बुधवार, 23 नवंबर 2011

आतंकवाद की सुनामी !


सुमानी लहरों की तरह इस्लाम भी जहाँ जाता है ,वहां सिवाय बर्बादी के कुछ भी नहीं बचताहै .लोगों को जापान की सुनामी को देखकर उसकी भयानकता का अंदाजा कर लिया होगा .जापान की सुनामी एक प्राकृतिक आपदा थी ,किसका जापान के लोगों ने हिम्मत से सामना किया और उसपर काबू कर लिया है .लेकिन लोगों को यह पता नहीं है कि जल्द ही भारत में इस्लामी आतंक की सुनामी आनेवाली है .और यह सुनामी प्राकृतिक नहीं ,बल्कि यहाँ के मुसलमानों ,और हमारी अदूररदर्शी सरकार द्वारा बुलवाई जाएगी .लेकिन हम खतरे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं .और अपनी आँखें बंद करके बैठे हैं .हम आये दिन सुनते रहाहे हैं कि,भारत में जिहादियों का दल प्रवेश कर चूका है ,जो कभी भी और कहीं भी वारदात कर सकता है .सरकार यह भी जानती है कि ,इन जिहादियों को बाहर से आर्थिक मदद और देश के मुसलमानों का समर्थन प्राप्त है .क्योंकि बिना उनकी मदद से बड़े पैमाने पर आतंकी वारदातें संभव नहीं हो सकती हैं , 
1 -इस्लामी सुनामी का दायरा 
भारत का आज कोई स्थान बाकी नहीं रह गया है जो ,इस्लाम की सुनामी के दायरे में नहीं हो .हमारी संसद ,दिल्ली के बाजार ,मुंबई की लोकल ट्रेन ,लालकिला ,अक्षरधाम ,बनारस के घाट ,शिवाजी टर्मिनस ,ताजमहल होटल ,सेना के कैम्प ,हमारे सैनिक और निर्दोष नागरिक सब इस्लामी सुनामी के निशाने पर हैं .लेकिन हमारी सेकुलर सरकार इतनी अंधी है कि,किसी बड़ी वारदात का इन्तेजार कर रही है .हमारी न्याय व्यवस्था इतनी सुस्त है कि जब कोई वारदात होती है तब तक अपराधी भाग चुके होते हैं .फिर जब बड़ी मुश्किल से पकडे जाते हैं तो ,उनको सजा दिलवाने में बरसों लग जाते हैं .और सजा देने की बजाये उनको सरकार के मेहमान की तरह रखा जाता है .और उनपर करोड़ों रूपया खर्च कर दिया जाता है .और उनको सजा दिलाने की जगह बचने की कोशिश की जाती है. अपराधियों को इतना लम्बा अवसर दिया जाता है ,कि उनका हौसला और बढ़ जाता है .कि वह किसी को बंधक रखकर सरकार पर दवाव डाल कर अपनी रिहाई का सौदा कर सकें .फिर उस से बड़ी वारदात कर सकें .लेकिन ऐसा इसलिए नहीं हो सकता है ,क्योंकि सरकार मुसलमानों के वोट नहीं खोना चाहती है .और जादातर नेता दोगले और सत्ता के लोभी हैं . 
2 -सरकार की आतंकियों से हमदर्दी ?
सरकार बरसों तक आतंकियों को जेलों में रखकर उनको मेहमान की तरह पालती रहती है ,और उनका परोक्ष समर्थन कराती है .यही कारण था जिस से कंधार अपहरण कर्ताओं को छोड़ना पड़ा था .और महबूबा मुफ्ती के बदले आतंवादियों को रिहा कर दिया गया था .सब को पता है कि जब भी ऐसे आतंकियों को रिहा किया गया ,वह और मजबूती से और दोगुनी ताकत से और संगीन वारदातों को अंजाम देते रहे हैं .अज भी अफजल गुरु का मामला लटक रहा है .हमें सरकार कि मंशा पर शक हो रहा है कि ,वह अफजल को सजा देना चाहती है ,या उसे भाग जाने का मौका देना चाहती है ,यही बात अजमल कसाब के बारे में है .यदि सरकार की मंशा में खोट नहीं होती तो .वह अदालत से सरे काम छोड़कर मामले को जल्दी निपटा देती .लेकिन गृह मंत्रालय अपराधियों को बचाने के रास्ते खोज रही है .
3 -कांगरेस आतंकियों को क्यों बचाना चाहती है ?
विकी लीक्स ने गुप्त दस्तावेजों से खुलासा किया है कि,केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद के अफजल गुरु की फांसी की दया की याचिका के लिए सरकार पर दवाब डाला था ,और कहा की यदि सरकार अफजल को फंसी की सजा होने देती है तो ,कांगरेस का पारंपरिक मुस्लिम वोट हाथों से निकल जायेगा .जबकि तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुलकलाम फाँसी के पक्ष में थे .लेकिन सोनिया ने फांसी की सजा को रुकवा दिया था .
4 -आतंकी फिर क्यों सर उठा रहे हैं ?
जैसे ही गोधरा काण्ड का फैसला आया ,मुल्ले मौलवी अपराधियों को बचाने की तरकीबे सोचने लगे हैं .और छाहते हैं देश में फिर से दंगा कराकर लोगों का ध्यान बटाया जाये .और दंगा कर के अपराधियों को छुड़ा लिया जाये .
दैनिक जागरण 16 मार्च 2011 के अनुसार सहारण पुर में जमीअत उलमा ए हिंद के सदर मौलाना अरशद मदनी ने कहा की महात्मा गाँधी की हत्या सरदार पटेल ने करवायी थी .क्योंकि वह भारत में मुसलमानों को नहीं रहना चाहते थे .मदनी ने यह बयान 15 /3 /2011 मंगलवार को इस्लामिया इंटर कालेज में दियाथा .मदनी ने दावा किया की सरदार ने गाँधी पर दो बार बमों से हमला करवाया था .और आखिर में गाँधी को शहीद करावा दिया .
मुलाना ने यह भी कहा की .मुसलमानों ने अपनी कुर्बानियों से देश को आजाद कराया था ,लेकिन हिन्दू उनका नाजायज लाभ उठा रहे हैं .यदि मुसलमान अपने बुजुर्गों की कुर्बानियों को याद रखेंगे तो देश पर फिर से उनका अधिकार हो जायेगा .
बड़े शर्म की बात है की ,यह सब जानकर भी कांगरेसियों का कोई मई का लाल एक भी शब्द कहने की हिम्मत नहीं कर सका .सबको सांप सूँघ गया .यदि यही बात किसी हिन्दू ने कही होती तो कांगरेसी नंगे नाचने लगते 
.दिनांक 23 नवम्बर 2011 को आज तक टी वी में पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में जो रिपोर्ट और विडिओ दिया है ,उस से हरेक का दिल दहल जायेगा .फिर भी भारत के सेकुलर लोग नादान हिन्दू ,पाकिस्तान से जान और धर्म बचाकर 239 उन हिन्दू लोगों की दुर्दशा देख कर भी सबक नहीं लेते .याद रखिये जब तक मुसलमान अल्पसंख्यक रहते हैं ,तब तक भाईचारे का ढोंग करते है .लेकिन जैसे ही उनकी संख्या बढ़ जाएगी यहाँ के हिन्दुओं की वैसी ही दशा हो जाएगी ,जैसी पाकिस्तान के हिन्दुओं की हो गयी है .समझदारों को इशारा ही बहुत होता है , आज तक के इस शीर्षक को पढ़िए और दिए गए विडिओ को ध्यान से देखिये .-
5-पाकिस्‍तान में जुल्‍म-ओ-सितम झेलते हिन्‍दू !


http://aajtak.intoday.in/videoplay.php/videos/view/68723/2/206/Pakistan-Hindus-urge-govt-to-take-steps-to-end-communal-violence.html




हिन्दुओ तुम्हें बर्बाद करने के लिए क्षद्म सेकुलरिज्म और जिहादी आतंकवाद की सुनामी कभी भी आ सकती है !


जापान तो सुनामी से बच गया ,लेकिन इस्लामी सुनामी से देश को कौन बचाएगा ?

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

बाइबिल कुरआन एक सामान !


ईश्वर और अल्लाह एक सामान हैं , इसका कोई प्रमाण नहीं है .लेकिन बाइबिल और कुरान की शिक्षा की तुलना करने पर यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है कि बाइबिल का खुदा (God ) और कुरान का अल्लाह एक ही है .
मुस्लिम विद्वान् कहते हैं कि कुरान अल्लाह की किताब है ,जो अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद के ऊपर नाजिल कि थी .लेकिन यदि हम कुरान और बाइबिल की शिक्षा और कहानियों को ध्यान से पढ़ें तो उनमे काफी समानता मिलती है .इस बात को सभी मानते हैं कि बाइबिल कुरान से काफी पुरानी है .बाइबिल के दो भाग हैं , पुराना नियम और नया नियम .पुराने नियम को यहूदी "तनख תנך" कहते हैं ,इसमे 39 किताबें शामिल हैं .पुराना नियम करीब 535 ई .पू में सकलित हो चूका था .और नए नियम में 27 किताबें शामिल हैं ,जो सन 66 संकलित हो चुकी थी .और यूरोप के अलावा अरब में भी प्रचलित थीं .इस्लाम के अनुसार पुराने नियम में तौरेत और जबूर आती हैं ,और नए नियम को इंजील कहा जाता है .अरब के लोग इन किताबों से अच्छी तरह परिचित थे .कुरान की पहली आयत सन 610 में उतरी थी ,और मुहम्मद की मौत सन 632 तक कुरान की आयतें उतरती ( बनती )रहीं .जिनका सन 644 में खलीफा उस्मान बिन अफ्फान ने संकलन किया था .
आज की कुरान में कोई मौलिकता (Originality ) नहीं दिखाई देती है ,सब बाइबिल से ली गयी हैं .यद्यपि किसी भाषा के टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ज्यों का त्यों अनुवाद करना असंभव होता है ,लेकिन उनके भावार्थ में समानता दिखाई मिल जाती है . यही बात कुरान और बाइबिल के बारे में लागु होती है .दौनों के विचारों में असाधारण समानता से सिद्ध होता है ,कि मुहम्मद ने कुरान की रचना बाइबिल से प्रेरणा लेकर की थी .सिफ कुछ थोड़ी सी बातें ऐसी थी ,जो मुहम्मद ,और अरब लोगों से सम्बंधित है .यहाँ पर कुछ उदहारण दिए जा रहे हैं ,जिन से पता चलता है कुरान ऊपर से नहीं उतरी ,बल्कि नीचे ही बैठकर बाइबिल से मसाला लेकर बनायी होगी .और हमें कहना ही पड़ेगा "God और अल्लाह एक ही काम " क्यों ,आप ही  .देखिये 
 1-औरतों का हिस्सा पुरुषों से आधा होगा 
कुरान -"एक पुरुष का हिस्सा दो औरतों के हिस्से के बराबर होगा "सूरा -निसा 4 :11 
बाइबिल -यदि उनकी आयु 20 साल से अधि हो तो ,पुरुषों के लिए 20 शेकेल और औरतों के लिए 10 शेकेल ठहराए जाएँ " लैव्य व्यवस्था .27 :5 
2-माहवारी के समय औरतों से दूर रहो 
कुरान -"वह औरतों की माहवारी के बारे में पूछते हैं ,तो कह दो यह तो नापाकी है ,तो औरतों की माहवारी के समय उनसे अलग रहो "
सूरा -बकरा 2 :222 
बाइबिल -"जब कोई स्त्री ऋतुमती हो ,तो वह सात दिनों तक अशुद्ध मानी जाये .और जो कोई भी उसे छुए वह भी अशुद्ध माना जाये "
लैव्य व्यवस्था -15 :19 
3-औरतें खुद को छुपा कर रखें 
कुरान -"हे नबी ईमान वाली औरतों से कहदो कि जब वह घर से बहार निकलें तो ,अपने ऊपर चादर के पल्लू लटका लिया करें "
सूरा -अहजाब 33 :59 
बाइबिल -स्त्री के लिए उचित है कि वह आधीनता का चिन्ह ओढ़नी अपने सर पर रख कर बाहर निकलें " 1 कुरिन्थियों 11 :11 
4-अल्लाह गुमराह करता है 
कुरान -शैतान ने कहा ,हे रब जैसा तूने मुझे बहकाया है ,उसी तरह में छल करके लोगों को बहकाऊँगा " सूरा -अल हिज्र 15 :39 
"उन लोगों के दिलों में बीमारी थी ,अल्लाह ने उनकी बीमारी और बढा दी "सूरा -बकरा 2 :10 
बाइबिल -फिर खुदा ने उनकी आँखें अंधी और दिल कठोर बना दिए ,जिस से वह न तो आँखों से देख सकें और न मन से कुछ समझ सकें "
यूहन्ना -12 :40 
"यदि हमारी बुद्धि पर परदा पड़ा हुआ है ,तो यह खुदा के कारण ही है .और संसार के ईश्वर ने लोगों की बुद्धि को अँधा कर दिया है "
2 कुरिन्थियों 4 : 3 -4 
5 -विधर्मियों को क़त्ल कर दो 
कुरान -"और उनको जहाँ पाओ क़त्ल कर दो और घरों से निकाल दो "सूरा -बकरा 2 :191 
"काफिरों को जहाँ पाओ ,पकड़ो और उनका वध कर दो "सूरा -निसा 4 :89 
"मुशरिकों को जहाँ पाओ क़त्ल कर दो ,उन्हें पकड़ो ,उन्हें घेरो ,उनकी जगह में घात लगा कर बैठे रहो "सूरा -तौबा 9 :5 
बाइबिल -"अगर पृथ्वी के एक छोर से दूरारे छोर तक दूसरे देवताओं के मानने वाले हो ,तो भी उनकी बात नहीं मानो,और न उनपर तरस खाना .न उन पर दया दिखाना .औं न उनको शरण देना .बल्कि उनकी खोज करके उनकी घात अवश्य करना .और उनका पता करके उनका तलवार से वध कर देना "व्यवस्था विवरण -13 :6 से 13 
"जोभी यहोवा की शरण को स्वीकार नहीं करें ,उनको क़त्ल कर दो ,चाहे उनकी संख्या कम हो ,या अधिक .और चाहे वह पुरुष हों अथवा स्त्रियाँ हों " 2 इतिहास 15 :13 
6-विधर्मी नरक में जलेंगे 
कुरान -मुनाफिकों का ठिकाना जहन्नम है ,और वह बुरा ठिकाना है "सूरा -तौबा 9 :73 
"काफिरों और मुनाफिकों ठिकाना जहन्नम है ,जहाँ वह पहुँच जायेंगे " सूरा -अत तहरीम 66 :9 
बाइबिल -जो पुत्र को नहीं मानता,उस पर परमेश्वर का क्रोध बना रहेगा " यूहन्ना 3 :37 
"फिर उन लोगों से कहा जायेगा ,हे श्रापित लोगो हमारे सामने से निकलो ,और इस अनंत आग में प्रवेश करो ,जो शैतान और उसके साथियों के लिए तय्यार की गयी है " मत्ती -25 :41 
7-विधर्मियों से दोस्ती नहीं करो 
कुरान -ईमान वालों को चाहिए कि वे काफिरों को अपना संरक्षक और मित्र न बनायें ,और जो ऐसा करता है उसका अल्लाह से कोई नाता नहीं रहेगा "
 सूरा -आले इमरान 3 :28 
बाइबिल -अविश्वासियों के साथ बराबर का व्यवहार नहीं करो ,इसलिए यातो तुम उनके बीच से निकलो ,या उनको अपने बीच से निकाल डालो .अन्धकार और ज्योति का क्या सम्बन्ध है ." 2 कुरिन्थियों 6 :14 से 17 
8-कलमा की प्रेरणा भी बाइबिल से 
मुसलमानों का मूलमंत्र या कलमा दो भागों से बना हुआ है जो इस प्रकार है" لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِؕ "
 "ला इलाह इल्लल्लाह -मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह "अर्थात नहीं हैं कोई इलाह मगर अल्लाह ,और मुहम्मद अल्लाह का रसूल है .कलामे दूसरा भाग मुहम्मद ने खुद जोड़ लिया था .जबकि पहला भाग बाइबिल में काफी पहले से मौजूद था .यहाँ पर मूल हिब्रू के साथ अरबी और अंगरेजी भी दिए जा रहे हैं .
Hear, O Israel,  the LORD our God— the LORD is ONE  -Deuteronium 6:4
"اسمع يا إسرائيل ، الرب إلهنا، رب واحد "
""शेमा इस्रायेल यहोवा इलोहेनु अदोनाय इहद "
"שְׁמַע, יִשְׂרָאֵל: יְהוָה אֱלֹהֵינוּ, יְהוָה אֶחָד "


He is the God , and there is no other god beside him.
"" हू एलोहीम व् लो इलोही लिदो "
"انه هو الله ، وليس هناك إله غيره بجانبه."
הוא האלוהים של כל בשר, ואין אלוהים לידו 
http://www.nabion.org/html/the_shema
इन सभी प्रमाणों से साफ सिद्ध हो जाता है कि मुहम्मद को कुरान बनाने कि प्रेरणा बाइबिल से मिली थी .बाकि बातें उसने अपनी तरफ से जोड़ दी थीं .क्योंकि दौनों में एक जैसी बातें दी गयी हैं .केवल इतना अंतर है कि यहूदी ऐसी अमानवीय बातों पर न तो अमल करते हैं और न दूसरों को मानने पर मजबूर करते हैं .इन थोड़े से यहूदियों ने हजारों अविष्कार किये है ,जिन से विश्व के सभी लोगों को लाभ हो रहा है .लेकिन दूसरी तरफ इतने मुसलमान हैं ,जो कुरान की इसी शिक्षा का पालन करते हुए विश्व का नाश करने पर तुले हुए है .इसी तरह मुट्ठी बार पारसियों ने देश की उन्नति के लिए जो किया है उसे सब जानते हैं .
अगर  बाइबिल की बुरी बातें छोड़ कर अच्छी बातें कुरान में लिख देता तो विश्व में सचमुच .शान्ति हो गयी होती 
नक़ल के साथ अकल होना भी जरुरी  है 


http://dwindlinginunbelief.blogspot.com/2008/07/things-on-which-bible-and-quran-agree.html




सोमवार, 14 नवंबर 2011

मेराज का असली राज़ !


मेराज अरबी भाषा का शब्द है , वैसे तो इसका अर्थ "Ascension " या आरोहण होता है .लेकिन इस्लामी विद्वान् इसका तात्पर्य "स्वर्गारोहण "करते हैं .इनकी मान्यता है कि मुहम्मद एकही रात में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर आये थे और वहां स्थित अक्सा नाम की मस्जिद में नमाज नमाज भी पढ़ कर आये थे,जो एक महान,चमत्कार था .लेकिन सब जानते हैं कि केवल मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है .मुहम्मद की इस तथाकथित "मेराज " का असली राज (रहस्य ) क्या है ,यह आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है .
यह कहावत प्रसिद्ध है कि"झूठ के पैर नहीं होते "इसका तात्पर्य है कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए या दूसरों को प्रभावी करने के लिए झूठ बोलता है ,अथवा गप्प मरता है ,तो उसका ऐसा झूठ अधिक समय तक नहीं चलता है .और एक न एक दिन उसके झूठ का भंडा फूट ही जाता है .
मुहम्मद एक गरीब बद्दू परिवार में पैदा हुआ था ,और उसके समय के यहूदी और ईसाई काफी धनवान थे .और मुहम्मद उनकी संपत्ति हथियाना चाहता था .इसलिए सन 610 में मुहम्मद ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया ,ताकि वह यहूदी और ईसाई नबियों के बराबरी करके लोगों को अपना अनुयायी बना सके .लेकिन जब लोगों को मुहम्मद की बे सर पैर की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो ,ने एक चल चली .तब तक मुहम्मद की नुबुवत को 12 साल हो चुके थे .मक्का के लोग मुहम्मद को पागल और जादूगर समझते थे ,इसलिए मुहम्मद ने लोगों का मुंह बंद करने के 27 तारीख रजब (इस्लाम का सातवाँ महीना ) सन 621 ई० को एक बात फैला दी ,कि उसने एक दिन में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर डाली है .जिसकी दूरी आज के हिसाब से लगभग 755 मील या 1251 कि.मी होती है .मुहम्मद की इस यात्रा को "मेराज معراج" कहा जाता है .मुहम्मद ने लोगों से कहा कि उसने यरूशलेम स्थित यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र मंदिर में नमाज भी पढ़ी ,जिसका नाम यह है .
Temple in Jerusalem or Holy Temple (Hebrew: בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ, Beit HaMikdash ;बैत हमिकदश 
Al-Aqsa Mosque (Arabic:المسجد الاقصى al-Masjid al-Aqsa, मस्जिदुल अक्सा 
फिर मुहम्मद ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए यरूशलेम की तथाकथित मस्जिद और यात्रा का पूरा विवरण लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया .मुहम्मद के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए पहले हम इस यात्रा के बारे में कुरान और हदीस से सबूत देखेंगे फिर इतिहास से प्रमाण लेकर सत्यता की परख करते हैं .और निर्णय पाठक स्वयं करेंगे .
1 -मुहम्मद की यरूशलेम यात्रा 
मुहम्मद की मक्का के काबा से यरूशलेम स्थित अक्सा की मस्जिद तक की यात्रा के बारे में कुरान यह कहता है ,
"महिमावान है वह अल्लाह जो अपने रसूल मुहम्मद को "मस्जिदे हराम (काबाكعبه )से(मस्जिदे अक्सा "(यरूशलेम )की मस्जिद तक ले गया .जिस को वहां के वातावरण को बरकत मिली .ताकि हम यहाँ के लोगों को वहां की निशानियाँ दिखाएँ " सूरा -बनी इस्रायेल 17 :1 
2 -मुहम्मद की सवारी क्या थी 
इतनी लम्बी यात्रा को एक दिन रात पूरा करने के लिए मुहम्मद ने जिस वहां का प्रयोग किया था ,उसका नाम "बुर्राकبُرّاق "था .इसके बारे में हदीस में इस प्रकार लिखा है .
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा था मुझे बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के बुर्राक नाम का जानवर दिया गया था ,जो खच्चर (Mule) से छोटी और गधी से कुछ बड़ी थी .और जब मैं बुर्राक पर बैठा तो वह मस्जिद की सीढियां चढ़ गया ,फिर मैंने masjidمسجد  के अन्दर दो रकात नमाज पढ़ी .और जब मैं मस्जिद से बाहर जाने लगा तो जिब्राइल ने मेरे सामने दो कटोरे रख दिए ,एक में शराब थी और दुसरे में दूध था ,मैंने दूध ले लिया .फिर जिब्रील मुझे बुर्राक पर बिठाकर मक्का छोड़ गया ,फिर दौनों जन्नत लौट गए "सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 309 
3-लोगों की शंका और संदेह 
लोगों को मुहम्मद की इस असंभव बात पर विश्वास नहीं हुआ ,और वह मुहम्मद को घेर कर सवाल करने लगे ,तब मुहम्मद ने कहा ,
"जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,कि रसूल ने कहा जब कुरैश के लोगों ने मेरी यरूशलेम कि यात्रा के बारे में संदेह जाहिर किया ,तो मैं काबा के पास एक पत्थर पर खड़ा हो गया .और वहां से कुरैश के लोगों को बैतुल मुक़द्दस का आँखों देखा विवरण सुनाने लगा ,जो मैंने वहां देखा था "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 6 हदीस 233 
"इब्ने अब्बास ने कहा जब रसूल से कुरैश के लोगों ने सवाल किया तो रसूल उन सारी जगहों का वर्णन सुनाने लगे जो उन्होंने यरूशलेम स्थित बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के समय रास्ते में देखी थीं .फिर रसूल ने सबूत के किये कुरान की सूरा इस्रायेल 17 :60 सुनादी .जिसमे अल्लाह ने उस जक्कूम के पेड़ पर लानत की थी ,जो रसूल को यरूशलेम के रास्ते में मिला था "बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 228 
इस हदीस में कुरान की जिस आयत को सबूत के तौर पर पेश किया गया है ,वह यह है 
"हे मुहम्मद जब लोगों ने तुम्हें घेर रखा हो ,तो तुम सबूके लिए उन दृश्यों को याद करो ,जो हमने तुम्हें बताये हैं ,और जिनको हमने लोगों की आजमाइश के लिए बना दिया था .तुम तो उस पेड़ को याद करो जिस पर कुरान में लानत की गयी है .हम इसी निशानी से लोगों को डराते है"
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :60 
 (इस पेड़ को अरबी में "जक्कूम زقّوم" कहा जाता और हिदी मे"थूहर ,या थूबड़ Cactus कहते हैं अंगरेजी Botany  में इसका नाम "Euphrobia abyssinica " है .यह पेड़ अरब , इस्रायेल और अफरीका में सब जगह मिलता है .मुहम्मद ने कुरान में इसी पेड़ को सबूत के रूप में पेश किया है सूरा -17 :60 )
( नोट -इसी को कहते हैं कि"कुएं का गवाह मेंढक" )
4 -मुहम्मद का सामान्यज्ञान 
लगता है कि मुहम्मद में बुद्धि(GK) नाम की कोई चीज नहीं थी ,क्योंकि जब उस से बैतुल मुक़द्दस के बारे में जानकारी पूछी गयी तो वह बोला ,
"अबू जर ने कहा कि मैंने रसूल से पूछा कि पृथ्वी पर सबसे पहले अल्लाह की कौन सी मस्जिद बनी थी ,रसूल ने कहा "मस्जिदे हराम "यानि मक्का का "काबा "फिर हमने पूछा की दूसरी मस्जिद कौन सी है ,तो रसूल ने कहा "मस्जिदुल अक्सा "यानि यरूशलेम की मस्जिद ,फिर हमने पूछा की इन दौनों मस्जिदों के निर्माण के बीच में कितने सालों का अंतर है ,तो रसूल ने कहा इनके बीच में चालीस सालों का अंतर है "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 585 
अब तक मुहम्मद की यरूशलेम की यात्रा (मेराज Night Journey ) के बारे में कुरान और हदीसों से लिए गए सबूतों का हवाला दिया गया है .अब दुसरे भाग में इतिहास के प्रमाणों के आधार पर मुहम्मद और अल्लाह के दावों की कसौटी करते हैं ,कि इस दावे में कितनी सच्चाई और कितना झूठ 
 है .जिसको भी शंका हो वह विकी पीडिया या दूसरी साईट से जाँच कर सकता है .पाठक कृपया इस लेख को गौर से पढ़ें फिर निष्पक्ष होकर फैसला करें 
5 -बैतुल मुक़द्दस का संक्षिप्त इतिहास 
अबतक दी गयी कुरान की आयतों और हदीसों में मुहम्मद द्वारा यरूशलेम की यात्रा में जिस मस्जिद में नमाज पढ़ने का वर्णन किया गया है ,वह वास्तव में यहूदियों का मंदिर ( Temple ) था .जिसे हिब्रू भाषा में " मिकदिशמקדשׁ "कहा जाता है .इसका अर्थ "परम पवित्र स्थान यानी Sancto Santorum कहते हैं .इसका उल्लेख बाइबिल में मिलता है ( बाइबिल मत्ती -24 :1 -2 ) इस मंदिर को इस्लाम से पूर्व दो बार तोडा गया था ,और इस्लाम के बाद तीसरी बार बनाया गया था .इतिहास में इसे पहला ,दूसरा ,और तीसरा मंदिर के नाम से पुकारते हैं .इसका विवरण इस प्रकार है -
1 - पहले मंदिर का निर्माण और विध्वंस 
पहले मंदिर का निर्माण इस्रायेल के राजा दाऊद(Davidדוד ) के पुत्र राजा सुलेमान (Solomonשלמן ) ने सन 975 ई ० पू में करवाया था .सुलेमान का जन्म सन 1011 ई पू और म्रत्यु सन 931 ई .पू में हुई थी सुलेमान ने अपने राज की चौथी साल में यह भव्य मंदिर बनवाया था ,और इसके निर्माण के लिए सोना ,चन्दन ,और हाथीदांत भारत से मंगवाए थे ( बाइबिल 1 राजा अध्याय 5 से 7 तक I-kings10:22 )
सुलेमान के इस मंदिर को सन 587 BCE में बेबीलोन के राजा "नबूकदनजर (Nebuchadnezzar ) ने ध्वस्त कर दिया था .और यहूदियों को गुलाम बना कर बेबीलोन ले गया था .जाते जाते नबूकदनजर मंदिर के स्थान पर अपने एक देवता की मूर्ति लगवा गया था .और सारा यरूशलेम बर्बाद कर गया था .
(बाइबिल -यिर्मयाह 2 :24 से 20 )
इसके बाद जब सन 538 ई .पू में जब ईरान के सम्राट खुसरू ( cyrus ) ने बेबीलोन को पराजित कर दिया तो उसने यहूदियों को आजाद कर दिया और अपने देश में जाने की अनुमति दे दी थी .लेकिन करीब 419 साल तक यरूशलेम में कोई मंदिर नहीं बन सका .
2 दूसरे मदिर का निर्माण और विध्वंस 
वर्षों के बाद जब सन 19 ई .पू में जब इस्रायेल में हेरोद (Herod ) नामका राजा हुआ तो उसने फिर से मंदिर का निर्माण करवाया ,जो हेरोद के मंदिर के नामसे विख्यात था ,यही मंदिर ईसा मसीह के ज़माने भी मौजूद था .लेकिन जब यहूदियों ने ईसा मसीह को सताया ,तो उन्होंने इस मंदिर के नष्ट होने की भविष्यवाणी कर दी थी ,जो बाइबिल में इस तरह मिलती है, -
."फिर जब यीशु मंदिर से निकलते हुए रास्ते में जा रहे थे तो उनके शिष्यों ने उनको मंदिर की ईमारत की भव्यता दिखाया ,तब यीशु ने कहा कि,मैं तुमसे सच कहता हूँ ,कि एक दिन इस मंदिर के पत्थर पर पत्थर नहीं बचेगा ,और सारा मंदिर ढहाया जायेगा "
बाइबिल नया नियम -मत्ती -24 :1 -2 ,मरकुस -13 :1 -2 ,और लूका -19 :41 से 45 ,और लूका -21 :20 -45 
ईसा मसीह के समय यरूशलेम पर रोमन लोगों का राज्य था ,और यहूदी उसे पसंद नहीं करते थे .इसलिए सन 66 ईसवी में यहूदियों ने विद्रोह कर दिया .और विद्रोह को कुचलने के लिए रोम के सम्राट " (Titus Flavius Caeser Vespasianus Augustus तीतुस फ्लेविअस ,कैसर ,वेस्पनुअस अगस्तुस ) ने सन 70 में यरूशलेम पर हमला कर दिया .और लाखों लोग को क़त्ल कर दिया .फिर तीतुस ने हेरोद के मंदिर में आग लगवा कर मंदिर की जगह को समतल करावा दिया .और मंदिर कोई भी निशानी बाकि नहीं रहने दी .इस तरह ईसा मसीह की भविष्यवाणी सच हो गयी .


कुरान में भी इस घटना के बारे में उल्लेख मिलता है ,जो इस प्रकार है ,


"फिर हमने तुम्हारे विरुद्ध शत्रुओं को खड़ा कर दिया ,ताकि वह तुम्हारा चेहरा बिगाड़ दें ,और बैतुल मुक़द्दस के अन्दर घुस जाएँ ,जैसे वह पहली बार घुसे थे ,और उनको जोभी चीज हाथ में आई थी उस पर कब्ज़ा किया था .और मस्जिद को तबाह करके रख दिया था .
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :17 
इस प्रकार इतिहास ,बाइबिल और कुरान से साबित होता है कि सन 70 से मुसलमानों के राज्य तक यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद नहीं थे ,बल्कि उस जगह समतल मैदान था .मस्जिद का फिर से निर्माण खलीफाओं ने करवाया था ,जिसका विवरण इस तरह है ,
6 -मंदिर की जगह मस्जिद का निर्माण 
जब सन 638 उमर बिन खत्ताब खलीफा था ,तो उसने यरूशलेम की जियारत की थी .और वहां नमाज पढ़ने के लिए मदिर के मलबे को साफ करवाया था .और उसके सनिकों ने खलीफा के साथ मैदान में नमाज पढ़ी थी .बाद में जब उमैया खानदान में "अमीर अब्दुल मालिक बिन मरवानعبد الملك بن مروان"सन 646 ईस्वी में सुन्नियों का पांचवां खलीफा यरूशलेम आया तो उसने पुराने मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी ,जो एक ऊंची सी जगह पर है ,इसी को आज" मस्जिदुल अक्सा " Dom of Rock भी कहा जाता है .क्योंकि इसके ऊपर एक गुम्बद है .अब्दुल मालिक ने इस मस्जिद के निर्माण के किये "बैतुल माल" से पैसा लिया था ,और गुम्बद के ऊपर सोना लगवाने के लिए सोने के सिक्के गलवा दिए थे .आज भी यह मस्जिद इस्रायेल अरब के विवाद का कारण बनी हुई है .और दौनों इस पर अपना दावा कर रहे हैं 
7 -खलीफा ने मस्जिद क्यों बनवाई 
अब्दुल मलिक का विचार था कि अगर वह यरूशलेम में उस जगह पर मस्जिद बनवा देगा ,तो वह यहूदियों और ईसाइयों हमेशा दबा कर रख सकेगा .क्योंकि दौनों ही इस जगह को पवित्र मानते है .लेकिन जब कुछ मुसलमानों ने इसे बेकार का खर्चा बता कर आपत्ति प्रकट की ,तो मलिक ने विरोधियों को शांत करने के लिए यह हदीस सुना दी ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा ,यदि कोई घर में ही नमाज पढ़ेगा ,तो उसे एक नमाज का पुण्य मिलेगा ,और अगर वह अपने कबीले के लोगों के साथ नमाज पढ़ेगा तो ,उसे 20 नमाजों का पुण्य मिलेगा .और जुमे में जमात के साथ नमाज पढ़ने से 50 नमाजों का पुण्य मिलेगा .लेकिन यदि जोभी व्यक्ति यरूशलेम की "बैतुल मुक़द्दस " में नमाज पढ़ेगा तो उसे 50 हजार नमाजों का पुण्य मिलेगा "
इब्ने माजा-तिरमिजी -हदीस 247 ,और मलिक मुवत्ता-जिल्द 5 हदीस 17 
इस तरह से अब्दुल मलिक यरूशलेम में मुसलमानों की जनसंख्या बढ़वाना चाहता था ,की मुसलमान पुण्य प्राप्ति के लिए यरूशलेम में रहने लगें .
लेकिन सन 1862 मुसलमान यरूशलेम की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सके थे .क्योंकि उसपर ईसाइयों का कब्ज़ा हो गया था .बाद में तुर्की के खलीफा "अब्दुल हमीदعبد الحميد "( 1878 -1909 )ने इंगलैंड के "प्रिंस ऑफ़ वेल्स Prince of Wels ) जो बाद में King Edward V II बना ,उस से अनुमति लेकर मस्जिद की मरम्मत करवाई और मुसलमानों को एक मेहराब के नीचे नमाज पढ़ने की आज्ञा प्राप्त कर ली थी .जो अभी तक चल रही है .
8-विचारणीय प्रश्न 
अब इन सभी तथ्यों और सबूतों को देखने का बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक हैं ,क़ि जब सन 70 से कर यानि हेरोद के मंदिर के ध्वस्त होने से .सन 691 तक यानी अब्दुल मालिक द्वारा मस्जिद बन जाने तक ,यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद का कोई नामोनिशान ही नहीं था ,केवल समतल मैदान था ,तो मुहम्मद ने सन 621 में यरूशलेम की अपनी तथाकथित यात्रा में किस मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ?और लोगों को कौन सी मस्जिद का आँखों देखा वर्णन किया था ?क्या कुरान की वह आयतें 691 बाद लिखी गयी हैं ,जिन में मुहम्मद की यरूशलेम की मस्जिद में नमाज पढ़ने का जिक्र है .हम कैसे माने कि कुरान में हेराफेरी नहीं हुई ?क्या कोई अपनी मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठला सकता है ?
आप लोग कृपया लेख दुबारा पढ़िए और फिर फैसला करिए .और बताइए कि ,यदि हम कुरान और हदीसों की पहले वाली बातों को सत्य मान लें ,तो हमें दूसरी हदीसों और इस्लामी इतिहास को झूठा साबित करना होगा .!
बताइये आप कौनसी बात पर विश्वास करेंगे ?


http://www.abrahamic-faith.com/night-journey.html

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

सेकुलर आतंकवाद !

सेकुलरिज्म ,सम्प्रदायवाद और आतंकवाद यह सब शब्द लोगों की विचारधारा और उनके सोचने के ढंग से सम्बंधित है .अभी तक सेकुलरिज्म को सम्प्रदायवाद का विपरीत शब्द (opposit ) माना जाता है .लेकिन समय के साथ सेकुलरिज्म शब्द आतंकवाद का पर्यायवाची बनता जा रहा है ..इस बात को और स्पष्ट करने के लिए हमें शब्दों के अर्थ और अभिप्राय को ठीक से समझना जरुरी है ,क्योंकि इनका हमारे अस्तित्व और देश की अखंडता से बड़ा गहरा सम्बन्ध है .यहाँ हम एक एक शब्द के बारे में समझते है -
1 -आतंकवाद
इस विचार के लोग दूसरों पर अपनी बात बलपूर्वक मनवाने में विश्वास रखते है ,चाहे वह धार्मिक विषय हो या राजनीतिक विश्हय हो .यह लोग हमेशा खुद को सही और दूसरों को गल़त मानते हैं ,इनका एकमात्र उद्देश्य देश में अस्थिरता ,और भय का वातावरण बनाये रखना है .ताकि देश की एकता खंडित हो जाये .इस समय देश में नक्सली जैसे और कई आतंकी संगठन कार्यरत है .जो निर्दोष लोगों की हत्या को अपना धर्म समझते. लेकिन कुछ ऐसे आतंकी गिरोह है जिनके आका देश के बाहर हैं ,और उनके गुर्गे यहाँ आतंकी कार्य करते रहते हैं लेकिन सब की कार्यविधि और लक्ष्य एक ही है ,भारत को नुकसान पहुचना ,और दहशत फैलाना .ऐसे लोग अपने कुत्सित इरादों की पूर्ति के लिए निर्दोषों को बम से उड़ने में नहीं झिझकते है ,
हमारा कर्तव्य है ऐसे लोगों पर नजर रखे और इनकी जानकारी सम्बंधित अधिकारीयों को जरुर दे दें
2-सम्प्रदायवाद
भारत में अनेकों धर्म ,संप्रदाय और मत पैदा हुए हैं जो मिलजुल कर रहते आये हैं सविधान के अनुसार सबको अपने धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार है .लेकिन किसी को छल से या जबरन अपना विचार थोपने कोई अधिकार नहीं है .चाहे वह धार्मिक विचार क्यों न हो .ऐसा करने से ही सम्प्रदायवाद का जन्म होता है .चाहे कितनी भी अच्छी बात हो वह किसी को बलपूर्वक मनवाना उचित नहीं है
कुछ लोग सिर्फ इस्लाम को सम्प्रदायवाद से जोड़कर देखते है ,तो उन्हें समझना चाहिए ईसाई और दुसरे लोग भी उन से कम नहीं हैं .खुसी की बात यह है कि कुछ इस्लामी देशों में भी ऐसे अनेकों प्रगतिशील सुधारवादी संगठन बन गए हैं जो रुढ़िवादी ,आतंकी विचारों का विरोध करते है ,निश्चय ही यह शुभ संकेत है .
3-सेकुलरिज्म या धर्मसमभाव
सेकुलरिज्म विदेश से आयातित शब्द है . कानूनी तौर से इसका अर्थ "धर्मनिरपेक्षता " रख दिया है ,जो पूरी तरह से भ्रामक आशयविहीन लगता है . भारत की किसी भी भाषा के साहित्य को खोज कर देखिये यह शब्द कहीं नहीं मिलेगा .आपको प्राचीन पुस्तकों में केवल धार्मिक और अधर्मी शब्द ही मिलेंगे .फिर भी कुछ लोगों ने " सेकुलरिज्म ' के यह अर्थ किये है ,जैसे "सर्वधर्मसमभाव " पंथ निरपेक्षता " आदि ,
यदि सेकुलरिज्म का आशय सभी धर्मों ,पंथों ,और मतों का सामान रूप से सम्मान और आदर करना है ,तो भारत का हरेक हिन्दू , सिख ,जैन ,और बौद्ध स्वाभाविक रूप से सेकुलर है . आज भी हिन्दू दरगाहों ,मजारों , पर जाते हैं और गुरद्वारों ,बुद्ध ,जैन मंदिर में जाते ,सबी एक दूसरों के त्योहारों में शामिल होते है ,फिर कानून बना कर लोगों को सेकुलर बनाने की जरुरत क्यों पड़ गई .
बताइये क्या तोते (PArrot ) पर हरा रंग पोतने की जरुरत होती है ?
निश्चय ही यह एक राजनीतिक षडयंत्र है .यदि जरुरत होती तो संविधान के निर्माता डा ० बाबा साहेब अम्बेडकर संविधान में सेकुलर शब्द पहले ही लिख देते . इसके लिए हमें कांगरेसी सेकुलरिज्म को समझना होगा .
4 -कांग्रेसी सेकुलरिज्म
वास्तव में सरकारी सेकुलरिज्म का तात्पर्य " तुष्टिकरण " है in fact, official secularism means "appeasement"
यह बात किसी से भी छुपी नहीं है कि कान्ग्रेसिओं दिल में हिन्दू विरोधी मानसिकता कूट कूट कर भरी हुई है ,जिसे यह यदाकदा प्रकट भी कर देते है , दिग्विजय सिंह इसका एक उदहारण है . इसी सेकुलरिज्म का सिद्धांत है ,एक समुदाय को खुश करने के लिए हिन्दुओं को जितना बदनाम ,प्रताड़ित करोगे उस समुदाय के उतने ही वोट अधिक मिलेंगे .क्योंकि यह घाघ नेता जानते हैं कि अल्प संख्यक लोग थोक में वोट देते है .यह सरकारी सेकुलर जानते हैं कि अगर सत्ता पर कोई खतरा है ,तो वह हिन्दुओं की एकता से है ,इसलिए किसी न किसी तरह से हिन्दू एकता को भंग किया जाये ,जब भी हिन्दू एक होने लगें उनको कोई न कोई आरोप लगा कर अन्दर कर दिया जाये .आज इन सेकुलरों में हिन्दुओं को गलियां देने की होड़ सी लग रही है .और जो हिन्दू संस्थाओं ,संतों को जितनी अधिक गलियाँ वह उतना बड़ा सेकुलर माना जायेगा
5-सेकुलर आतंकवाद
आप देख चुके हैं ,कि जैसे हर प्रकार का आतंकवाद ,और सम्प्रदायवाद का मुख्य उद्देश्य देश में अस्थिरता और अव्यवस्था फैलाना है .आज यही काम सोनिया जी की सरकार करने वाली है.अपनी इसी इच्छा को पूरी करने के लिए सोनिया ने अपनी सलाहकार मंडली में चुन चुन कर ऐसे सेकुलरों को शामिल किया है ,को हिन्दू विरोध के लिए कुख्यात हैं ,इनने हर्ष मंदर ,तीस्ता सीतलवाड ,सय्यद शहाबुद्दीन ,शबनम हाशिमी जी लोग शामिल है .फिर इन्ही जैसे लोगो की सलाह से सेकुलर देवी सोनिया जी ने 2011में एक " सांप्रदायिक लक्षित हिंसा विरोधी अधिनियम ' सरकार की बिना सहमति के पेश कर दिया .सब जानते हैं कि सोनिया कट्टर कैथोलिक ईसाई है ,और पोप की पक्की अनुयायी है .इन्ही पोपों ने protastant ईसाइयों सिर्फ इस बात पर जिन्दा जलवा दिया था क्योंकि वह बाइबिल की उस व्याख्या से सहमत नहीं थे ,जो तत्कालीन पोप करते थे ,पोपों का यह दमन चक्र सदियों चलता रहा था .अब सोनिया अपने पापं की यही निति भारत में लागु करना चाहती है .
यदि यह अधिनियम पारित हो गया तो हिन्दुओं के लिए सिर्फ यही विकल्प होंगे ,ईसाई या मुसलमान बन जाएँ ,देश से पलायन कर जाएँ या फिर जेलों में चक्की पीसें ,केवल पांच साल में हिन्दू विलुप्त प्रजाति बन जायेंगे ,क्योकि इस अधिनियम यही प्रावधान दिए गए हैं .इस विधेयक में कुल 9 अध्याय और 138 धाराएँ हैं ,जिनमे कुछ IPCC और CRPC से ली गयी हैं .यह भारत का पहला अधिनियम है जो नागरिकों को जाती के आधार पर सजा देने की वकालत करता है .और्यः मन कर चलता है कि हिन्दू स्वभाव से आक्रामक और हिंसक होते हैं और हिन्दू ही सबसे पहले दंगे करवाते हैं , साफ है कि सोनिया इस विधेयक के सहारे अपने (कु ) सुपुत्र और फिर उसकी संतानों को हमेशा के लिए भारत पर राज करने का रास्ता बना रही है .
.दिग्विजय सिंह कई बार यह बात उगल चुके है ,इसी लिए उनके निशाने पर हिन्दू संत और संगठन बने रहते हैं .बहुत से लोगों को इस अधिनियम का पूरा ज्ञान नहीं होगा ,इसलिए इसके कुछ चुने हुए बिंदु प्रस्तुत किये जा रहे है ,ताकि अभी से सावधान हो जाएँ और अपना भविष्य इस सेकुलर आतंकवाद से बचा सकें .इस अधिनियम के प्रावधान देखिये .-
1.दंगे के समय बिना किसी जांच पड़ताल के किसी भी हिन्दू को गिरफ्तार किया जा सकता .
2 -हिन्दू तब तक अपराधी माना जाएगा ,जब तक वह खुद को निर्दोष सिद्ध नहीं कर देता .
3 -यदि किसी हिन्दू संगठन के किसी कार्यकर्ता के विरुद्ध कोई अल्पसंख्यक शिकायत करता है ,तो वह पूरा संगठन दोषी माना जाएगा
4-.यदि किसी प्रांत की विरोधी दल की सरकारकी पुलस संप्रदायी दंगे रोकने के हिन्दुओं को गिरफ्तार करने में असफल होती है ,तो उस सरकार को बरखास्त किया जा सकता है .
5 -भारत के बंगलादेशी घुसपैठियों को निकालने की मांग करना ,और जबरन धर्म परिवर्तन करने का विरोध करना भी अपराध होगा .
6 -यदि किसी हिन्दू का मकान या दुकान किराये के लिए उपलब्ध हो ,और वह किसी अल्पसंख्यक को किराये पर देने से इंकार करे ,तो वह हिन्दू स्वामी अपराधी माना जाएगा .
7-यदि कोई अल्पसंख्यक किसी हिन्दू की खाली जमीन पर कब्र ,दरगाह या मस्जिद बना दे तो उस भूमि को खाली नहीं कराया जा सकता ,और विरोध करने पर हिन्दू भूमिस्वामी को सजा दी जा सकती है .
8 -दंगे के दौरान मारे गए हिन्दू के आश्रितों को मुआवजा नहीं दिया जायेगा .
9 -यदि कोई अल्पसंखक किसी हिन्दू लड़की को प्रेमजाल में फंसा ले ,और लड़की के माँ बाप से शादी करने को कहे ,और लड़की के माता पिता ऐसी शादी से मना करें ,तो वह दण्डित होंगे ,चाहे लड़की अवयस्क क्यों न हो.
10-जिन संस्थाओं और संगठनों के नाम में हिन्दू शब्द होगा उनकी मान्यता निरस्त हो जाएगी .
11 -आतंकवादिओं के विरुद्ध आवाज उठाना ,और उनको सजा देने की मांग करना ,एक समुदाय को पीड़ा देने वाला कृत्य मना जायेगा .और ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी .
बताइए यह सेकुलर आतंकवाद नही है तो और क्या है ?.एक तरफ हमारे प्रधान मंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को "शांति पुरुष " कहके उसका सम्मान करते है ,और परोक्ष रूप से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर चुप रहते हैं ,इसे हम क्या कहेंगे ? क्या यही सेकुलरिज्म है ? आप विचार करिये कि एक तरफ वह आतंकवादी हैं जो बिना किसी धर्म और जाति का भेद करके सौ पचास लोगों को अपना निशाना बनाते हैं ,और दूसरी तरफ यह सेकुलर हैं जो चुन कर सिर्फ सभी हिन्दुओं पूरे समूह को समाप्त करने की तय्यारी कर रहे हैं .बताइए ,
हम इन सेकुलरों को सबसे बड़ा आतंकवादी क्यों नहीं मानें ?
(नोट -यह लेख प्रसिद्ध लेखक और आलोचक श्री वीरेन्द्र सिंह परिहार के लेख से प्रेरित है ,जो 8 नव 2011 को दैनिक जागरण पेपर में प्रकाशित हुआ था )


बुधवार, 9 नवंबर 2011

इस्लाम का भविष्य क्या होगा ?

मुसलमान अक्सर अपनी बढ़ती जनसंख्या की डींगें मारते रहते है .और घमंड से कहते हैं कि आज तो हमारे 53 देश हैं .आगे चलकर इनकी संख्या और बढ़ेगी .इस्लाम दुनिया भर में फ़ैल जायेगा .विश्व ने जितने भी धर्म स्थापक हुए हैं ,सभी ने अपने मत के बढ़ने की कामना की है .लेकिन मुहम्मद एकमात्र व्यक्ति था जिसने इस्लाम के विभाजन ,तुकडे हो जाने और सिमट जाने की पहिले से ही भविष्यवाणी कर दी थी .यह बात सभी प्रमाणिक हदीसों में मौजूद है .

यदि कोई इन हदीसों को झूठ कहता है ,तो उसे मुहम्मद को झूठ साबित करना पड़ेगा .क्योंकि यह इस्लाम के भविष्य के बारे में है .सभी जानते हैं कि किसी आदर्श ,या नैतिकता के आधार पर नहीं बल्कि तलवार के जोर पर और आतंक से फैला है .इस्लाम कि बुनियाद खून से भरी है .और कमजोर है .मुहम्मद यह जानता था .कुरान में साफ लिखा है -

1-इस्लाम की बुनियाद कमजोर है
"कुछ ऐसे मुसलमान हैं ,जिन्होंने मस्जिदें इस लिए बनायीं है ,कि लोगों को नुकसान पहुंचाएं ,और मस्जिदों को कुफ्र करने वालों के लिए घात लगाने और छुपाने का स्थान बनाएं .यह ऐसे लोग हैं ,जिन्होंने अपनी ईमारत (इस्लाम )की बुनियाद किसी खाई के खोखले कगार पर बनायीं है ,जो जल्द ही गिरने के करीब है .फिर जल्द ही यह लोग जहन्नम की आग में गिर जायेंगे "सूरा -अत तौबा 9 :108 और 109

2 -इस्लाम से पहिले विश्व में शांति थी .यद्यपि इस्लाम से पूर्व भी अरब आपस में मारकाट किया करते थे ,लेकिन जब वह मुसलमान बन गए तो और भी हिंसक और उग्र बन गए .जैसे जैसे उनकी संख्या बढ़ती गयी उनका आपसी मनमुटाव और विवाद भी बढ़ाते गए .वे सिर्फ जिहाद में मिलने वाले माल के लिए एकजुट हो जाते थे .फिर किसी न किसी बात पर फिर लड़ने लगते थे ,शिया सुनी विवाद इसका प्रमाण है .
इसके बारे में मुहमद के दामाद हजरत अली ने अपने एक पत्र में मुआविया को जो लिखा है उसका अरबी के साथ हिंदी और अंगरेजी अनुवाद दिया जा रहा है -

3 -हजरत अली का मुआविया को पत्र
हजरत अली का यह पत्र संख्या 64 है उनकी किताब" नहजुल बलाग "में मौजूद है .
http://www.imamalinet.net/EN/nahj/nahj.htm

"यह बात बिलकुल सत्य है कि,इस्लाम से पहिले हम सब एक थे .और अरब में सबके साथ मिल कर शांति से रह रहे थे .तुमने (मुआविया )महसूस किया होगा कि ,जैसे ही इस्लाम का उदय हुआ ,लोगों में फूट और मनमुटाव बढ़ाते गए .इसका कारण यह है ,कि एक तरफ हम लोगों को शांति का सन्देश देते रहे ,और दूसरी तरफ तुम मुनाफिक(Hypocryt )ही बने रहे ,और इस्लाम के नाम पर पाखंड और मनमर्जी चलाते रहे.तुमने अपने पत्र में मुझे तल्हा और जुबैर की हत्या का आरोपी कहा है .मुझे उस पर कोई सफ़ाई देने की जरुरत नहीं है .लेकिन तुमने आयशा के साथ मिलकर मुझे मदीना से कूफा और बसरा जाने पर विवश कर दिया ,तुमने जो भी आरोप लगाये हैं ,निराधार है ,और मैं किसी से भी माफ़ी नहीं मांगूंगा "
मुआविया के पत्र का हजरत अली का मुआविया को जवाब -नहजुल बलाग -पत्र संख्या 64

ومن كتاب له عليه السلام
كتبه إلى معاوية، جواباً عن كتاب منه
أَمَّا بَعْدُ، فَإِنَّا كُنَّا نَحْنُ وَأَنْتُمْ عَلَى مَا ذَكَرْتَ مِنَ الاَُْلْفَةِ وَالْجَمَاعَةِ، فَفَرَّقَ بيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَمْسِ أَنَّا آمَنَّا وَكَفَرْتُمْ، وَالْيَوْمَ أَنَّا اسْتَقَمْنَا وَفُتِنْتُمْ، وَمَا أَسْلَمَ مُسْلِمُكُمْ إِلاَّ كَرْهاً وَبَعْدَ أَنْ كَانَ أَنْفُ الاِِْسْلاَمِكُلُّهُ لِرَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وآله حرباً
وَذَكَرْتَ أَنِّي قَتَلْتُ طَلْحَةَ وَالزُّبَيْرَ، وَشَرَّدْتُ بِعَائِشَةَ وَنَزَلْتُ بَيْنَ الْمِصْرَيْنِ وَذلِكَ أَمْرٌ غِبْتَ عَنْهُ، فَلاَ عَلَيْكَ، وَلاَ الْعُذْرُ فِيهِ إِلَيْكَ

[ A reply to Mu'awiya's letter. ]
It is correct as you say that in pre-Islamic days we were united and at peace with each other. But have you realized that dissensions and disunity between us started with the dawn of Islam. The reason was that we accepted and preached Islam and you remained heathen. The condition now is that we are faithful and staunch followers of Islam and you have revolted against it. Even your original acceptance was not sincere, it was simple hypocrisy. When you saw that all the big people of Arabia had embraced Islam and had gathered under the banner of the Holy Prophet (s) you also walked in (after the Fall of Makkah.)
In your letter you have falsely accused me of killing Talha and Zubayr, driving Ummul Mu'minin Aisha from her home at Madina and choosing Kufa and Basra as my residence. Even if all that you say against me is correct you have nothing to do with them, you are not harmed by these incidents and I have not to apologize to you for any of them.
4 -इस्लाम का विभाजन

इस्लाम के पूर्व से ही अरब के लोग दूसरों को लूटने और आपसी शत्रुता के कारण लड़ते रहते थे .लेकिन मुसलमान बन जाने पर उनको लड़ने और हत्याएं करने के लिए धार्मिक आधार मिल गया .वह अक्सर अपने विरोधियों को मुशरिक ,मुनाफिक और काफ़िर तक कहने लगे और खुद को सच्चा मुसलमान बताने लगे .और अपने हरेक कुकर्मों को कुरान की किसी भी आयत या किसी भी हदीस का हवाला देकर जायज बताने लगे .धीमे धीमे सत्ता का विवाद धार्मिक रूप धारण करता गया .मुहम्मद की मौत के बाद ही यह विवाद इतना उग्र हो गया की मुसलमानों ने ही मुहम्मद के दामाद अली ,और उनके पुत्र हसन हुसैन को परिवार सहित क़त्ल कर दिया .उसके बाद ही इस्लाम के टुकडे होना शुरू हो गए .जिसके बारे में खुद मुहम्मद ने भविष्यवाणी की थी .-
"अबू हुरैरा ने कहा कि,रसूल ने कहा था कि यहूदी और ईसाई तो 72 फिरकों में बँट जायेंगे ,लेकिन मेरी उम्मत 73 फिरकों में बँट जाएगी ,और सब आपस में युद्ध करेंगे "अबू दाऊद-जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4579
"अबू अमीर हौजानी ने कहा कि ,रसूल ने मुआविया बिन अबू सुफ़यान के सामने कहा कि ,अहले किताब (यहूदी ,ईसाई ) के 72 फिरके हो जायेंगे ,और मेरी उम्मत के 73 फिरके हो जायेंगे ..और उन में से 72 फिरके बर्बाद हो जायेंगे और जहन्नम में चले जायेंगे .सिर्फ एक ही फिरका बाकी रहेगा ,जो जन्नत में जायेगा "अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4580 .
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,ईमान के 72 से अधिक टुकडे हो जायेंगे ,और मुसलमानों में ऐसी फूट पड़ जाएगी कि वे एक दुसरे कीहत्याएं करेंगे ."
अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4744 .
"अरफजः ने कहा कि मैं ने रसूल से सुना है ,कि इस्लाम में इतना बिगाड़ हो जायेगा कि ,मुसलमान एक दुसरे के दुश्मन बन जायेंगे ,और तलवार लेकर एक दुसरे को क़त्ल करेंगे "अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4153 .
"सईदुल खुदरी और अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,पाहिले तो मुसलमान इकट्ठे हो जायेंगे ,लेकिन जल्द ही उनमें फूट पड़ जाएगी .जो इतनी उग्र हो जाएगी कि वे जानवरों से बदतर बन जायेगे .फिर केवल वही कौम सुख से जिन्दा रह सकेगी जो इनको इन को ( नकली मुसलमानों )को क़त्ल कर देगी .फिर अनस ने रसूल से उस कौम की निशानी पूछी जो कामयाब होगी .तो रसुलने बताया कि,उस कौम के लोगों के सर मुंडे हुए होंगे .और वे पूरब से आयेंगे "अबू दाऊद-जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4747 .
5 -इस्लाम के प्रमुख फिरके

आमतौर पर लोग मुसलमानों के दो ही फिरकों शिया और सुन्नी के बारे में ही सुनते रहते है ,लेकिन इनमे भी कई फिरके है .इसके आलावा कुछ ऐसे भी फिरके है ,जो इन दौनों से अलग है .इन सभी के विचारों और मान्यताओं में इतना विरोध है की यह एक दूसरे को काफ़िर तक कह देते हैं .और इनकी मस्जिदें जला देते है .और लोगों को क़त्ल कर देते है .शिया लोग तो मुहर्रम के समय सुन्नियों के खलीफाओं ,सहबियों ,और मुहम्मद की पत्नियों आयशा और हफ्शा को खुले आम गलियां देते है .इसे तबर्रा कहा जाता है .इसके बारे में अलग से बताया जायेगा .
सुन्नियों के फिरके -हनफी ,शाफई,मलिकी ,हम्बली ,सूफी ,वहाबी ,देवबंदी ,बरेलवी ,सलफी,अहले हदीस .आदि -
शियाओं के फिरके -इशना अशरी ,जाफरी ,जैदी ,इस्माइली ,बोहरा ,दाऊदी ,खोजा ,द्रुज आदि
अन्य फिरके -अहमदिया ,कादियानी ,खारजी ,कुर्द ,और बहाई अदि
इन सब में इतना अंतर है की ,यह एक दुसरे की मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ते .और एक दुसरे की हदीसों को मानते है .सबके नमाज पढ़ने का तरीका ,अजान ,सब अलग है .इनमे एकता असंभव है .संख्या कम होने के से यह शांत रहते हैं ,लेकिन इन्हें जब भी मौका मिलाता है यह उत्पात जरुर करते हैं .
6 -इस्लाम अपने बिल में घुस जायेगा

मुहम्मद ने खुद ही इस्लाम की तुलना एक विषैले नाग से की है .इसमे कोई दो राय नहीं है .सब जानते हैं कि यह इस्लामी जहरीला नाग कितने देशों को डस चुका है .और भारत कि तरफ भी अपना फन फैलाकर फुसकार रहा है .लेकिन हम हिन्दू इतने मुर्ख हैं कि सेकुलरिज्म ,के नामपर ,और झूठे भाईचारे के बहाने इस इस्लामी नाग को दूध पिला रहे हैं .और तुष्टिकरण की नीतियों को अपना कर आराम से सो रहे है .आज इस बात की जरुरत है की ,हम सब मिल कर मुहम्मद की इस भविष्यवाणी को सच्चा साबित करदें ,जो उसने इन हदीसों में की थीं .-
"अबू हुरैरा ने कहा की ,रसूल ने कहा कि,निश्चय ही एक दिन इस्लाम सारे विश्व से निकल कर कर मदीना में में सिमट जायेगा .जैसे एक सांप घूमफिर कर वापिस अपने बिल में घुस जाता है 'बुखारी -जिल्द 3 किताब 30 हदीस 100 .
"अब्दुल्ला बिन अम्र बिन यासर ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,जल्द ही एक ऐसा समत आयेगा कि जब लोग कुरान तो पढेंगे ,लेकिन कुरान उनके गले से आगे कंधे से निचे नहीं उतरेगी.और इस्लाम का कहीं कोई निशान नहीं दिखाई देगा "
बुखारी -जिल्द 9 किताब 84 हदीस 65
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा है कि ,इस्लाम सिर्फ दो मस्जिदों (मक्का और मदीना )के बीच इस तरह से रेंगता रहेगा जैसे कोई सांप इधर उधर दो बिलों के बीच में रेंगता है "
सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 270 .
"इब्ने उमर ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ऐसा निकट भविष्य में होना निश्चय है ,कि इस्लाम और ईमान दुनिया से निकलकर वापस मदीने में इस तरह से घुस जायेगा ,जैसे कोई विषैला सांप मुड़कर अपने ही बिल में घुस जाता है "
सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 271 और 272 .
अब हम देखते हैं कि मुसलमान इन हदीसों को झूठ कैसे साबित करते है . आज लीबिया ,यमन और दूसरे इस्लामी देशों में जो कुछ हो रहा है ,उसे देखते हुए यही प्रतीत होता है कि मुहम्मद साहिब की यह हदीसें एक दिन सच हो जायेगीं ,जिनमे इस्लाम के पतन और विखंडन की भविष्यवाणी की गयी है .!


http://www.faithfreedom.org/oped/AbulKasen50920.htm