गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

डराने वाला रसूल डरपोक था !!


जो लोग अन्धविश्वासी , लालची और बिना परिश्रम के लाभ प्राप्त करने के इच्छुक होते हैं , वह किसी न किसी ऐसे ढोंगी पाखंडी के जाल में जरुर फंस जाते है .जो उनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करता है..अक्सर ढोंगी लोग साधारण लोगों को या तो किसी बात का डर दिखाते हैं , या किसी चीज का लालच दिखाकर अपना अनुयायी बना लेते .मुहम्मद साहब ने यही डराने और लालच देने की नीति अपनाकर अरब के मुर्ख बद्दुओं को मुसलमान बना दिया था . फिर उनके द्वारा जिहाद और लूटमार करके अरब में इस्लामी राज्य स्थापित कर दिया था .आज यह बात साबित हो चुकी है कि जैसे दुनिया भर को डराने वाला ओसामा बिन लादेन खुद सबसे बड़ा डरपोक था , वैसे ही मुहम्मद साहब भी अन्धविश्वासी और सबसे बड़े डरपोक व्यक्ति थे .इसका प्रमाण कुरान और बुखारी कि हदीस से मिलता हैइसका एक उदहारण यहाँ पर दिया जा रहा है . .
1-डराने वाला रसूल 
जैसे आजकल कुछ लोगों ने यह अफवाह फैला रखी है कि 22 दिसंबर 2012 को दुनिया समाप्त हो जाएगी . उसी तरह मुहम्मद भी लोगों को कयामत के जल्द ही आने का डर दिखाते रहते थे . और कहते थे मुझे अल्लाह ने लोगों को डराने के लिए ही भेजा है , कुरान में लिखा है ,
"यह रसूल तो सभी डराने वालों में सबसे आगे डराने वाले हैं "सूरा -अन नज्म 53 :56 
 हे नबी हमने तो तुम्हें सभी मनुष्यों के लिए सूचना देने वाला और उनको डराने वाला बना कर भेजा है . लेकिन अधिकाश लोग इसकी असलियत नहीं जानते हैं "
 सूरा -अस सबा 34 :28 
2-डरपोक रसूल 
सब जानते हैं कि अरब में बहुत कम बरसात होती है . और अगर कभी थोड़ी बहुत बरसात भी होती है , तो उसके पहले धूल भरी आंधी और तूफान जरुर आते है , अपने अंधविश्वास के कारण मुहम्मद ऐसी किसी भी घटना को क़यामत के आसार समझ लेते थे . और भागादौड़ी करने लगते थे . और पडौसियों को भी बुला लेते थे . यह हदीस देखिये ,
मक्की बिन इब्राहीम बिन जरीज अता ने रवायत की है , कि आयशा ने कहा है मैं रसूल की इस आदत को अच्छी तरह से जानती हूँ , कि जब भी कभी कोई बादल की घटा आसमान से उतर कर मैदान की ओर आने लगती थी ,तो डर के मारे रसूल का चेहरा पीला पड़ जाता था .और वह बेचैन होकर घर से अन्दर बहार दौड़ते फिरते रहते थे . और बरसात हो जाने पर ही उनको तसल्ल्ली मिलती थी . आयशा ने कहा लेकिन मुझे कोई डर नहीं लगता था . ऐसी ही एक घटना है , जब आसमान पर घटा छा गयी , डर के मारे रसूल लोगों को इकठ्ठा करने कहने लगे कि यह वही क़यामत की घटा है , जिसकी तुम लोग जल्दी मचाते हो . फिर रसूल ने यह आयत सुनाई जिस से लोग डर जाएँ .


 حَدَّثَنَا مَكِّىُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ عَائِشَةَ – رضى الله عنها - قَالَتْ كَانَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا رَأَى مَخِيلَةً فِى السَّمَاءِ أَقْبَلَ وَأَدْبَرَ وَدَخَلَ وَخَرَجَ وَتَغَيَّرَ وَجْهُهُ ، فَإِذَا أَمْطَرَتِ السَّمَاءُ سُرِّىَ عَنْهُ ، فَعَرَّفَتْهُ عَائِشَةُ ذَلِكَ ، فَقَالَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم « مَا أَدْرِى لَعَلَّهُ كَمَا قَالَ قَوْمٌ ( فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضاً مُسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ ) » . الآيَةَ . طرفه 4829 تحفة 17386 – 133/4 


 “Sahih” Al-Bukhari Volume 4. Hadith #428  


 Bukhari Hadith (Arabic) Serial No. 3206-

बुखारी की यह हदीस साबित करती है कि आयशा मुहम्मद से कहीं अधिक हिम्मतवाली थी , जबकि मुहम्मद साहब डरपोक ,वहमी और अन्धविश्वासी थे .
3-डर के मारे आयत बना दी 
जैसे ही बादल छाये और आंधी चलने लगी तो मुहम्मद साहब ने पडौसियों से कहा कि अल्लाह ने मुझे इस क़यामत के आने की सूचना पहले ही दे दी थी , कुरान के लिखा हैं
सही ज्ञान तो अल्लाह के पास है , मैं तो तुम्हें इसकी ( आंधी ) की खबर दे रहा हूँ , लेकिन तुम लोग नहीं समझ रहे हो "
सूरा - अल अहकाफ 46 :23


"قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِنْدَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُمْ مَا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ   "Quran-Sura.al ahkaf  46:23

मुहम्मद साहब ने उस समय लोगों को कयामत का डर दिखने के लिए जो आयत सुनाई थी , वह इस प्रकार है,
और जब हम लोगों ने घटा के रूप में किसी चीज को अपने मैदानों के ऊपर आते हुए देखा तो ऐसा लगा कि यह छायी हुयी घटा हमारे ऊपर वर्षा करेगी , लेकिन नहीं , वह तो कोई ऐसी चीज थी , जिसके बारे में लोगों ने जल्दी मचा रखी है . वास्तव में वह एक आंधी थी , जो एक दुखदायी कष्ट ले कर आई थी " सूरा-अल अहकाफ़ 46 :24


فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُمْطِرُنَا بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُمْ بِهِ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ   "Quran-Sura.al ahkaf  46:24


4-मुहम्मद ने धमकाया 
जैसा कि देखा गया है कि क़यामत की ऐसी भविष्य वाणियाँ हमेशा झूठ निकलती हैं , उसी तरह उस दिन भी तूफान के बाद सब कुछ ठीक हो गया था .और मुहम्मद साहब की पोल खुल गयी लेकिन अपने आप को रसूल साबित करने के लिए मुहम्मद साहब ने लोगों को डराना और धमकाना शुरू कर दिया .और यह आयतें सुना डालीं ,
" जिन लोगों ने रसूल की बात नहीं मानी ,वह एक दिन पछता कर ऎसी इच्छा करेंगे , कि काश उनके साथ ही यह जमीन बराबर कर दी जाये "
सूरा -अन निसा 4 :42 
"जो लोग अल्लाह के इस रसूल की बात नहीं मानेंगे , उनके लिए जहन्नम में दहकती हुई आग तैयार कर राखी गयी है "सूरा -अल फतह 48 :13 
5-आखिर में लालच दिया 
इस्लाम का असली आधार डर और लालच पर ही टिका हुआ है , जब तूफान सकुशल निकल गया और लोगों का डर निकल गया , तो मुहमद साहब ने लोगों पर लालच का हथियार अपनाया . क्योंकि उनको पता था कि अरब के लोग लोभी और लालची हैं . और लालच देने से वह उनकी हरेक झूठ को सही मान लेंगे . इसलिए मुहमद साहब ने यह आयत सुना डाली ,
" अगर तुम रसूल के कहने पर चलोगे तो . अल्लाह तुम्हारी इच्छाएं पूरी करने में कोई कमी नहीं रखेगा " सूरा -अल हुजुरात 49 :14 
इस लेख का उद्देश्य लोगों को यही समझाना है कि , वह कैसी ऐरे गैरे स्वयंभू भगवान , अवतार , या रसूल के डराने या लालच दिलाने पर देखादेखी उसके अनुयायी नहीं बन जाएँ .और मुसलमान तो कदापि नहीं बनें . क्योंकि जैसे निर्मल बाबा का भंडा फूट गया है , एक दिन मुहमद साहब का भंडा भी जरुर फूट जायेगा .गुरु गोविन्द सिंह ने कहा है 


,"न काहू को देत भय ,न भय मानत आप " 


http://www.websrilanka.com/chapter-13-%E2%80%93-bloopers-6-prophet-s-childish-and-superstitious/


रविवार, 8 अप्रैल 2012

हलाल से हलाला तक !!


इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में "हलाल , और "हलाला " यह ऐसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है . दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ "अवर्जित " होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला .विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं
इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं. और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है . चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है , इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम है .यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं , लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है . इसे विस्तार से प्रमाण सहित बताया गया है .जो कुरान और हदीसों पर आधारित है .
1-तलाक कैसे हो जाती है 
यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार "तलाक " शब्द का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए , तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है ,
" और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा "सूरा - मायदा 5 :89
तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
-"इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब भी तलाक वैध मानी जाएगी .और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है.(Rawdha al-talibeen 7/73" 
"فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك 


-"इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122 
"
إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“


2-अल्लाह की तरकीब 
ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है .
" हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे " सूरा -अत तलाक 65 :1
और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है
3-हलाला 
तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले .फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा "सूरा - बकरा 2 :230



"فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ    2:230



(नोट -इस आयत में अरबी में " تحلّل لهُ 'तुहल्लिल लहु"शब्द आया है , मुस्लिम इसका अर्थ "wedding " करते हैं , जबकि  sexual  intercourse  सही अर्थ होता है .
इसी से " हलालाह حلالہ " शब्द बना है . अंगरेजी के एक अनुवाद में है "uptill she consummated  intercourse with  another person   "यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती .)और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को " रजअ رجع" कहा जाता है .
हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है।
बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं , देखिये (विडिओ )
Teen Talaaq aur Halala part 1

http://www.youtube.com/watch?v=APVNOo5pVg8

4-हलाला का असली उद्देश्य 
हलाला का उद्देश्य पति पत्नी में सुलह कराना नहीं , बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है , जो इन हादिसों से साबित होता है ,
-"आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल कुरैजी कि पत्नी आई और बोली , रीफा ने मुझे तलक दे दिया था . और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली , लेकिन वह नपुंसक है , अब मैं वापिस रिफ़ाके पास जाना चाहती हूँ . रसूल ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत सम्भोग नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के पास वापिस नहीं जा सकती .
"إلا إذا كان لديك علاقة جنسية كاملة مع  "
 Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 186
-"उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया , और फिर से अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की . रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है .. और जब तक उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद का स्वाद नहीं चख लेते .
"حتى انها ذاق العسل من الزوج الآخر وذاقه العسل لها  "
Abu Dawud, Book 12, Number 2302
5-हलाला व्यवसाय 
जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं ,वहां मुल्ले मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं , और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं .इनका काम फतवे देना होता है . चूँकि इस विज्ञानं के युग में नेट , फोन ,और फेक्स जैसे साधन सामान्य है , और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है . कई बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं .
देखिये देवबंद का फतवा
अगर इंसान शराब के नशे में अपनी बीवी को फोन पर तीन बार तलाक बोल दे, लेकिन बाद में उसे पछतावा हो और वह तलाक न चाहता हो ...तो क्या ऐसी सूरत में भी तलाक हो जाएगा’दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से। इस पर मुफ्तियों ने फतवा जारी किया है कि अगर तलाक नशे की हालत में दिया गया हो, तो भी पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाएगा। फोन पर दिया गया तलाक भी मान्य है। अगर ऐसा शख्स अपनी बीवी के साथ रहना चाहता है तो हलाला के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
the Qazi can separate them both after analyzing the case. Reference Sahih Bukhari 7:63:227 & 231

मुल्ले मुफ्ती फ़ोन से या इशारे से दी गयी तलाक को जिन हदीसों का हवाला देते हैं , उन में से एक यह है ,
-"आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने सिर्फ तीन तलाक देने का इशारा ही किया था , और तलाक हो गयी , फिर उसकी पत्नी ने दुसरे आदमी से शादी कर ली .और अपने पहले पति के पास जाने की इच्छा प्रकट की . क्या ऐसा संभव है ? रसूल ने कहा जब तक उसका दूसरा व्यक्ति उसे तीसरे आदमी से सहवास नहीं नहीं करा देता , औरत पूर्व पति के पास नहीं जा सकती .Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 187
6-हलाली मुल्लों की हकीकत 
चूँकि हलाला करवाने वाली औरत को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सम्भोग करना और उसका सबूत भी प्रस्तुत करना जरूरी होता है , और फिर ऐसे व्यक्ति को खोजना होता है , जो बाद में उसे तलाक भी दे दे, तभी वह औरत अपने पहले पति के पास जा सकती है . इस लिए इन मुल्लों ने बेकार जवान पाल रखे हैं , जो रुपये लेकर हलाला का धंदा करते है . यह लोग जासूसी करते हैं और जहाँ भी कोई शराब पीकर भी औरत से तलाक बोल देता है वहीँ हलाला करने धमक जाते हैं . विवश होकर मुर्ख मुसलमान अपनी पत्नियाँ हलाला करा लेते है, कई बार तो यह मुफ्ती फर्जी तलाकनामे भी जारी कर देते हैं .दिल्ली के पास बवाना गाँव में यही होता है .ऐसी औरतें जिनका हलाला हो जाता है , वह अल्लाह का हुक्म समझकर चुप रहती है .और मुल्लों को औरत के साथ दौलत भी मिलती है .कुछ लोग इसे बुरा भी कहते हैं , देखिये ,
Halala Nikah s of 6 time a Mosque Imam s wife( video)

http://www.youtube.com/watch?v=tqIbskjydRY

7-लखनऊ की सत्य घटना 
दिनांक 8 मार्च 2011 इतवार को India Times की लखनऊ संवाद दाता मंजरी मिश्रा ने एक चौंकाने वाली खबर दी थी . जिसने मुताबिक दोपहर के समय करीब 200 मुस्लिम महिलाये , सिर्फ दुपट्टा सर पर डाले हुए मुस्लिम वूमेन पर्सनल बोर्ड के दफ्तर में घुस गयीं . वह नारे लगा रही थी की मुस्लिम ख्वातीन को मुल्लों से बचाया जाए , जो फर्जी तलाकनामे बनाकर उनको हलाला करवाने पर दवाब डालते रहते है, या तलाक को रद्द करने के लिए रूपया मांगते हैं . उन औरतों का नेतृत्व शाइस्ता अम्बर कर रही थी .कुछ औरतों ने ऐसे मुल्लों की धुनाई भी कर दी थी .
Move to counter triple talaq, halala
Manjari Mishra, TNN Mar 8, 2011, 04.44am IST
अगर इतना पढ़ने और समझने के बाद भी मुस्लिम महिलाएं यह मानती हैं ,कि इस्लाम में उनको पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त है , तो हमें उनकी बुद्धि पर तरस आता है , और ऐसे जंगली कानून बनाने वाले अल्लाह को अक्लमंद होने पर शंका होती है .


http://mullareality.blogspot.in/2011/10/talaq-and-halala-match-fixing-2.html