बुधवार, 18 जनवरी 2012

जन्नत में गिलमा का क्या काम है ?


कुरान में मुसलमानों से वादा किया गया है कि मरने के बाद उनको जन्नत में कुंवारी और सुन्दर हूरें दी जाएँगी .और साथ में सुन्दर अल्पायु के लडके भी दिए जायेंगे जिन्हें "गिलमा " कहा जाता .क्योंकि मुसलमान लड़कों के भी शौक़ीन होते हैं .वह जन्नत में जाये बिना ही यहीं अपनी इच्छा पूरी करते आये हैं .इसी के बारे में जानकारी दी जा रही है .
यदि कोई व्यक्ति दुर्भावना रहित निष्पक्ष रूप से इस्लामी साहित्य ,मुस्लिम शासकों का इतिहास और मुसलमानों आचार विचार का गंभीर अध्यन करने पर आसानी से इस बात का निष्कर्ष निकला जा सकता ,कि है हरेक कुकर्म और अपराध का सम्बन्ध इसी गलत धार्मिक शिक्षा से है .ऐसा ही एक दुर्गुण है जो इस्लाम के साथ ही सम्पूर्ण विश्व में फ़ैल गया है ,जिसको समलैंगिकता (Homo sexuality ) भी कहते हैं .और दूसरा दुर्गुण अफगानिस्तान ,पाकिस्तान और में मौजूद है जिसे "बच्चा बाजी " कहा जाता है .इसी तरह भारत में हिजड़ों कि प्रथा भी मुस्लिम शासक ही लाये थे .जिनको "मुखन्निस(Arabic مخنثون "effeminate ones") कहते हैं .यह ऐसे लडके या पुरुष होते हैं ,जिनका पुरुषांग काट दिया जाता ताकि वह स्त्री जैसे दिखें .और जब वह हरम में काम करें तो वहां की औरतोंसे कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकें .समलैंगिकता इस्लाम से पूर्व और इस्लाम के बाद भी किसी न किसी रूप से मुस्लिम देशों में मौजूद है .इसके लिए हमें कुरान ,हदीस और इतिहास का सहारा लेना जरुरी है .देखिये -
1-इस्लाम से पूर्व समलैगिकता 


इस्लाम से पहिले अरब के लोग सुन्दर लड़कों के साथ कुकर्म करते थे ,यह खुद कुरान से साबित होता है ,जो कहती है 
"जब हमारे फ़रिश्ते लड़कों के रूप में लूत( एक नबी ) के पास गए ,तो वह उन लड़कों के बारे में चिंतित हो गया .और खुद को बेबस समझाने लगा ,क्योंकि उसकी जाति लोग लडके देखते ही उसके घर की तरफ दौड़े आ रहे थे .क्योंकि वह लोग हनेशा से ऐसा कुकर्म करते रहते थे .लूत ने उन से कहा हे लोगो यह मेरी बेटियां हैं जो लड़कों से अधिक उपयोगी हैं और बिलकुल पाक हैं ,तुम लड़कों से साथ कुकर्म करके मुझे लज्जित नहीं करो .क्या तुम में कोई भला आदमी नहीं है ,वह बोले हमें तेरी बेटियों से कोई मतलब नहीं .तुम तो जानते हो की हमारा असली इरादा क्या है " 
सूरा -हूद 11 :77 से 79 
"लूत ने कहा तुम अपनी कम वासना की पूर्ति के लिए लड़कियों को छोड़कर लड़कों के पास जाते हो "सूरा-अल आराफ़ 7 :80 


2-जन्नत में लडके मिलेंगे 


आपको यह बात जरुर अजीब लगेगी कि एक तरफ कुरान लड़कों के साथ दुराचार को बुरा कहती है ,और दूसरी तरफ लोगों को जन्नत में सुन्दर लडके मिलने का प्रलोभन देती है .जन्नत के इन लड़को को "गिलामाغِلمانُ " कहा गया है .कुरान में इनका ऐसा वर्णन है .
" और उनके चारों तरफ लड़के घूम रहे होंगे ,वह ऐसे सुन्दर हैं ,जैसे छुपे हुए मोती हों "सूरा -अत तूर 52 :24 
"وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ" 52:24
"वहां ऐसे किशोर फिर रहे होंगे जिनकी आयु सदा एक सी रहेगी (immortal youths ) सूरा -अल वाकिया 56 :17 
इन लड़कों की हकीकत कुरान की इस आयत से पता चलती है ,जो कहती है कि,
"ऐसे पुरुष जो औरतों के लिए अशक्त हों (who lack vigour ) सूरा -नूर 24 :31 
बोलचाल की भाषा में हम ऐसे पुरुषों नपुंसक या हिजड़ा (Eunuchs ) कहते हैं . मुस्लिम शासक कई कई औरते रखते थे ,और हरम की रक्षा के लिए हिजड़े रखते थे .जिन्हें "खोजा सरा" कहा जाता था .रसूल की हरम में भी कई औरतें थी .इसके लिए हिजड़ों की जरूरत होती थी .यह बात इन हदीसों से पता चलती है .सभी प्रमाणिक हदीसें हैं .
3-रसूल हिजड़े रखते थे .

अपने हरमों में हिजड़ों को रखना इस्लाम की पुरानी परंपरा है .और रसूल के घर में भी हिजड़े रहते थे ,और कभी रसूल खुद हिजड़े खरीदते थे ,जो इन हदीसों और सीरत से पता चलता है ,
"अमीरुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक हिजड़ा रसूल के पास आता था .और एक दिन जब रसूल घर में घुसे तो उनकी पत्नियाँ औरतों के बारे में चर्चा कर रही थी .कि जब औरत आगे बढाती है तो चार गुनी और पीछे चलती है तो उनका पेट आठ गुना निकलता है .रसूल बोले मुझे इस बात पर विश्वास नहीं ,शायद यह हिजड़ा अधिक जानता हो . तब औरतों ने उस हिजड़े से पर्दा कर लिया .
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: A mukhannath (eunuch) used to enter upon the wives of Prophet . They (the people) counted him among those who were free of physical needs. One day the Prophet entered upon us when he was with one of his wives, and was describing the qualities of a woman, saying: When she comes forward, she comes forward with four (folds in her stomach), and when she goes backward, she goes backward with eight (folds in her stomach). The Prophet  said: Do I not see that this (man) knows what here lies. Then they (the wives) observed veil from him. 
Sunan Abu-Dawud, Book 32, Number 4095: 
4-रसूल ने हिजड़ा ख़रीदा 


अरब में इस्लामी कल में गुलामों का बाजार लगता था ,और एक दिन जब रसूल गुलाम खरीदने गए तो उन्हें एक हिजड़ा मिला जिस का वर्णन सीरत ( मुहम्मद की जीवनी ) में इस तरह मिलता है 
"एक बार रसूल बाजार गए तो उनको वहां "जाहिर "(एक हिजड़ा ) मिल गया ,जिसे रसूल पसंद करते थे .तभी रसूल ने जाहिर को पीछे से आकार पकड़ लिया .जाहिर बोला मुझे छोडो ,तुम कौन हो ,रसूल बोले मैं गुलामों का व्यापारी हूँ ,यानि गुलाम खरीदने वाला हूँ .जब जाहिर को पता चला कि यह रसूल हैं ,तो वह रसूल कि छाती से और जोर से चिपट गया "
One day, Muhammad went to the market, there he found Zahir, whom he liked, so he hugged him from behind. Zahir said: let go of me, who are you? Muhammad told him: I'm the slave trader (literally, I'm the one who buys the slaves), and refused to let go of him so when Zahir knew it was Muhammad, he drew (stuck) his back closer to Muhammad's chest.


فى يوم خرج محمد إلى السوق فوجد زاهرا وكان يحبه فأحتضنه من الخلف 
فقال له زاهر اطلقنى من انت؟ فقال له محمد انا من يشترى العبيد ورفض ان 
يطلقه فلما عرف زاهر أنه محمد صار يمكن ظهره من صدر محمد 
السيرة الحلبية ج 3 ص 441 وفتحي رضوان في (الثائر الأعظم) ص 140 
Al Seera Al Halabya (Muhammad's Biography) by Al Halabya, volume 3, p. 441 and Fathy Rdwan in his book Al Tha'er al A'azam (The greatest rebel)


5-गुलाम लड़कों का काम

गुलाम लड़कों (slave boys ) यानी गिलमा से कई तरह के काम कराये जाते है ,जिनमे एक के बारे में इस हदीस में लिखा है ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि जब भी रसूल शौच के लिए जाते थे ,तो मैं उनके साथ रहता था .और मदद के लिए एक लड़का पानी से भरा बर्तन रखता था .ताकि वह पानी से रसूल के गुप्त अंगों को धो सके "
"وروى أنس بن مالك :
كلما رسول الله ذهب للرد على المكالمة من الطبيعة، وأنا مع صبي آخر يستخدم لمرافقته مع بهلوان كامل من الماء. (وعلق هشام "، حتى انه قد غسل فرجه معها".)
Narrated Anas bin Malik: 
Whenever Allah's Apostle went to answer the call of nature, I along with another boy used to accompany him with a tumbler full of water. (Hisham commented, "So that he might wash his private parts with it.") 
(Sahih Al-Bukhari, Volume 1, Book 4, Number 152; see also Numbers 153-154


6-बच्चा बाजी 


बच्चा बाजी(Pederasty) ,यह इस्लाम का एक मनोरजन है ,इसमे छोटे छोटे लड़कों या तो खरीद कर या अगवा करके उठाव लिया जाता है .फिर उनको लड़कियों के कपडे पहिना कर नाच कराया जाता है .और नाच के बाद उनके साथ कुकर्म किया जाता है .कभी कभी ऐसे लड़कों को खस्सी करके (Castrated ) हिजड़ा बना दिया जाता है .यह इस्लामी परम्परा अफगानिस्तान ,सरहदी पाकिस्तान में अधिक है .इस कुकर्म के लिए 9 से 14 साल के लड़को को लिया जाता है .अफगानिस्तान में गरीबी और अशिक्षा अधिक होने के कारण वह आदर्श इस्लामी देश है .इसलिए वहां बच्चा बाजी एक जायज मनोरंजन है .विकी पीडिया में इसका पूरा हवाला मिल सकता है ,इसकी लिंक दी जा रही है .
http://en.wikipedia.org/wiki/Bacha_Bazi
अधिक जानकारी के लिए यू ट्यूब से एक लिंक दी जा रही है ,
Homosexual Pedophilia in Afghanistan: Bacha Bazi
http://www.youtube.com/watch?v=P1BNeXTLHoY

7-मुस्लिम शासकों ने हिजड़े बनाये 

अरब लोगों में गिलमा यानी Salve Boys रखने की पहुत पुरानी परम्परा है .इसे इज्जतदार होने की निशानी समझा जाता था .अमीर उन गिलमा लड़कों के साथ कुकर्म किया करते थे .कुरान में गिलमा के बारे में सुन्दर लडके कहा गया है .लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गिलमा लडके हिजड़े होते हैं ,जिन्हें कम आयु में ही Castrated करके हिजड़ा बना दिया जाता है .इसके बारे में प्रमाणिक और विस्तृत जानकारी खलीफा अल रशीद और खलीफा अल अमीन के इतिहास से मिलती है .जिसे सन 1948 में लन्दन से प्रकाशित किया गया था किताब का नाम "Hitti PK (1948) The Arabs : A Short History, Macmillan, London, p. 99उसी से यह अंश लिए जा रहे हैं .दसवीं सदी ने खलीफा अल मुकतदिर (908 -937 ) ने बगदाद में अपने हरम में रखने के लिए 11 हजार लड़कों को हिजड़ा बनवाया ,जिनमे 7 हजार हब्शी और 4 हजार लडके ईसाई थे .( पेज 174 -175 ) इसका एक उद्देश्य तो उनके साथ कुकर्म करना था .और दूसरा उदेश्य पराजित लोगों को अपमानित करना भी था .
बाद में यही काम भारत में आनेवाले हमलावर मुस्लिम शासकों ने भी किया ,जैसे जब बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर हमला किया था ,तो उसने बड़े पैमाने पर 8 से 10 साल के हिन्दू बच्चों को हिजड़ा बना दिया था .बाद में मुगलों कि हुकूमत में (1526 -1799 ) में भी हिजड़े बनाए जाते रहे .इसका वर्णन "आईने अकबरी : में भी मिलता है .इसमे लिखा है अकबर ने 1659 में करीब 22 हजार राजपूत बच्चों को हिजड़ा बनवाया .बाद में जहाँगीर ने और औरंगजेब ने भी इस परंपरा को चालू रखा .ताकि हिन्दू वंशहीन हो जाएँ .इस से पहले सुल्तान अला उद्दीन खिलजी ने 50 हजार और मुहम्मद तुगकक ने 20 हजार और इतने ही फिरिज तुगलक ने भी हिजड़े बनवाये थे .
यहांतक कुछ ऐसे भी हिजड़े थे जो दिल्ली के बादशाह के सेनापति भी बने ,जैसे अल उद्दीन का सेनापति "मालिक काफूर " हिजड़ा था .और कुतुबुद्दीन का सेनापति "खुसरू खान " भी हिजड़ा ही था .महमूद गजनवी और उसके हिजड़े गुलाम के "गिलमा बाजी" (homo sexual ) प्रेम यानि कुकर्म (Sodomy ) को इकबाल जैसे शायर ने भी आदर्श बताया है .क्योंकि यह कुरान और इस्लाम के अनुकूल है .(नोट -लेख का अंतिम भाग सारांश रूप में है ,पूरा विवरण अंग्रेजी में दी गयी साईट में देखें )
भारत सभी देशभक्त और धर्मप्रेमी लोगों से अनुरोध है कि ,किसी प्रकार के झूठे प्रचार में नहीं फंसें .इस्लाम को ठीक से समझें .आने वाले खतरों से सचेत होकर देश धर्म की रक्षा के लिए कटिबद्ध हो .और जिनको किसी ने हिजड़ा बना दिया हो वह हमें क्षमा करें .

http://islamic-slavery.blogspot.com/
http://www.faithfreedom.org/articles/islamic-jihad-articles/islamic-slavery-part-10-sex-slavery-concubinage-and-ghilman/    

गुरुवार, 12 जनवरी 2012

इस्लाम समर्थक हिन्दू आचार्य ?


आजकल प्रचार का जमाना है .और लोग अपना प्रचार करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं .इसीलिए कुछ मुस्लिम ब्लोगरों ने इस्लाम का प्रचार करने के लिए यही तरकीब अपना रखी है .सब जानते हैं कि अधिकांश हिन्दू संगठन और संस्थाए भी दोगली विचारधारा रखती हैं .और कुछ तथाकथित स्यंभू आचार्य ,और पंडित अपना धर्म बेच चुके है ,और इस्लाम का प्रचार कर रहे है .कुछ दिनों पूर्व " सनातन धर्म इस्लाम " (http://sanatan-dharm-islam.blogspot.com/)के नाम से एक ब्लॉग नजर में आया ,जिसमे किसी अहमद पंडित और किसी लक्ष्मी शंकर आचार्य के साथ कुछ अन्य हिन्दू लेखकों ने मिलकरयह सिद्ध करने का प्रयास किया है ,कि इस्लाम एक उदार धर्म है ,इसमें जबरदस्ती नहीं है .यह हरेक व्यक्ति को अपना धर्म पालन करने की अनुमति देता है .इस्लाम की नजर में सभी मनुष्य समान हैं .इस्लाम लोगों में सद्भावना फैलाना चाहता है .आदि ,इन्हीं बातों प्रमाणित करने के लिए इस ब्लॉग में कुरान शरीफ की कुछ आयतें और विडिओ भी दिए गए है .यहाँ पर ब्लॉग में किये गए दावों की दुर्भावना रहित समीक्षा दी जा रही है ,ताकि उन हिन्दू विद्वानों को सटीक उत्तर दिया जा सके .और सत्यासत्य का निर्णय हो सके .देखिये -
1 - इस्लाम का अर्थ शांति नहीं है .
अभी तक लोग इसी भ्रम में पड़े हुए हैं ,कि इस्लाम का अर्थ शांति है .और इसलिए इस्लाम शांति का धर्म है .लेकिन इस्लाम का वास्तविक अर्थ शांति नहीं बल्कि समर्पण है ."Islam" does not mean "peace" but "submission"जैसा कि कहा जाता है ("السلام" ولكن "تقديم"استسلاما  )इस्लाम शब्द अरबी के तीन अक्षरों (root sīn-lām-mīm (SLM [ س ل م ) से बना है .और कुरान में कई जगह इस्लाम का अर्थ समर्पण ही किया गया है ,सूरा तौबा 9 :29 में इसका अर्थ-
To surrender -اسلام=Submission  बताया है .इसी तरह सूरा आले इमरान 3 :83 में इसका अर्थ अल्लाह का धर्म और सूरा आले इमरान 3 :19 में भी वही अर्थ"islam is surrender  to  allah 's will استسلاما=To surrender "   दिया है .इस्लाम का अर्थ शांति फैलाना कदापि नहीं है .इस शब्द का प्रयोग लोगों को धमकी देकर आत्मसमर्पण (surrender ) करने के लिए किया जाता रहा है ,जो इन हदीसों से सिद्ध होता है .


"रसूल ने यहूदियों से कहा कि यह सारी जमीन मुसलमानों की है .इसलिए तुम इसे खाली कर दो .और इस्लाम कबूल करो .और खुद को अल्लाह के रसूल के सामने समर्पित कर दो " बुखारी -जिल्द 9 किताब 92 हदीस 447 
"एक औरत ने रसूल से पूछा कि इस्लाम क्या है ,तो रसूल ने कहा ,सिर्फ अल्लाह की इबादत करना , रोजा रखना ,जकात देना और खुद को अल्लाह की मर्जी के हवाले कर देना "बुखारी -जिल्द 1 किताब 1 हदीस 47 
"रसूल ने Byzantine ईसाई शाशक "हरकल Harcaleius को सन्देश भेजा ,जिसमे कहा कि मैं अल्लाह का रसूल मुहम्मद तुम्हें चेतावनी देता हूँ ,कि अगर तुम अपनी जान बचाना चाहते हो ,तो समर्पण कर दो .और इस्लाम स्वीकार कर लो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 191 
वह इस्लाम भक्त हिन्दू आचार्य बताएं कि क्या इस्लाम का अर्थ समर्पण करना नहीं है ? और इस्लाम के जन्म से लेकर मुसलमान इसी तरह से विश्व में शांति (अशांति ) नहीं फैला रहे हैं ?
2 -इस्लाम में जबरदस्ती नहीं है 
इन इस्लाम परस्त पंडितों ने जकारिया नायक के सामने मुस्लिमों को खुश करने के लिए यह कह दिया कि इस्लाम में किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं है ,और सबको अपना धर्म पालने की आजादी है .इसके लिए इन लोगों ने कुरान की इन आयतों का हवाला दिया है -
अ -"दीन (इस्लाम ( में कोई जबरदस्ती नहीं है " सूरा -बकरा 2 :256 
ब-"तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन और हमारे लिए हमारा दीन "सूरा -काफिरून 109 :6 
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुरान की सूरतें और आयते घटनाक्रम के अनुसार ( according revelation ) नहीं है .इसलिए इनका सही तात्पर्य और अर्थ समझने के लिए हदीसों का सहारा लेना जरुरी है .पहली आयत 2 :256 यहूदियों से सम्बंधित है .हदीस में कहा है ,
"अब्दुल्ला इब्न अब्बास ने कहा कि इस्लाम से पहले जिन औरतों के बच्चे नहीं होते थे ,या बार बार मर जाते थे ,वह यहूदियों के मंदिर में जाकर रब्बी के सामने यह मन्नत मांगती थीं ,कि अगर मुझे बच्चा होगा ,या मेरी संतान जीवित रहेगी तो उसे मैं यहूदी बनाकर तुम्हारे हवाले कर दूंगी . मक्का में ऐसे बहुत से बच्चे यहूदियों के पास थे . जब इस्लाम आया तो रसूल ने उन सभी बच्चों को यहूदियों से मुक्त कराया और कहा कि " दीन ( मान्यता ) में कोई जबरदस्ती नहीं है " 
अबू दाउद-किताब 14 हदीस 2676 
इसी तरह दूसरी आयत 109 :6 का जवाब उसी सूरा में मिल जाता है ,जिसमे कहा है कि "हे काफिरों मैं उसकी इबादत नहीं करूँगा ,तुम जिसकी इबादत करते हो 
" सूरा -काफिरून 109 :4 .इसी बात को और स्पष्ट करने के लिए कुरान की इस आयत को पढ़िए जो कहती है कि,
"और जो लोग इस सच्चे दीन (इस्लाम )को अपना दीन नहीं मानते ,तुम उनसे लड़ो ,यहाँ तक वह अपमानित और विवश होकर जजिया न देने लगें "
सूरा- तौबा 9 :29 
अब कोई कैसे मान सकता है ,कि इस्लाम बलपूर्वक नहीं फैलाया गया ,और सबको अपने धर्मों के पालन करने की अनुमति देता है ?
3 -इस्लाम वैश्विक भाईचारा चाहता है 


वास्तव में इस्लाम " वैश्विकबंधुत्व "الأخوة العالمية"  universal fraternity" नहीं बल्कि " मुस्लिम भाईचारे "" الاخوان المسلمين"   muslim brotherhood की वकालत करता है . जो इन आयतों से स्पष्ट हो जाती है ,जो कहती हैं .
" ईमान वाले (मुस्लिम ) तो भाई भाई हैं "सूरा -अल हुजुरात 49 :10 
यही बात इन हदीसों में में साफ तौर से कही गयी है ,कि मुसलमान दुसरे धर्म वालों के भाई या मित्र नहीं हो सकते .हदीस में है ,
"रसूल ने कहा कि इमान वालों को सिर्फ इमान वालों से ही दोस्ती करना चाहिए "अबू दाउद -किताब 41 हदीस 4815 और 4832 
"रसूल ने कहा हे ईमान वालो तुम मेरे शत्रुओं ( गैर मुस्लिम ) को अपना भाई या दोस्त नहीं समझो " बुखारी -किताब 59 हदीस 572 
कुरान में गैर मुस्लिमों से दोस्ती न करने का कारण भी दे दिया है और रसूल के स्वभाव के बारे में कहा है कि ,
"मुहम्मद अल्लाह के ऐसे रसूल हैं ,जो काफिरों के प्रति कठोर और अपने लोगों ( मुसलमानों ) के प्रति अत्यंत दयालु हैं "सूरा -अल फतह 48 :29 
सब जानते हैं कि मुसलमान रसूल का अनुकरण करते हैं ,और जब रसूल ही गैर मुस्लिमों से दोस्ती और भाईचारे को बुरा बताते हों ,तो मुसलमानों क्या मजाल जो हिन्दुओं से दोस्ती कर सकें .यही कारण था कि जब केजरीवाल मौलाना अरशद मदनी के पास दोस्ती के लिए गए तो उनको भगा दिया गया .और अन्ना का आन्दोलन फेल हो गया .( जागरण 28 दिसंबर 2011 )याद रखिये गाँधी ने भी यही किया था .
4-विधर्मी भटके लोग और जानवर हैं 
आप सोच रहे होंगे कि इस्लाम गैर मुस्लिमों से मित्रता करने का विरोधी क्यों है .क्योंकि इस्लाम कि नजर में सभी गैर मुस्लिम ,जैसे यहूदी ,ईसाई और हिन्दू भटके हुए लोग और कुत्ते ,बन्दर ,सूअर और चूहे की तरह निकृष्ट प्राणी है .यह कुरान की इन आयातों और हदीसों से सिद्ध होता है .जो कहती हैं कि-
"क्या कभी कोई अँधा और आँखों वाला व्यक्ति बराबर हो सकता है "सूरा -रअद 13 :16 
" निश्चय ही जमीन पर चलने वाले सभी जीवों में अल्लाह कि नजर सबसे निकृष्ट जीव वह लोग हैं जो इस्लाम नहीं लाते"सूरा-अनफ़ाल 8 :55 
"जो इस्लाम को छोड़कर अपनी ही इच्छा पर चलते हैं ,उनकी मिसाल कुते की तरह है .जो अपनी इच्छा पर चलता है "सूरा-आराफ 7 :176 
"जब वह हमारी बात ( इस्लाम लाओ ) छोड़कर ढिढाई से वही पुराना काम करने लगे ,तो हमने (अल्लाह ) कहा जाओ तुम धिक्कारे हुए बन्दर बन जाओ "
सूरा -आराफ़ 7 :166 
"और जब उन लोगों (यहूदी ) हमारे आदेश को नहीं माना तो हमने कहा तुम बन्दर बन जाओ "सूरा -बकरा 2 :65 
"जिन्होंने अल्लाह के आलावा किसी और की इबादत की ,तो उन पर अल्लाह का प्रकोप हुआ .जिस से उन में से बन्दर और सूअर बना दिए गए .
सूरा -अल मायदा 5 :60 .यही बातें इन हदीसों में दी गयी है -
" अबू सईद ने कहा कि रसूल ने कहा "सभी यहूदी और ईसाई भटके हुए लोग है और जानवरों से बदतर है .यह एक दिन गर्त में जा गिरेंगे "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 662 
" अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा यहूदी चूहों की तरह है ,जब इनको बकरी का दूध दिया जाता है ,तो पी लेते है .लेकिन जब ऊंटनी का दूध दिया जाता है तो इनको कोई स्वाद नहीं आता.यानि तौरेत पढ़ लेते हैं लेकिन कुरान से इकार करते है "सही मुस्लिम किताब 42 हदीस 7135 यही कारन है कि मुसलमान हिन्दू ,ईसाई और यहूदी जैसे जानवरों से दोस्ती नहीं करते हैं .
5-अल्लाह भटकाता रहे ,और 
लगता है अल्लाह ने जिस दिन कुरान उतारी थी ,उसी दिन से पृथ्वी से काफिरों ( गैर मुस्लिम ) के सफाया की योजना बना रखी थी .कि वह उनको गुमराह करके उनसे गुनाह ,अपराध कराता रहे .फिर जहाँ भी इस्लामी हुकूमत हो जाये वहां जिहादी किसी न किसी बहाने उनको क़त्ल करते रहें .यह बात कुरान कि इन आयतों से स्पष्ट हो जाता है -
" यदि अल्लाह चाहता तो सबको एक गिरोह बना देता ( ताकि वह सत्कर्म करते ) लेकिन वह जिसको चाहे गुमराही में डाल देता है " 
सूरा-अन नह्ल 16 :93 
" वह लोग बिच में ही डावांडोल रहते हैं ,न इधर के और न उधर के . जिसको चाहे गुमराही में डाल देता है,और जिसे खुद अल्लाह भटका दे उनके लिए कोई रास्ता नहीं रहता "सूरा -अन निसा 4 :143 
"अल्लाह जिसको चाहे उसको भटका देता है ,और जिसको चाहे सन्मार्ग दिखा देता है "सूरा-अल मुदस्सिर 74 :31 
"अल्लाह ने जानबूझ कर उनको सन्मार्ग से भटका दिया है ,और उनके कानों और दिलों पर ठप्पा लगा दिया है "सूरा -अल जसिया 45 :23 
अल्लाह के इस काम में शैतान भी मदद करते रहते हैं .जो इस आयत से पता चलता है .
"क्या तुम नहीं जानते कि हमने इन काफिरों पर अपने शैतानों को छोड़ रक्खा है ,जो इनको गुमराह करते रहते हैं "सूरा -मरियम 19 :83 
काश वह हिन्दू पंडित जकारिया नायक से पूछते कि ,जब खुद अल्लाह ही शैतान के साथ मिलकर लोगों को गुमराह कराता रहता है ,तो असली अपराधी अल्लाह क्यों नहीं है .फिर गैर मुस्लिमों पर हमले क्यों किये जाते हैं ?जैसा कि आगे बताया गया है -
6-जिहादी मारते रहें 
क्या इसी को इस्लामी कानून कहते हैं कि ,करे अल्लाह और भरें हिन्दू या गैर मुस्लिम .फिर भी जिहादी अल्लाह की जगह गैर मुस्लिमों पर जिहाद करते रहते हैं .जैसा कि कुरान की इन आयतों में लिखा है ,
"हे ईमान वालो तुम उन सभी काफिरों से लड़ते रहो जो तुम्हारे आस पास रहते हों "सूरा -तौबा 9 :123 
"जो इमान वाले हैं ,वह हमेशा अल्लाह के लिए लड़ते रहते है "सूरा -निसा 4 :76 
"जहाँ तक हो सके तुम हमेशा सेना और शक्ति तैयार रखो ,और काफिरों को भयभीत करते रहो "सूरा -अनफाल 8 :60 
" हे नबी तुम काफिरों और मुनाफिकों के साथ सदा जिहाद करो और उन पर सख्ती करते रहो "सूरा -अत तहरिम 66 :9 .और सूरा तौबा 9 :73 
"तुम उनसे इतना लड़ो की वह बाकि न रहें ,और सभी धर्म इस्लाम हो जाएँ "सूरा -अन्फाल 8 :39 और सूरा -बकरा 2 :193 
"हे नबी तुम ईमान वालों को हमेशा लड़ाई करने पर उकसाते रहो "सूरा -अन्फाल 8 :63 


अब पाठकों से विनम्र नवेदन है कि वह पहले ऊपर दिए गए "सनातन धर्म इस्लाम "में दिए गए हिन्दू पंडितों के तर्कों को पढ़े ,फिर निष्पक्ष होकर कुरान की दी गयी आयतों को पढ़ें . फिर अपना निर्णय टिपण्णी के रूप में देने की कृपा करें .अथवा ,प्रथम अनुच्छेद में जिस ब्लॉग का हवाला दिया गया है ,उसमे उन पंडितों और आचार्यों के पते दिए गए हैं ,जो इस्लाम के भक्त है .आप उन से सवाल कर सकते हैं .




http://www.thereligionofpeace.com/Pages/Quran-Hate.htm



मंगलवार, 3 जनवरी 2012

अय्याशी से मरे जिहादी शहीद हैं !!



आजकल मुस्लिम नौजवान जिहादियों का अंजाम देखकर भी लव जिहाद कर रहे हैं .और इसे एक धार्मिक कार्य मान रहे हैं .और सोच रहे हैं कि ऐसा करने से उनको मरने के बाद शहीद का दर्जा मिल जायेगा .और वे जन्नत में अय्याशी कर सकेंगे .
आपने यह प्रसिद्ध कहावत जरुर सुनी होगी "हर्र लगे न फिटकरी ,रंग पक्का हो जाये "यह कहावत इस्लाम में जिहाद सम्बन्धी मान्यताओं पर सटीक उतरती है .इस बात को स्पष्ट करने के लिए हमें कुरान और कुछ प्रमुख हदीसों का हवाला होगा ,जिसे बिन्दुवार दिया गया है .
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है 
इस्लाम में जिहाद को अनिवार्य ,और अल्लाह की नजर में सबसे प्रिय कार्य बताया गया है .कुरान में कहा है कि,
"अल्लाह उन लोगों लो प्यार करता है ,जो पंक्ति बनाकर जिहाद करते है "सूरा-अस सफ्फ 61 :4 
"जिहाद करना अल्लाह कि नजर में सबसे प्रिय कार्य है "सूरा -तौबा 9 :24 
आजकल जकारिया नायक जैसे इस्लामी प्रचारक यह कहते हुए नहीं थकते कि ,जिहाद असल में एक संघर्ष (struggle ) है जो धर्म की रक्षा करने ,अपना बचाव करने ,पीड़ितों को उनका अधिकार दिलवाने और शांति स्थापना के लिए किया जाता है .लेकिन जिहाद का असली मकसद कुछ और ही है ,जो यहाँ दिया जा रहा है .
2-जिहादियों के लिए प्रलोभन 
लोग देश ,धर्म और न्याय की रक्षा के लिए बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते है ,यहाँतक अपने प्राणों का बलिदान कर देते है .अगर जिहाद का यही मकसद है तो ,अल्लाह जिहादियों को लालच क्यों देता है .जैसा कुरान और इन हदीसों में है -
"जितने भी लोग अपनी जान लगाकर जिहाद करेंगे उनके लिए फायदा ही फायदा होगा "सूरा -तौबा 9 :88 
"हे रसूल कहो जो व्यक्ति जिहाद के लिए हथियार खरीदने के लिए एक दिरहम देगा ,तो जीत के बाद उसे एक दिरहम के बदले 70 हजार दीनार दिए जायेंगे "
इब्न माजा -किताब 4 हदीस 2761 
"रसूल ने कहा कि जो व्यक्ति जिहाद के लिए बाहर जायेगा तो ,अल्लाह उसके घर कि रक्षा करेगा .और जब वह वापस आयेगा तो उसे लूट का माल और साथ में औरतें भी मिलेंगीं "मुस्लिम -किताब 3 हदीस 4626 
"रसूल ने कहा मैं तुम्हें एक खुशखबरी देता हूँ ,जब मुजाहिद वापिस आएंगे तो उनके लिए बगीचे तैयार मिलेंगे "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 48 
"इसी प्रकार ''सर्वोत्तम जिहाद वह है जिसमें घोड़ा और सवार दोनों ही घायल हो जायें।'' इब्न माजाह, खं. 4 हदीस 2794, 
3-अय्याशी के लिए जिहाद 
इस्लाम में औरतों को माल (property -booty  ) माना जाता है .जिहादी सबसे पहले औरतें ही पकड़ते हैं .ऐसी पकड़ी गयी औरतों को लौंडी कहा जाता है ,या रखैल कहते हैं .इन से सहवास करना कुरान में जायज कहा है .और जब औरत से मन भर जाता था तो उनको बेच देते है ,कुरान की तरह, हदीसों में भी विजित गैर-मुसलमानों के धन, सम्पत्ति व स्त्रियों पर विजेता मुसलमानों का अधिकार होगा.चूंकि जिहादियों को असीमित अय्याशी करने की सुविधा शहीद हो जाने पर जन्नत में ही मिल सकती थी .इसलिए मुसलमानों ने यहीं पर भोग विलास की तरकीब निकाल ली .और पकड़ी गयी औरतों से सहवास जो जायज बना दिया ,यह बार मिर्जा ग़ालिब ने फारसी में लिखा है , 
"सुखने सादा दिलम रा न फरेबदअय ग़ालिब ,बोसये चंद नकद गंज दिहाने बिमन आर "यानि मेरा दिल उधार बातों से नहीं फिसलता ,मुझे तो किसी सुंदरी का नकद चुम्बन चाहिए "कुरान ने जिहादियों को यही देनेका वादा किया है .इसीलिए जिहाद हो रहा है .सबूत देखिये ,
"हमने तुम्हें युद्ध में पकड़ी हुई औरतें (लौंडियाँ ) हलाल कर दी हैं ,और अगर ( इस्तेमाल के बाद ) तुम्हें वह पसंद नहीं आयें ,तो तुम दूसरी औरतें बदल सकते हो " 
सूरा -अहजाब 33 :52 
"अपनी पत्नियों के साथ जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों ,उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है "सूरा -मआरिज 70 :30 
इस तरह सिर्फ जिहादी ही अय्याशी नहीं करते हैं ,उनके नाबालिग लडके भी यही करते हैं ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
"रसूल ने कहा कि क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ने पकड़ी गयी औरतें काफिरों को अपमानित करने के लिए ही तुम्हारी सेवा में दी है " 
बुखारी -जिल्द 1 किताब 3 हदीस 803 
"रसूल ने कहा कि तुम्हारा अवयस्क लड़का भी बिस्तर (Bed ) का मालिक है .और वह भी पकड़ी गयी औरतों से अवैध सहवास कर सकता है " 
बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 808 
The Prophet said, "The boy is for the owner of the bed and the  for the person who commits illegal sexual intercourse."Hadith-vol bk8. hadith no808 Al-Bukhari 
इसी शिक्षा के कारण छोटे बड़े सभी अय्याशी करने में व्यस्त हो गए .और जन्नत को भूल गए .
4-जिहाद से अरुचि 
कहावत है कि "जहाँ भोग वहां रोग " जब जिहादी असीमित अय्याशी करने लगे तो भिभिन्न रोगों में ग्रस्त हो गए .और उचित इलाज न मिलाने से बीमार होगर जिहाद से विमुख हो गए .उसी समय एक सहाबी "अबू उबैदा अम्मार बिन इब्नल जर्राह (583-638)" यौन रोग से ग्रस्त हो गया .जो बाद में मर भी गया था .तो जिहादियों में भय व्याप्त हो गया ,वह अगले जन्म कि इच्छा करने लगे .तब मुहम्मद ने उन लोगों से यह कहा कि ,
"जो इस दुनिया में मर कर दूसरी दुनिया में फिर से आने कि कमाना रखता है ,उसे अल्लाह रह में जिहाद करते हुए कम से कम दस बार मरना पड़ेगा "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 72 
"रसूल ने कहा कोई व्यक्ति मर कर दोबारा इस दुनिया में फिर से तब तक नहीं असकता ,जब तक वह अल्लाह कि रह में मर कर जिहादियों में वरीयता प्राप्त नहीं कर लेता "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 53 
5 -जिहादियों की पाठ्यपुस्तक 
मुहम्मद हर हालत में जिहाद चालू रखना चाहता था .और जब लोग काफी अशक्त हो गए तो मुहमद ने उन लोगों से कहा कि ,
"जो जिहादी पेट के रोग ,प्लेग ,या यौन रोगों के कारण मर जायेगा ,उसे भी शहीद माना जायेगा और वह भी जन्नत का अधिकारी होगा ,जहाँ उसे सारी सुविधाएँ मिलेंगी "बुखारी -जिल्द 1 किताब 7 हदीस 629 
उस समय मुहम्मद ने जिहादियों का हौसला बढ़ने के लिए कई ऐसी ही हदीसें कही थीं .जिसे बाद में "(ابو زكريا يحي بن يوسف انووي ادّمشقي )इमाम अबू जकारिया याहया बिन यूसुफ अन नववी दमिश्की (1234 -1278 ) ने हिजरी 676 में सीरिया में संकलित किया था .इस हदीस के संकलन का नाम " रियाज उस्सालिहीनRiyadh as-Saaliheen رياض الصالحين" है .इसीको जिहादियों की पाठ्य पुस्तक (The Gardens of the Righteous ) कहा जाता है .इसमे कुल 19 अध्याय है .और 11 अध्याय के भाग 235 में हदीस संख्या 1353 से लेकर 1357 तक अनेकों रोग से मरने वाले जिहादियोंको शहीद बताया गया है .विषय संख्या 235 की 5 हदीसों का शीर्षक है "martyrdom without fight " उसी का सारांश हिंदी में दिया जा रहा है (अंगरेजी में पूरी किताब की लिंक दी गयी है )देखिये कुकर्म करके मरने वाले भी शहीद कैसे बन जाते हैं ,और जानत में कैसे घुस जाते हैं
"अबू हुरैरा नेकहा किरसूल ने कहा कि शहीद पांच कारणों से हो सकते है ,प्लेग से , पेट के रोगों के कारण,अति सहवास के कारण ,मकान बनाते समय मलबे से दब कर और अल्लाह के लिए लड़ते हुए मरने वाले "हदीस -1353 
"अबू हुरैरा ने रसूल से पूछा कि आप हम लोगों में किसको शहीद गिनोगे ,तो रसूल ने कहा ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो अल्लाह की राह में लड़ कर मर कर शहीद होंगे .कुछ बीमारियों के कारण भी शहीद हो जाते हैं ,जैसे प्लेग से ,तपेदिक से ,यौन रोगों के कारण और पानी में डूब कर मरने वाले भी शहीद माने जायेंगे "
 हदीस -1354 
बाकी तीन हदीसों ,1355 ,1356 और 1357 में अपनी सम्पति ,अपने परिवार कि रक्षा में मरने वाले को और दुश्मन से लड़ते हुए मर जाने वालों को भी शहीद का दर्जा देकर जन्नत का अधिकारी बताया गया है .इसलिए यह हदीसें अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं .इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि यह बात झूठ है कि जिहादी अल्लाह की राह में बिना किसी लोभ और स्वार्थ के जिहाद करते हैं .और मर जाने पर शहीद कहलाते हैं .जबकि अधिकांश जिहादी अय्याशी करके अनेकों रोग होने से भी मर जाते थे .चूँकि उस समय एड (AIDS ) के बारे में पता नहीं था ,इसलिए यौन रोगों को तपेदिक ,प्लेग या गुर्दे का रोग कहा दिया होगा .आज भी मुस्लिम देशों में ऐसे रोगियों से अस्पताल भरे पड़े हैं .फिर भी इन्हीं हदीसों के कारण मुसलमान अय्याशी को ही जिहाद का रूप समझते हैं .इसका परिणाम सद्दाम हुसैन ,कर्नल गदाफी ,ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया जानती है .औरतबाजी का बुरा नतीजा होता है .और इसमे शक नहीं कि लवजिहाद कभी यही अंजाम होगा !
जो व्यक्ति अय्याशी को जिहाद और एड्स से मरने वालों को शहीद मानता है उसका दिमाग ख़राब होगा .

http://www.witness-pioneer.org/vil/hadeeth/riyad/11/chap235.htm