयत में फुर्ज शब्द जब किसी वस्तु कमी या खोट होती है तब कहा जाता है
4-जद्दाह का हवाई अड्डा योनी (فرج )जैसा है 
मुसलमानों का इमान है कि अल्लाह की किताब होने के कारण कुरान का हरेक शब्द पवित्र है , चाहे उसमे अश्लील गालियाँ क्यों हों .और जब कुरान ने अल्लाह ने इतनी बार " फुर्ज " यानि योनी का उल्लेख किया है , तो उससे प्रभावित होकर सऊदी अरब के बादशाह " अब्दुल अजीज " ने
सोचा जैसे सभी मनुष्य योनी से निकल कर दुनिया में प्रवेश करते हैं ,उसी तरह हाजी भी जद्दाह से होकर मक्का में जाते है .इसलिए जब जद्दाह का नया हवाई अड्डा बनाया गया तो उसकी बनावट महिला की ऐसी योनी की तरह बनाया गया है , जिसमे लिंग प्रवेश कर रहा है .यह विचित्र और कुरान में वर्णित फुर्ज के आकार के हवाई अड्डे का निर्माण का प्रारंभ सन 1974 में हुआ था .और 31 मई 1981 इसका उद्घाटन खुद बादशाह ने किया था .इस हवाई अड्डे का कुल क्षेत्रफल 15 वर्ग किलो मीटर है .मक्का का दर्शन करने के लिए जो भी व्यक्ति जद्दाह पर उतरता है वह पहले फुर्ज जैसे इस हवाई अड्डे का दर्शन जरुर करता है ,फिर पहले तो जो लोग कुरान को ठीक से नहीं समझते थे उन्होंने इस हवाई अड्डे का काफी विरोध किया था और कहा था ,किजद्दाह का हवाई अड्डा हराम है इसका आकार"फुर्ज " यानि योनी जैसा है 


مطار جدة حرام لأنه يشبه فرج المرأة
"मतार जद्दाह हराम लियश्बीह फुर्ज अल इमरात"
Jedda airport is harram because it looks like the vagina of the woman!देखिये विडिओ 


http://www.youtube.com/watch?v=SxMMQopZwrc

लेकिन जब विरोध करने वालों को फुर्ज से सम्बंधित कुरान की आयतें अर्थ सहित बताई गयीं , तो उनका विरोध समाप्त हो गया . और आज तक जद्दाह का हवाई अड्डा वैसा ही है .जैसी किसी मुस्लिम औरत की योनी होती है 


वास्तव में " फुर्ज " ही इस्लाम का मुख्य आदर है .काबा की दीवार पर जो पत्थर है उसकी बनावट भी योनी जैसी है .मुसलमानों ने फुर्ज के लिए ही अनेकों युद्ध लड़े है .और जन्नत में भी हूरों की फुर्ज की इच्छा रखते हैं .वैसे किसी को अश्लील गली देना बुरी बात , और पाप है , लेकिन जब खुद अल्लाह ने ऐसे शब्द का प्रयोग किया है तो फुर्ज शब्द गाली नहीं पवित्र हो गया है .
याद रखिये जो खुद कीचड़ में सना हुआ हो वह दूसरों के कपड़ों में दाग नहीं खोजता .

http://www.danielpipes.org/comments/195920